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जौलजीबी मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sun, 15 Nov 2015 10:12 PM IST
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जौलजीबी मेले में शनिवार की रात सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। देर रात तक लोगों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद उठाया। पिथौरागढ़ की दर्पण कला मंच के कलाकारों ने जब ‘बेड़ू पाको बारमासा, नरैण काफल पाको चैत मेरी छैला’ गीत प्रस्तुत किया तो दर्शक अपनी जगह पर ही झूमने को मजबूर हो गए। कलाकारों ने कुमाऊंनी संस्कृति पर आधारित कई गीत पेश किए।
रविवार दोपहर बाद छात्र-छात्राओं ने प्रस्तुति दी। बच्चों ने देशप्रेम, पर्यावरण संरक्षण पर आधारित कार्यक्रम पेश किए। मंच का संचालन लक्ष्मण सिंह बिष्ट ने किया। कार्यक्रम में समाजसेवी दौलत पात, शकुंतला दताल, लीला बनग्याल समेत अन्य लोग उपस्थित थे। मेलाधिकारी पारितोष वर्मा ने बताया कि अब 22 नवंबर तक रोज रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे और दिन के समय विभिन्न प्रतियोगिताएं होगी। उन्होंने कहा कि शांति व्यवस्था के लिए मेला स्थल में पुलिस बल तैनात रहेगा। मेले में लोगों की आवाजाही जारी है। सरकारी विभागों के स्टालों से लोग तमाम जानकारियां हासिल कर रहे हैं।
चायनीज कालीन ग्यरम की मांग बढ़ी
तिब्बत की मंडी से लाया गया सामान जौलजीबी मेले में पहुंच गया है। चायनीज कालीन जिसे ग्यरम कहा जाता है। इसकी काफी मांग रहती है। इस कालीन की खासियत है कि यह जितना पुराना होगा, इसकी चमक उतनी ही ज्यादा होती जाती है। यदि 20 साल पुराना कालीन होगा तो उसकी कीमत भी ज्यादा हो जाती है। कालीन की एक विशेषता यह भी है कि इसे जिस ओर से भी देखो अलग अलग रंग दिखाई देते हैं। शुद्ध तिब्बती ऊन से तैयार होने वाले इस कालीन की कीमत 15 हजार रुपये से शुरू होती है। तिब्बत की मंडी तकलाकोट से गुंजी की प्रधान अर्चना देवी इन कालीनों को लेकर मेले में पहुंची हैं। अर्चना ने बताया कि लोग जिज्ञासावश भी कालीन को देखने आ रहे हैं। बिक्री भी ठीक हो रही है। उन्होंने कहा कि उनके पास काफी संख्या में कालीन उपलब्ध हैं। वह मेला चलने तक इसी स्टाल में रहेंगी।
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रविवार दोपहर बाद छात्र-छात्राओं ने प्रस्तुति दी। बच्चों ने देशप्रेम, पर्यावरण संरक्षण पर आधारित कार्यक्रम पेश किए। मंच का संचालन लक्ष्मण सिंह बिष्ट ने किया। कार्यक्रम में समाजसेवी दौलत पात, शकुंतला दताल, लीला बनग्याल समेत अन्य लोग उपस्थित थे। मेलाधिकारी पारितोष वर्मा ने बताया कि अब 22 नवंबर तक रोज रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे और दिन के समय विभिन्न प्रतियोगिताएं होगी। उन्होंने कहा कि शांति व्यवस्था के लिए मेला स्थल में पुलिस बल तैनात रहेगा। मेले में लोगों की आवाजाही जारी है। सरकारी विभागों के स्टालों से लोग तमाम जानकारियां हासिल कर रहे हैं।
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चायनीज कालीन ग्यरम की मांग बढ़ी
तिब्बत की मंडी से लाया गया सामान जौलजीबी मेले में पहुंच गया है। चायनीज कालीन जिसे ग्यरम कहा जाता है। इसकी काफी मांग रहती है। इस कालीन की खासियत है कि यह जितना पुराना होगा, इसकी चमक उतनी ही ज्यादा होती जाती है। यदि 20 साल पुराना कालीन होगा तो उसकी कीमत भी ज्यादा हो जाती है। कालीन की एक विशेषता यह भी है कि इसे जिस ओर से भी देखो अलग अलग रंग दिखाई देते हैं। शुद्ध तिब्बती ऊन से तैयार होने वाले इस कालीन की कीमत 15 हजार रुपये से शुरू होती है। तिब्बत की मंडी तकलाकोट से गुंजी की प्रधान अर्चना देवी इन कालीनों को लेकर मेले में पहुंची हैं। अर्चना ने बताया कि लोग जिज्ञासावश भी कालीन को देखने आ रहे हैं। बिक्री भी ठीक हो रही है। उन्होंने कहा कि उनके पास काफी संख्या में कालीन उपलब्ध हैं। वह मेला चलने तक इसी स्टाल में रहेंगी।
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