फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Milk grass considered useless has rare medicinal properties

बेकार समझी जाने वाली दूधी घास में हैं दुर्लभ औषधीय गुण,

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 17 Aug 2019 10:44 PM IST
विज्ञापन
Milk grass considered useless has rare medicinal properties
जिन पौधों को खरपतवार की श्रेणी में मानकर बेकार समझ लिया जाता है, वह भी अत्यंत दुर्लभ औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। आज एक ऐसी ही औषधीय वनस्पति दूधी जो बरसात के मौसम में हिमालय की तलहटी और मैदानी क्षेत्रों में बहुतायत में पाई जाती है, उसके औषधीय गुणों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। यह वनस्पति श्वास नलिका की सूजन को कम करने, मासिक रक्तस्राव, श्वेत प्रदर, खूनी आंव में बेहद कारगर है।
विज्ञापन

घास के रूप में नजर आने वाली दूधिया घास मिल्क एडम के नाम से भी जानी जाती है। संस्कृत में इसे दुग्धिका, नागार्जुनी के नाम से जाना जाता है। यूफोरबिया हिरता लेटिन नाम से प्रचलित यह वनस्पति अपनी रोयेंदार पत्तियों और तनों से निकलने वाले दूध (लेटेक्स) के लिए जानी जाती है। इसकी 2 प्रजातियां बड़ी दूधी और छोटी दूधी पाई जाती है। दूधी नाम के अनुरूप स्तनपान कराने वाली माताों में दुग्ध की वृद्धि करता है। चेहरों पर होनेवाले कील, मुहांसों में भी दूधी का दूध काफी लाभकारी होता है। दूधी का स्वरस कनेर के पत्तों के स्वरस के साथ मिलाकर लगाने से बालों का सफेद होना और झड़ना रुक जाता है।
विज्ञापन

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय देहरादून के डॉ. नवीन जोशी (एमडी आयुर्वेद) बताते हैं कि महिलाओं में माहवारी से संबंधित समस्या में हरी दूधी को छाया में सुखाकर कूटकर देने से मासिक स्राव नियंत्रित होता है। खूनी दस्त और आंव में भी दूधी से काफी लाभ मिलता है। महिलाओं में होने वाली लिकोरिया (श्वेतप्रदर) की समस्या में भी दूधी काफी लाभ देती है। इसकी जड़ को साफ कर 3 से 5 ग्राम की मात्रा में छानकर दिन में दो से तीन बार देने से श्वेतप्रदर की समस्या में काफी लाभ मिलता है। दूधी का प्रयोग पैर में गड़े कांटे को निकालने में भी अक्सर वैद्य करते हैं। कांटे वाले स्थान में दूधी को पीसकर लेप करने से कांटा निकल जाता है ।
विज्ञापन
विज्ञापन

सांस की तकलीफ में भी कारगर : डॉ. जोशी
पिथौरागढ़। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय देहरादून के डॉ. नवीन जोशी (एमडी आयुर्वेद) बताते हैं कि दमा में भी दूधी का प्रयोग काफी लाभकारी होता है। दूधी को तय मात्रा में शहद के साथ देने से सांस की तकलीफ में आराम होता है इन्हीं कारणों से इसे अस्थमा प्लांट के नाम से भी जाना जाता है। बताते हैं कि विभिन्न शोध में इसे श्वास नलिका की सूजन कम करने वाला एंटीबैक्टीरियल प्रभाव से युक्त पाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed