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दीदी की तरह नेशनल में गोल्ड जीतकर लाना चाहता है नन्हा निशानेबाज दिव्यांश
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राइफल के साथ नन्हा निशानेबाज दिव्यांश जोशी। अमर उजाला
- फोटो : PITHORAGARH
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जिस उम्र में बच्चे ज्यादातर समय कार्टून देखने के लिए टीवी से चिपके रहते हैं उस उम्र में पिथौरागढ़ के दिव्यांश ने इंटर स्कूल निशानेबाजी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीत लिया। महज आठ साल के नन्हे निशानेबाज दिव्यांश का निशाना अब नेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल पर है। पिता मनोज जोशी दिव्यांश को लक्ष्य भेदने में पारंगत बनाने में जुटे हैं।
पिथौरागढ़ के चंडाक निवासी नेशनल शूटर मनोज जोशी के बेटे दिव्यांश चौथी कक्षा में पढ़ता है। हाल ही में देहरादून में आयोजित निशानेबाजी प्रतियोगिता में दिव्यांश ने कमाल का निशाना साधते हुए 50 मीटर राइफल में गोल्ड मेडल जीता है। दिव्यांश की दीदी यशस्वी इंडियन शूटिंग टीम की खिलाड़ी हैं। यशस्वी ने अब तक हुई विभिन्न प्रतियोगिताओं में चार स्वर्ण सहित 16 पदक जीते हैं।
यशस्वी की तरह छोटे भाई दिव्यांश भी अच्छे निशानेबाज बनने की राह पर हैं। नन्हे शूटर ने 50 मीटर की .22 राइफल शूटिंग में गोल्ड जीतकर इसकी शुरुआत कर दी है। अब आगे दिव्यांश की तमन्ना नेशनल शूटिंग में गोल्ड लाने की है। दिव्यांश के पिता मनोज जोशी अच्छे शूटर हैं। उन्होंने घर पर ही शूटिंग रेंज बनाई हैं। इसी में उन्होंने बेटी को निशानेबाजी के गुर सिखाए। अब बेटे दिव्यांश को भी लक्ष्य भेदने का अभ्यास करा रहे हैं।
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दिव्यांश सुबह और शाम निशानेबाजी का अभ्यास करता है। मनोज ने बताया कि दिव्यांश ने अपनी बहन को देखकर निशानेबाजी शुरू की। पहली बार इंटर स्कूल प्रतियोगिता में उसने 200 में से 168 अंक प्राप्त किए। दिव्यांश प्रसिद्ध निशानेबाज जसपाल राणा को अपना आदर्श मानता है। मनोज का कहना है कि यहां पर संसाधनों का अभाव है। यदि इस तरह के खेलों में सरकार से सहायता मिले तो देश को अच्छे निशानेबाज दिए जा सकते हैं।
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पिथौरागढ़ के चंडाक निवासी नेशनल शूटर मनोज जोशी के बेटे दिव्यांश चौथी कक्षा में पढ़ता है। हाल ही में देहरादून में आयोजित निशानेबाजी प्रतियोगिता में दिव्यांश ने कमाल का निशाना साधते हुए 50 मीटर राइफल में गोल्ड मेडल जीता है। दिव्यांश की दीदी यशस्वी इंडियन शूटिंग टीम की खिलाड़ी हैं। यशस्वी ने अब तक हुई विभिन्न प्रतियोगिताओं में चार स्वर्ण सहित 16 पदक जीते हैं।
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यशस्वी की तरह छोटे भाई दिव्यांश भी अच्छे निशानेबाज बनने की राह पर हैं। नन्हे शूटर ने 50 मीटर की .22 राइफल शूटिंग में गोल्ड जीतकर इसकी शुरुआत कर दी है। अब आगे दिव्यांश की तमन्ना नेशनल शूटिंग में गोल्ड लाने की है। दिव्यांश के पिता मनोज जोशी अच्छे शूटर हैं। उन्होंने घर पर ही शूटिंग रेंज बनाई हैं। इसी में उन्होंने बेटी को निशानेबाजी के गुर सिखाए। अब बेटे दिव्यांश को भी लक्ष्य भेदने का अभ्यास करा रहे हैं।
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दिव्यांश सुबह और शाम निशानेबाजी का अभ्यास करता है। मनोज ने बताया कि दिव्यांश ने अपनी बहन को देखकर निशानेबाजी शुरू की। पहली बार इंटर स्कूल प्रतियोगिता में उसने 200 में से 168 अंक प्राप्त किए। दिव्यांश प्रसिद्ध निशानेबाज जसपाल राणा को अपना आदर्श मानता है। मनोज का कहना है कि यहां पर संसाधनों का अभाव है। यदि इस तरह के खेलों में सरकार से सहायता मिले तो देश को अच्छे निशानेबाज दिए जा सकते हैं।