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पभ्या गांव में सड़़क का इंतजार कर रहे हैं 30 परिवार
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गणाईगंगोली (पिथौरागढ़)। गणाई तहसील के पभ्या गांव में सड़क सुविधा न होने से लोग पलायन के लिए मजबूर हैं। सड़क के अभाव में गांव से 15 लोग पलायन कर चुके हैं। उपचार के लिए अल्मोड़ा जाना पड़ता है।
जोलियाखेत से पभ्या पहुंचने के लिए ग्रामीणों को चार किमी खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। दुर्गम रास्ते को पार करने में बुजुर्ग, महिलाओं और छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है।
चढ़ाई पार करने के बाद उन्हें नीचे सड़क पर उतरना पड़ता है। इलाज के लिए आठ किमी दूर गणाई आना पड़ता है। इसमें चार किमी लंबा रास्ता कठिन है। बीमार और प्रसव पीड़िताओं को डोली से सड़क तक पहुंचाकर यहां से 80 किमी दूर अल्मोड़ा जाना पड़ता है।
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गांव में पहले 45 परिवार रहते थे लेकिन सड़क के अभाव में 15 परिवारों ने हल्द्वानी आदि जगह पलायन कर लिया है, जबकि लोग वर्ष 1998 से सड़क की मांग कर रहे हैं। करीब 22 साल बाद भी सड़क की मांग पूरी नहीं हो सकी है।
20 किमी दूर से आता है गांव में पानी
गणाईगंगोली (पिथौरागढ़)। गांव में पानी की व्यवस्था सही नहीं है। 20 किमी दूर बासीखेत से पानी आता है। कभी पेयजल लाइन खराब होती है तो ठीक करने में 15 से 20 दिन लग जाते हैं।
सड़क न होने से सबको परेशानी होती है। गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है। सड़क न होने से अन्य सुविधाएं भी नहीं मिल पातीं।
- बबीता डोबाल, सामाजिक कार्यकर्ता।
सड़क तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को चार किमी की खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती है। बीमार लोगों को भी इस तरह डोली में ले जाना पड़ता है।
-कुंदन डोबाल, ग्रामीण।
भनेड़ा से पभ्या तक सड़क स्वीकृत है। इसके लिए वन भूमि हस्तांतरण की फाइल केंद्र सरकार में लंबित है। स्वीकृति प्रक्रिया पूरी होते ही सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
- विनोद सिन्हा, ईई, लोनिवि, बेड़ीनाग।
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जोलियाखेत से पभ्या पहुंचने के लिए ग्रामीणों को चार किमी खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। दुर्गम रास्ते को पार करने में बुजुर्ग, महिलाओं और छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है।
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चढ़ाई पार करने के बाद उन्हें नीचे सड़क पर उतरना पड़ता है। इलाज के लिए आठ किमी दूर गणाई आना पड़ता है। इसमें चार किमी लंबा रास्ता कठिन है। बीमार और प्रसव पीड़िताओं को डोली से सड़क तक पहुंचाकर यहां से 80 किमी दूर अल्मोड़ा जाना पड़ता है।
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गांव में पहले 45 परिवार रहते थे लेकिन सड़क के अभाव में 15 परिवारों ने हल्द्वानी आदि जगह पलायन कर लिया है, जबकि लोग वर्ष 1998 से सड़क की मांग कर रहे हैं। करीब 22 साल बाद भी सड़क की मांग पूरी नहीं हो सकी है।
20 किमी दूर से आता है गांव में पानी
गणाईगंगोली (पिथौरागढ़)। गांव में पानी की व्यवस्था सही नहीं है। 20 किमी दूर बासीखेत से पानी आता है। कभी पेयजल लाइन खराब होती है तो ठीक करने में 15 से 20 दिन लग जाते हैं।
सड़क न होने से सबको परेशानी होती है। गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है। सड़क न होने से अन्य सुविधाएं भी नहीं मिल पातीं।
- बबीता डोबाल, सामाजिक कार्यकर्ता।
सड़क तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को चार किमी की खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती है। बीमार लोगों को भी इस तरह डोली में ले जाना पड़ता है।
-कुंदन डोबाल, ग्रामीण।
भनेड़ा से पभ्या तक सड़क स्वीकृत है। इसके लिए वन भूमि हस्तांतरण की फाइल केंद्र सरकार में लंबित है। स्वीकृति प्रक्रिया पूरी होते ही सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
- विनोद सिन्हा, ईई, लोनिवि, बेड़ीनाग।