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नदूध पिलाते समय सांस अटकने से नवजात की मौत
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प्रतीकात्मक
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पिथौरागढ़। जिला महिला अस्पताल में जाखनी विण निवासी एक गर्भवती महिला प्रसव के बाद स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। बच्चे को जन्म देने के कुछ समय बाद जैसे ही वह बच्चे को दूध पिला रही थी। दूध पिलाते समय श्वास नली में दूध चले जाने से नवजात की मौत हो गई।
जाखनी (विण) निवासी महिला को प्रसव पीड़ा होने के बाद जिला महिला अस्पताल लाया गया, यहां महिला ने स्वस्थ लड़के को जन्म दिया। जन्म के कुछ देर बाद मां बच्चे को दूध पिलाने लगी। सांस नली में दूध जाने से नवजात की सांसें अटकने लगीं। परिजनों ने चिकित्सकों को बुलाया लेकिन चिकित्सकों के कई प्रयास के बाद भी नवजात की जान नहीं बच पाई।
दूध पिलाने के सांस नली में दूध जाने के कारण बच्चे की सांस सांस अटक गई थी। काफी प्रयास के बाद भी नवजात को बचाया नहीं जा सका। - डॉ. जेएस नबियाल
दूध पिलाने का तरीका आना जरूरी
पिथौरागढ़। जिला महिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जेएस नबियाल का कहना है कि अधिकतर महिलाओं को नवजात को सही तरीके से दूध पिलाने की जानकारी होती है लेकिन पांच फीसदी महिलाएं इससे अनभिज्ञ होती हैं। माताओं को स्तनपान कराते समय सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
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डॉ. नबियाल का कहना है कि गर्भावस्था और प्रसव के बाद जच्चे बच्चे का विशेष ध्यान रखना चाहिए। महिला को ये ध्यान देना होगा कि अगर बच्चा दूध नहीं पी रहा है तो उसे जबरदस्ती न पिलाएं। जिन महिलाओं को दूध पिलाने में दिक्कत होती है या दूध पिलाना नहीं आता है, उन्हें चिकित्सक, नर्स या बुजुर्ग महिला की सलाह लेनी चाहिए। शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बच्चे को छह माह तक सिर्फ मां का दूध पिलाना चाहिए।
ये सावधानियां बरतें
>> स्तनपान के दौरान अपने बच्चे का सिर उसकी छाती से ऊंचा या 45 डिग्री के कोण में रखना चाहिए। बैठकर स्तनपान कराना उचित होता है।
>> लेटे-लेटे ही स्तनपान कराने से कान के इंफेक्शन का खतरा दोगुना बढ़ जाता है। उसी प्रकार बोतल से दूध पीने वाले बच्चे का सिर तकिये पर ऊंचा उठाकर ही बोतल देनी चाहिए।
>> शिशु को दूध पिलाने के बाद एकदम बिस्तर पर नहीं लिटाना चाहिए, क्योंकि यदि आप ऐसा करते हैं तो शिशु पिया हुआ दूध मुंह से निकाल सकता है। शिशु को दूध पिलाने के बाद उसे कंधे पर लेकर उसकी पीठ पर धीरे-धीरे हाथ फेरें। इससे बच्चे के पेट में दूध का पाचन होता है।
>> दूध पिलाने के तुरंत बाद यदि आपने शिशु को बिना डकार दिलाए लेटा दिया तो कई बार डकार के साथ दूध निकलकर शिशु की श्वास नलिका से होते हुए फेफाड़ों में प्रवेश कर जाता है और शिशु की जान को खतरा हो सकता है।
>> बच्चे के जन्म के बाद उसे मां का दूध पिलाना चाहिए। बच्चे के लिए मां का दूध जीवनदायिनी होता है और बच्चे को कई रोगों से बचाता है। बच्चे को 2-3 घंटे के अंतराल से जब भी वह रोये, स्तनपान कराना सर्वोत्तम है।
>> बच्चे को दूध पिलाने में दिक्कत है तो नर्स, चिकित्सक या गांव की बुजुर्ग महिला से सलाह लें
बच्चों का रखें ख्याल
>> ठंड से बचाने के लिए गर्म कपड़े पहनाएं।
>> सर्द मौसम में तीन से चार दिन में एक बार नहलाएं।
>> नहलाते समय मुंह, नाक में पानी ना जाए विशेष ध्यान रखें।
