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जिला अस्पताल में एक माह में ईएनटी के 1800 से अधिक मरीज
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ॉ. कविता लोहनी, ईएनटी, विशेषज्ञ।
- फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। जिला अस्पताल में पिछले एक माह में ईएनटी विशेषज्ञ के पास 1800 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचे हैं। मौसम परिवर्तन के कारण कान, नाक, गले (ईएनटी) के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस पर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।
जिला अस्पताल के ईएनटी कक्ष में नाक-कान और गले के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले 11 फरवरी से 12 मार्च तक रोजाना ईएनटी से संबंधित बीमारियों के उपचार के लिए 60 से अधिक मरीज पहुंचे। इसमें ज्यादातर मरीज एलर्जिक राइनाइटिस, लगातार छींक आना, खांसी, गले की खुजली, कान में खुजली, नाक के बहने आदि बीमारियों के थे। ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. कविता लोहनी ने बताया कि इस मौसम में पौलन ग्रेंस होते हैं। आसपास बहुत धूल होती है। इससे कुछ लोगों को एलर्जी होती है। कुछ के कान में खुजली होने लगती है तो मरीज ईयर बड या माचिस की तिल्ली का इस्तेमाल करते हैं। कुछ मरीज कान में तेल डालते हैं। इसकी वजह से उन्हें ओटाइटिस एक्स्टर्ना रोग हो सकता है। सफाई के दौरान कुछ लोग कान की झिल्ली को नुकसान पहुंचा देते हैं। इससे क्रॉनिक ओटाटिस मीडिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
बच्चों में हो सकतीं हैं बीमारियां
पिथौरागढ़। बदलते मौसम में तेज धूप के चलते बच्चे ठंडा पानी, आइसक्रीम खाना शुरू कर देते हैं। ऐसे में उन्हें क्रोनिक टोन्सिलाइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में जितना हो सके हल्का गर्म पानी ही बच्चों को पिलाना चाहिए।
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क्या करें
- गुनगुना पानी रोज पीएं।
- रोज कसरत करें और हल्दी वाला दूध लें।
- नाक, कान, गले की कोई भी समस्या होने पर चिकित्सक का परामर्श लें।
- खान-पान में इम्यून सिस्टम बढ़ाने वाले पदार्थ फल, गाजर, मूली, टमाटर आदि सब्जियां लें।
ईएनटी से संबंधित किसी भी प्रकार की बीमारी होने पर चिकित्सक को जरूर दिखाएं। समय पर सहीं सलाह उपचार में मददगार साबित होती है।
- डॉ. कविता लोहनी, ईएनटी, विशेषज्ञ।
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जिला अस्पताल के ईएनटी कक्ष में नाक-कान और गले के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले 11 फरवरी से 12 मार्च तक रोजाना ईएनटी से संबंधित बीमारियों के उपचार के लिए 60 से अधिक मरीज पहुंचे। इसमें ज्यादातर मरीज एलर्जिक राइनाइटिस, लगातार छींक आना, खांसी, गले की खुजली, कान में खुजली, नाक के बहने आदि बीमारियों के थे। ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. कविता लोहनी ने बताया कि इस मौसम में पौलन ग्रेंस होते हैं। आसपास बहुत धूल होती है। इससे कुछ लोगों को एलर्जी होती है। कुछ के कान में खुजली होने लगती है तो मरीज ईयर बड या माचिस की तिल्ली का इस्तेमाल करते हैं। कुछ मरीज कान में तेल डालते हैं। इसकी वजह से उन्हें ओटाइटिस एक्स्टर्ना रोग हो सकता है। सफाई के दौरान कुछ लोग कान की झिल्ली को नुकसान पहुंचा देते हैं। इससे क्रॉनिक ओटाटिस मीडिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
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बच्चों में हो सकतीं हैं बीमारियां
पिथौरागढ़। बदलते मौसम में तेज धूप के चलते बच्चे ठंडा पानी, आइसक्रीम खाना शुरू कर देते हैं। ऐसे में उन्हें क्रोनिक टोन्सिलाइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में जितना हो सके हल्का गर्म पानी ही बच्चों को पिलाना चाहिए।
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क्या करें
- गुनगुना पानी रोज पीएं।
- रोज कसरत करें और हल्दी वाला दूध लें।
- नाक, कान, गले की कोई भी समस्या होने पर चिकित्सक का परामर्श लें।
- खान-पान में इम्यून सिस्टम बढ़ाने वाले पदार्थ फल, गाजर, मूली, टमाटर आदि सब्जियां लें।
ईएनटी से संबंधित किसी भी प्रकार की बीमारी होने पर चिकित्सक को जरूर दिखाएं। समय पर सहीं सलाह उपचार में मददगार साबित होती है।
- डॉ. कविता लोहनी, ईएनटी, विशेषज्ञ।