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तेंदुआ फरमा रहा आराम, तब जाकर हो पा रहे काम
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पिथौरागढ़ पपदेव गांव क्षेत्र में घास काटती महिलाएं। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। रविवार को तेंदुए की दहशत से नाइट कर्फ्यू वाले पौंण, पपदेव, बजेटी, चंडाक रोड और रई क्षेत्र में जनजीवन कितना प्रभावित हुआ यह जानने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पपदेव गांव पहुंची। क्षेत्र के भ्रमण और लोगों से हुई बातचीत से सामने आया कि दिन में लोगों को तेंदुए का उतना भय नहीं सता रहा है।
हालांकि लोग सचेत हैं। चाहे वह घास काटने वालीं महिलाएं हों या फिर बकरी चरा रहे ग्वाले, सभी पूरी सतर्कता बरते हुए काम करते दिखाई दिए। कुछ लोग लापरवाही दिखाते हुए जंगल की ओर पार्टी करने के लिए जरूर दिखाई दिए।
सुबह 11:55 बजे
पपदेव निवासी राजू ने बताया दिन में तो नहीं मगर छह बजते ही उनकी दुकान के पास वाले खेतों में तेंदुआ अक्सर दिखाई देता है। इस स्थान पर पौंण गांव की महिलाएं खेतों में काम करती नजर आई। इसके बाद टीम ने ग्रामीण राजेश कुमार के साथ क्षेत्र का जायजा लिया।
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दोपहर 12:00 बजे
पपदेव मंदिर क्षेत्र के पास महिलाएं दो से चार या पांच समूह में घास काटती नजर आई। यहां कलकल नदी का शोर और चिड़ियों की चहचहाहट के अलावा कुछ नहीं था। बकरी चरा रहे महेश और प्रकाश वर्मा ने बताया तेंदुए के डर से ऊपर की तरफ बकरी चराने नहीं जा रहे हैं। घास काट रही महिलाओं पर परिवार के सदस्य भी नजर बनाए थे। महिलाओं का कहना है कि दिन में शायद तेंदुआ आराम करता है जिससे उनका काम करना आसान हो जाता है।
दोपहर 12:30 बजे
टीम आगे बढ़ी तो कुछ बिहार के तीन लोग घास काटते नजर आए। उन्होंने बताया वे पिछले 14 दिन से क्षेत्र में घास काट रहे हैं। उन्हें कोई तेंदुआ नहीं दिखाई दिया। इसके आगे बजेटी क्षेत्र तक सड़क पर पूरी तरह सुनसानी छाई रही।
दोपहर 12:45 बजे
चंडाक रोड पर वाहनों की आवाजाही से चहल पहल दिखाई दी। कुछ लोग तेंदुए की दहशत के बीच वरदानी मंदिर क्षेत्र में बैठे रविवार की छुट्टी का आनंद लेते नजर आए।
दोपहर 12:50 बजे
टीम पपदेव के धूरा पहुंची, यहां तेंदुए ने पिछले साल एक महिला को मार डाला था। यहां पर कुछ दोपहिया सवार लोग खाने के सामान लिए जंगलों में पार्टी के लिए आते दिखाई दिए। उनमें तेंदुए की दहशत नहीं दिख रही थी।
दोपहर 1:15 बजे
सवा एक बजे टीम जेल के पास पहुंचीं, यहां अक्सर तेंदुआ दिखाई देता है। घनी झाड़ियों के बीच तेंदुए को 20मिनट तक देखने का प्रयास किया गया। मगर वह नहीं दिखाई दिया। इसके बाद टीम ने बजेटी के पाटा क्षेत्र का जायजा लिया गया।
दोपहर 1:30 बजे
टीम को पपदेव मंदिर के पास सियारों का जोड़ा घनी घास के बीच दौड़ लगाता नजर आया। थोड़ा आगे जाकर पपदेव की महिला ने बताया कि तेंदुए की आवाजाही नहीं है इसलिए घास काट रहे हैं। 1:45 बजे टीम पौंण क्षेत्र पहुंची। पूरी सड़क पर सुनसानी छाई रही। महिलाएं खेतों में सतर्कता बरतते हुए काम करती दिखीं।
पपदेव की महिलाओं को सबसे अधिक खतरा
पिथौरागढ़। पपदेव गांव की महिलाओं को सबसे अधिक खतरा है। जिस स्थान पर महिलाएं घास काटती हैं, वहां से तेंदुआ अक्सर आवाजाही करता है। घास काटने वाला स्थान घर से दूर होने के कारण महिलाओं के लिए अकेले घास काटना खतरे से खाली नहीं है। संवाद
