पैदल मार्गों पर आवाजाही प्रतिबंधित, कैसे आएं-जाएं लोग
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आपदा प्रभावित क्षेत्रों में संचालित हेलीकॉप्टर सेवा के लिए दोनों तरफ का किराया लेने के विरोध में व्यास घाटी के लोगों और विभिन्न संगठनों ने शनिवार को तहसील मुख्यालय में जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि व्यास घाटी के पैदल मार्गों पर प्रशासन ने स्वयं आवाजाही प्रतिबंधित कर रखी है। ऐसे में वे कैसे आएं-जाएं। ऊपर से हेलीकॉप्टर का दोतरफा किराया लिया जा रहा है। व्यास घाटी के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि दो दिन में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे भारत-चीन सीमा पर स्थित अपने गांवों को छोेड़ देंगे। उन्होंने बाजार बंद और चक्का जाम की चेतावनी भी दी है।
लोगों ने एसडीएम आरके पांडे के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर धारचूला आने का किराया माफ करने की मांग भी की है। मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर लखनपुर से नजंग तक मोटर मार्ग निर्माण का कार्य विगत 15 वर्षों से चल रहा है। सीमा सड़क संगठन लखनपुर से आगे मात्र पांच किमी सड़क ही बना पाया है। दो जुलाई 2018 को भूस्खलन से लखनपुर से नजंग तक पैदल मार्ग पूरी तरह से तबाह हो गया है।
खतरे को देखते हुए प्रशासन ने गर्बाधार से आगे आवाजाही प्रतिबंधित कर दी है। गांवों को जाने के लिए कोई भी पैदल मार्ग नहीं बचा हैं। सरकार ने लोगों के लिए हेली सेवा शुरू तो की, लेकिन अब लोगों से दोनों तरफ का किराया लिया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि दारमा व्यास घाटियों में लोगोें के पास पर्याप्त खद्यान्न तक नहीं है। व्यास घाटी के लोग तो चीन से लाए जा रहे रिफाइंड, तेल चावल आदि से गुजारा कर रहे हैं। लोगों ने कहा कि यदि दो दिन में उचित पहल नहीं हुई तो वे भारत चीन सीमा पर स्थित अपने गांवों को छोड़ देंगे।
प्रदर्शनकारियों में रं कल्याण संस्था के अध्यक्ष कृष्णा गर्ब्याल, संरक्षक अशोक नबियाल, भाजपा नेता महेंद्र बुदियाल, धन सिंह धामी, रूकुम बिष्ट, देवकृष्ण फकलियाल, कांग्रेस नेता राजेश कुटियाल, प्रेमा कुटियाल लक्ष्मी रायपा आदि शामिल थे।