>> छह माह तक नवजात को सिर्फ मां का दूध पिलाएं।
>> ज्यादा गर्म पानी से ना नहलाएं।
>> नवजात के साथ ही मां भी रखे अपने स्वास्थ्य का ध्यान।
>> सर्दी, जुकाम होने पर चिकित्सक को दिखाएं।
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जाखनी (विण) निवासी महिला को प्रसव पीड़ा होने के बाद जिला महिला अस्पताल लाया गया, यहां महिला ने स्वस्थ लड़के को जन्म दिया। जन्म के कुछ देर बाद मां बच्चे को दूध पिलाने लगी। सांस नली में दूध जाने से नवजात की सांसें अटकने लगीं। परिजनों ने चिकित्सकों को बुलाया लेकिन चिकित्सकों के कई प्रयास के बाद भी नवजात की जान नहीं बच पाई।
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दूध पिलाने के सांस नली में दूध जाने के कारण बच्चे की सांस सांस अटक गई थी। काफी प्रयास के बाद भी नवजात को बचाया नहीं जा सका। - डॉ. जेएस नबियाल
दूध पिलाने का तरीका आना जरूरी
पिथौरागढ़। जिला महिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जेएस नबियाल का कहना है कि अधिकतर महिलाओं को नवजात को सही तरीके से दूध पिलाने की जानकारी होती है लेकिन पांच फीसदी महिलाएं इससे अनभिज्ञ होती हैं। माताओं को स्तनपान कराते समय सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
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डॉ. नबियाल का कहना है कि गर्भावस्था और प्रसव के बाद जच्चे बच्चे का विशेष ध्यान रखना चाहिए। महिला को ये ध्यान देना होगा कि अगर बच्चा दूध नहीं पी रहा है तो उसे जबरदस्ती न पिलाएं। जिन महिलाओं को दूध पिलाने में दिक्कत होती है या दूध पिलाना नहीं आता है, उन्हें चिकित्सक, नर्स या बुजुर्ग महिला की सलाह लेनी चाहिए। शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बच्चे को छह माह तक सिर्फ मां का दूध पिलाना चाहिए।
ये सावधानियां बरतें
>> स्तनपान के दौरान अपने बच्चे का सिर उसकी छाती से ऊंचा या 45 डिग्री के कोण में रखना चाहिए। बैठकर स्तनपान कराना उचित होता है।
>> लेटे-लेटे ही स्तनपान कराने से कान के इंफेक्शन का खतरा दोगुना बढ़ जाता है। उसी प्रकार बोतल से दूध पीने वाले बच्चे का सिर तकिये पर ऊंचा उठाकर ही बोतल देनी चाहिए।
>> शिशु को दूध पिलाने के बाद एकदम बिस्तर पर नहीं लिटाना चाहिए, क्योंकि यदि आप ऐसा करते हैं तो शिशु पिया हुआ दूध मुंह से निकाल सकता है। शिशु को दूध पिलाने के बाद उसे कंधे पर लेकर उसकी पीठ पर धीरे-धीरे हाथ फेरें। इससे बच्चे के पेट में दूध का पाचन होता है।
>> दूध पिलाने के तुरंत बाद यदि आपने शिशु को बिना डकार दिलाए लेटा दिया तो कई बार डकार के साथ दूध निकलकर शिशु की श्वास नलिका से होते हुए फेफाड़ों में प्रवेश कर जाता है और शिशु की जान को खतरा हो सकता है।
>> बच्चे के जन्म के बाद उसे मां का दूध पिलाना चाहिए। बच्चे के लिए मां का दूध जीवनदायिनी होता है और बच्चे को कई रोगों से बचाता है। बच्चे को 2-3 घंटे के अंतराल से जब भी वह रोये, स्तनपान कराना सर्वोत्तम है।
>> बच्चे को दूध पिलाने में दिक्कत है तो नर्स, चिकित्सक या गांव की बुजुर्ग महिला से सलाह लें
बच्चों का रखें ख्याल
>> ठंड से बचाने के लिए गर्म कपड़े पहनाएं।
>> सर्द मौसम में तीन से चार दिन में एक बार नहलाएं।
>> नहलाते समय मुंह, नाक में पानी ना जाए विशेष ध्यान रखें।
>> छह माह तक नवजात को सिर्फ मां का दूध पिलाएं।
>> ज्यादा गर्म पानी से ना नहलाएं।
>> नवजात के साथ ही मां भी रखे अपने स्वास्थ्य का ध्यान।
>> सर्दी, जुकाम होने पर चिकित्सक को दिखाएं।