सितंबर 2019 में मोस्टामानू मेले से घर लौट रही बहू किरन पर तेंदुए ने देर शाम हमला कर मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद अक्तूबर 2020 में घास काट रही भाभी पर तेंदुए ने हमला कर उन्हें मार डाला था। वन विभाग अगर पहले सतर्क रहता तो उनके परिवार के लोगों की जान बच जाती। -राजेश कुमार बबलू, सामाजिक कार्यकर्ता, पपदेव
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हालांकि लोग सचेत हैं। चाहे वह घास काटने वालीं महिलाएं हों या फिर बकरी चरा रहे ग्वाले, सभी पूरी सतर्कता बरते हुए काम करते दिखाई दिए। कुछ लोग लापरवाही दिखाते हुए जंगल की ओर पार्टी करने के लिए जरूर दिखाई दिए।
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सुबह 11:55 बजे
पपदेव निवासी राजू ने बताया दिन में तो नहीं मगर छह बजते ही उनकी दुकान के पास वाले खेतों में तेंदुआ अक्सर दिखाई देता है। इस स्थान पर पौंण गांव की महिलाएं खेतों में काम करती नजर आई। इसके बाद टीम ने ग्रामीण राजेश कुमार के साथ क्षेत्र का जायजा लिया।
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दोपहर 12:00 बजे
पपदेव मंदिर क्षेत्र के पास महिलाएं दो से चार या पांच समूह में घास काटती नजर आई। यहां कलकल नदी का शोर और चिड़ियों की चहचहाहट के अलावा कुछ नहीं था। बकरी चरा रहे महेश और प्रकाश वर्मा ने बताया तेंदुए के डर से ऊपर की तरफ बकरी चराने नहीं जा रहे हैं। घास काट रही महिलाओं पर परिवार के सदस्य भी नजर बनाए थे। महिलाओं का कहना है कि दिन में शायद तेंदुआ आराम करता है जिससे उनका काम करना आसान हो जाता है।
दोपहर 12:30 बजे
टीम आगे बढ़ी तो कुछ बिहार के तीन लोग घास काटते नजर आए। उन्होंने बताया वे पिछले 14 दिन से क्षेत्र में घास काट रहे हैं। उन्हें कोई तेंदुआ नहीं दिखाई दिया। इसके आगे बजेटी क्षेत्र तक सड़क पर पूरी तरह सुनसानी छाई रही।
दोपहर 12:45 बजे
चंडाक रोड पर वाहनों की आवाजाही से चहल पहल दिखाई दी। कुछ लोग तेंदुए की दहशत के बीच वरदानी मंदिर क्षेत्र में बैठे रविवार की छुट्टी का आनंद लेते नजर आए।
दोपहर 12:50 बजे
टीम पपदेव के धूरा पहुंची, यहां तेंदुए ने पिछले साल एक महिला को मार डाला था। यहां पर कुछ दोपहिया सवार लोग खाने के सामान लिए जंगलों में पार्टी के लिए आते दिखाई दिए। उनमें तेंदुए की दहशत नहीं दिख रही थी।
दोपहर 1:15 बजे
सवा एक बजे टीम जेल के पास पहुंचीं, यहां अक्सर तेंदुआ दिखाई देता है। घनी झाड़ियों के बीच तेंदुए को 20मिनट तक देखने का प्रयास किया गया। मगर वह नहीं दिखाई दिया। इसके बाद टीम ने बजेटी के पाटा क्षेत्र का जायजा लिया गया।
दोपहर 1:30 बजे
टीम को पपदेव मंदिर के पास सियारों का जोड़ा घनी घास के बीच दौड़ लगाता नजर आया। थोड़ा आगे जाकर पपदेव की महिला ने बताया कि तेंदुए की आवाजाही नहीं है इसलिए घास काट रहे हैं। 1:45 बजे टीम पौंण क्षेत्र पहुंची। पूरी सड़क पर सुनसानी छाई रही। महिलाएं खेतों में सतर्कता बरतते हुए काम करती दिखीं।
पपदेव की महिलाओं को सबसे अधिक खतरा
पिथौरागढ़। पपदेव गांव की महिलाओं को सबसे अधिक खतरा है। जिस स्थान पर महिलाएं घास काटती हैं, वहां से तेंदुआ अक्सर आवाजाही करता है। घास काटने वाला स्थान घर से दूर होने के कारण महिलाओं के लिए अकेले घास काटना खतरे से खाली नहीं है। संवाद
सितंबर 2019 में मोस्टामानू मेले से घर लौट रही बहू किरन पर तेंदुए ने देर शाम हमला कर मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद अक्तूबर 2020 में घास काट रही भाभी पर तेंदुए ने हमला कर उन्हें मार डाला था। वन विभाग अगर पहले सतर्क रहता तो उनके परिवार के लोगों की जान बच जाती। -राजेश कुमार बबलू, सामाजिक कार्यकर्ता, पपदेव