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छह दिन बाद मिले आपदा में बिछड़े धापा गांव के मां-बेटे
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मुनस्यारी अस्पताल में भर्ती धापा गांव का तन्मय अपनी मां गीता देवी के साथ।
- फोटो : PITHORAGARH
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। मलबे में बहने से घायल मां और बेटे जब छह दिन बाद एक दूसरे से मिले तो भावनाओं का ज्वार दोनों की आंखों से अश्रुधारा के रूप में बह निकला। 18 जुलाई की रात आई आपदा में मलबे में दोनों ही मां-बेटे बह गए थे। मौत के मुंह से छूटकर आए अपने जिगर के टुकड़े को मां ने काफी देर तक सीने से लगाए रखा। दोनों के खुशी के आंसू देखकर अस्पताल कर्मियों की आंखें भी नम हो गई।
18 जुलाई की रात को बारिश ने धापा गांव में तबाही मचाई थी। मकान को खतरे में देखकर घर में सोई गीता देवी भी जान बचाने के लिए अपने पांच साल के बेटे तन्मय का हाथ पकड़कर घर से सुरक्षित स्थान की ओर भागी लेकिन मलबे की चपेट में आकर मासूम तन्मय मलबे के साथ बह गया। गीता देवी गांव वालों के साथ रात भर अपने जिगर के टुकड़े को खोजती रही, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चल सका था। सुबह पांच बजे तन्मय मलबे में घायलावस्था में मिला था।
ग्रामीणों ने उसे सीएचसी मुनस्यारी में भर्ती कराया था। रास्ते बंद होने से गीता मुनस्यारी नहीं जा सकी थी। शुक्रवार को गांव के लोग गीता देवी को मुनस्यारी अस्पताल ले गए। गीता ने जैसे ही तन्मय को देखा तो उसे सीने से लिपटाकर फूट-फूटकर रो पड़ी। बाद में गीता देवी की भी डाक्टरों ने जांच की। डॉ. कैलाश फर्स्वाण ने बताया कि गीता देवी के हाथ-पैरों एवं कमर में चोट है। पैर में फ्रैक्चर की आशंका है। तन्मय के सिर, मुंह, आंख सहित शरीर के तमाम अंगों में चोटें आई हैं।
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मुझे रोटी खिलाओ, मैं मरने वाला हूं
मुनस्यारी। अमर उजाला से बातचीत में मासूम तन्मय की मां गीता देवी ने बताया कि कुछ दिन पहले तन्मय ने कहा था कि ‘मुझे रोटी खिलाओ मैं अगस्त में मरने वाला हूं।’ उस समय उसकी बात को नजरअंदाज कर दिया था। अब वह बात मुझे परेशान कर रही है। इतना कहते ही गीता देवी की आंख से आंसू छलक आए। तन्मय के पिता प्रयाग सिंह मल्ला जोहार में बीआरओ में मजदूरी करते हैं। वह घटना की सूचना मिलते ही मल्ला जोहार केरास्तों नदी-नालों की परवाह किए बिना 20 जुलाई की रात करीब 10 बजे धापा गांव पहुंच गए थे। उन्होंने बताया तन्मय के दिमाग पर ऐसा प्रभाव पड़ा है कि वह बार-बार कह रहा है कि पापा अब हमारा घर तो टूट गया है अब हम कहां रहेंगे। गरीब परिवार को आवास, भूमि एवं सरकारी मदद की दरकार है।
विधायक ने धापा गांव पहुंचकर सुनीं समस्या
मुनस्यारी। धारचूला के विधायक हरीश धामी ने शुक्रवार को धापा गांव पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान आपदा प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने गांव के पुनर्वास के लिए तहसील प्रशासन को प्रस्ताव तैयार करने कले निर्देश दिए। इस अवसर पर उपजिलाधिकारी भगत सिंह फोनिया, तहसीलदार अबरार अहमद, राजस्व उपनिरीक्षक राजेंद्र सामंत आदि मौजूद रहे।
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18 जुलाई की रात को बारिश ने धापा गांव में तबाही मचाई थी। मकान को खतरे में देखकर घर में सोई गीता देवी भी जान बचाने के लिए अपने पांच साल के बेटे तन्मय का हाथ पकड़कर घर से सुरक्षित स्थान की ओर भागी लेकिन मलबे की चपेट में आकर मासूम तन्मय मलबे के साथ बह गया। गीता देवी गांव वालों के साथ रात भर अपने जिगर के टुकड़े को खोजती रही, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चल सका था। सुबह पांच बजे तन्मय मलबे में घायलावस्था में मिला था।
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ग्रामीणों ने उसे सीएचसी मुनस्यारी में भर्ती कराया था। रास्ते बंद होने से गीता मुनस्यारी नहीं जा सकी थी। शुक्रवार को गांव के लोग गीता देवी को मुनस्यारी अस्पताल ले गए। गीता ने जैसे ही तन्मय को देखा तो उसे सीने से लिपटाकर फूट-फूटकर रो पड़ी। बाद में गीता देवी की भी डाक्टरों ने जांच की। डॉ. कैलाश फर्स्वाण ने बताया कि गीता देवी के हाथ-पैरों एवं कमर में चोट है। पैर में फ्रैक्चर की आशंका है। तन्मय के सिर, मुंह, आंख सहित शरीर के तमाम अंगों में चोटें आई हैं।
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मुझे रोटी खिलाओ, मैं मरने वाला हूं
मुनस्यारी। अमर उजाला से बातचीत में मासूम तन्मय की मां गीता देवी ने बताया कि कुछ दिन पहले तन्मय ने कहा था कि ‘मुझे रोटी खिलाओ मैं अगस्त में मरने वाला हूं।’ उस समय उसकी बात को नजरअंदाज कर दिया था। अब वह बात मुझे परेशान कर रही है। इतना कहते ही गीता देवी की आंख से आंसू छलक आए। तन्मय के पिता प्रयाग सिंह मल्ला जोहार में बीआरओ में मजदूरी करते हैं। वह घटना की सूचना मिलते ही मल्ला जोहार केरास्तों नदी-नालों की परवाह किए बिना 20 जुलाई की रात करीब 10 बजे धापा गांव पहुंच गए थे। उन्होंने बताया तन्मय के दिमाग पर ऐसा प्रभाव पड़ा है कि वह बार-बार कह रहा है कि पापा अब हमारा घर तो टूट गया है अब हम कहां रहेंगे। गरीब परिवार को आवास, भूमि एवं सरकारी मदद की दरकार है।
विधायक ने धापा गांव पहुंचकर सुनीं समस्या
मुनस्यारी। धारचूला के विधायक हरीश धामी ने शुक्रवार को धापा गांव पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान आपदा प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने गांव के पुनर्वास के लिए तहसील प्रशासन को प्रस्ताव तैयार करने कले निर्देश दिए। इस अवसर पर उपजिलाधिकारी भगत सिंह फोनिया, तहसीलदार अबरार अहमद, राजस्व उपनिरीक्षक राजेंद्र सामंत आदि मौजूद रहे।