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आठ माह बीतने के बाद भी जल-थल दोनों मार्गों से वंचित घरुड़ी के ग्रामीण
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गोरी नदी में लकड़ी के खंबे लगाकर बनाई गई ट्राली। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। शासन प्रशासन की उदासीनता के कारण बंगापानी तहसील के घरुड़ी गांव के लोग गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। गांव तक जाने के लिए न जल मार्ग से रास्ता है और न ही थल मार्ग से। गांव तक पहुंचने के लिए अस्थायी ट्रॉली से आवाजाही कर रहे थे लेकिन अब नदी का जल स्तर बढ़ने से यहां भी खतरा पैदा हो गया है। ट्रॉली में लगी रस्सी भी नदी में गिर गई है।
बंगापानी तहसील का घरुड़ी आपदा प्रभावित गांव है। गांव के ठीक सामने बहने वाली गोरी नदी पिछले एक दशक से ग्रामीणों की जमीन को धीरे-धीरे निगल रही है। गांव तक पहुंचने के लिए एकमात्र साधन ट्रॉली है। यह ट्रॉली नदी का जलस्तर बढ़ते ही बह जाती है। पिछले साल आपदा काल में भी ट्रॉली बह गई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने स्वयं लकड़ी की बल्लियां गाढ़कर ट्रॉली की व्यवस्था की लेकिन जल स्तर बढ़ने से यह कारगर साबित नहीं हुआ। इसके बाद ग्रामीणों को 18 किलोमीटर का फेरा लगाकर गांव तक पहुंचना पड़ा। इसमें भी ट्रॉली से ही दूसरी ओर जाकर जंगल से होते हुए गांव तक पहुंचना पड़ता है। इस रास्ते को भी कहीं पर नदी निगल गई है तो कहीं यह भूस्खलन से ध्वस्त हो गया है। जाड़ों में नदी का जल स्तर घटने के बाद ग्रामीण अस्थायी ट्रॉली से आवाजाही कर रहे थे लेकिन अब जलस्तर बढ़ गया है। इसके चलते सबसे अधिक परेशानी छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही है।
अस्थायी ट्रॉली की रस्सियां नदी में गिर चुकी हैं। नदी का जल स्तर बढ़ने लगा है। इसके चलते अस्थायी ट्रॉली से आवाजाही में हादसे का खतरा बना हुआ है। अभी तक ट्रॉली लगाने के लिए लोनिवि बेसमेंट तक नहीं बन पाया है जबकि मानसून आने में अब केवल दो माह का समय रह गया है। इस बार भी बरसात में गांव के 10 परिवारों को शेष दुनिया से अलग-थलग रहना पड़ेगा। -घरुड़ी के सरपंच गंभीर सिंह सामंत सरपंच।
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नदी में सुरक्षित आवाजाही के लिए ट्रॉली का निर्माण कार्य चल रहा है। मानसून काल से पहले ट्रॉली लगाने का कार्य पूरा हो इसके लिए कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया जाएगा। - अनिल कुमार शुक्ला, एसडीएम धारचूला।
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बंगापानी तहसील का घरुड़ी आपदा प्रभावित गांव है। गांव के ठीक सामने बहने वाली गोरी नदी पिछले एक दशक से ग्रामीणों की जमीन को धीरे-धीरे निगल रही है। गांव तक पहुंचने के लिए एकमात्र साधन ट्रॉली है। यह ट्रॉली नदी का जलस्तर बढ़ते ही बह जाती है। पिछले साल आपदा काल में भी ट्रॉली बह गई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने स्वयं लकड़ी की बल्लियां गाढ़कर ट्रॉली की व्यवस्था की लेकिन जल स्तर बढ़ने से यह कारगर साबित नहीं हुआ। इसके बाद ग्रामीणों को 18 किलोमीटर का फेरा लगाकर गांव तक पहुंचना पड़ा। इसमें भी ट्रॉली से ही दूसरी ओर जाकर जंगल से होते हुए गांव तक पहुंचना पड़ता है। इस रास्ते को भी कहीं पर नदी निगल गई है तो कहीं यह भूस्खलन से ध्वस्त हो गया है। जाड़ों में नदी का जल स्तर घटने के बाद ग्रामीण अस्थायी ट्रॉली से आवाजाही कर रहे थे लेकिन अब जलस्तर बढ़ गया है। इसके चलते सबसे अधिक परेशानी छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही है।
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अस्थायी ट्रॉली की रस्सियां नदी में गिर चुकी हैं। नदी का जल स्तर बढ़ने लगा है। इसके चलते अस्थायी ट्रॉली से आवाजाही में हादसे का खतरा बना हुआ है। अभी तक ट्रॉली लगाने के लिए लोनिवि बेसमेंट तक नहीं बन पाया है जबकि मानसून आने में अब केवल दो माह का समय रह गया है। इस बार भी बरसात में गांव के 10 परिवारों को शेष दुनिया से अलग-थलग रहना पड़ेगा। -घरुड़ी के सरपंच गंभीर सिंह सामंत सरपंच।
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नदी में सुरक्षित आवाजाही के लिए ट्रॉली का निर्माण कार्य चल रहा है। मानसून काल से पहले ट्रॉली लगाने का कार्य पूरा हो इसके लिए कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया जाएगा। - अनिल कुमार शुक्ला, एसडीएम धारचूला।