फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   God trusts the lives of pregnant women of the border

Pithoragarh News: सीमांत की गर्भवती महिलाओं की जान भगवान भरोसे

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 21 Dec 2022 11:03 PM IST
विज्ञापन
God trusts the lives of pregnant women of the border
पिथौरागढ़ महिला अस्पताल। संवाद - फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। सीमांत जिले के तीन सीएचसी, चार पीएचसी सेंटर और धारचूला उप जिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं होने से महिलाओं, खासकर गर्भवती महिलाओं की जान भगवान भरोसे है। जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए उन्हें एंबुलेंस का सहारा है। यहां पहुंचने के लिए तीन से चार घंटे उन्हें एंबुलेंस में गुजारने पड़ रहे हैं। हाल यह हैं कि पिछले दो माह में 108 एंबुलेंस से 410 महिलाओं को प्रसव के लिए पिथौरागढ़ जिला अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें 10 महिलाओं के प्रसव एंबुलेंस में हुए हैं।
विज्ञापन

पिथौरागढ़ जिले में मुनस्यारी, डीडीहाट, गंगोलीहाट में तीन सीएचसी सेंटर और इग्यारदेवी, मूनाकोट, कनालीछीना और बेड़ीनाग में चार पीएचसी सेंटर हैं। इनमें एक भी स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। उप जिला अस्पताल धारचूला में भी स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। जिस कारण महिलाओं को उपचार के लिए पिथौरागढ़ जिला अस्पताल या महिला अस्पताल आना पड़ता है। सर्वाधिक दिक्कतें गर्भवती महिलाओं को झेलनी पड़ रही हैं। प्रसव के लिए एकमात्र महिला जिला अस्पताल को ही साधन संपन्न माना जाता है।
विज्ञापन

जिले भर से गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए इसी अस्पताल में लाया जाता है। पिछले दो माह में 108 एंबुलेंस से 410 गर्भवती महिलाओं को पिथौरागढ़ महिला अस्पताल पहुंचाया गया है। इसमें से 10 महिलाओं के प्रसव एंबुलेंस में हुए हैं। अक्तूबर माह में 208 महिलाओं को पिथौरागढ़ महिला अस्पताल लाया गया। जिसमें सात महिलाओं के एंबुलेंस में प्रसव हुए। प्रसव के बाद इन महिलाओं को महिला अस्पताल में ही भर्ती कर दिया गया। इसके अलावा नवंबर माह में 202 महिलाओं को एंबुलेंस से पिथौरागढ़ लाया गया जिसमें तीन महिलाओं के प्रसव एंबुलेंस में हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिले के सीएचसी या पीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टर और संसाधन नहीं होने से जटिल मामला बताकर प्रसव पीड़िताओं को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। धारचूला, मुनस्यारी, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट से जिला अस्पताल पहुंचने के लिए 90 से 120 किलोमीटर तक की दूरी तीन से चार घंटे में तय करनी पड़ती है। ऐसे में एंबुलेंस में ही बच्चों का जन्म हो जाता है।
स्त्री रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति के लिए उच्चाधिकारियों को लगातार पत्राचार किया जा रहा है। जल्द की एक स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती होनी है। जटिल मामलों में सीएचसी या पीएचसी से महिलाओं को प्रसव के लिए रेफर किया जा रहा है।
-डॉ. एचएस ह्यांकी, सीएमओ पिथौरागढ़।
अक्तूबर और नवंबर में 410 महिलाओं को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया है जिसमें से 10 महिलाओं के प्रसव एंबुलेंस में हुए हैं। -भाष्कर शर्मा, जिला प्रभारी 108 आपातकालीन सेवा।
न जांच की सुविधा न विशेषज्ञ डॉक्टर
देवलथल (पिथौरागढ़)। बाराबीसी क्षेत्र की 15 हजार की आबादी के लिए बनाए गए राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय में जांच की कोई सुविधा नहीं है। अस्पताल में कोई विशेषज्ञ डॉक्टर भी नहीं है। किसी के गंभीर बीमार या घायल होने पर अस्पताल में प्राथमिक उपचार की भी सुविधा नहीं है। ऐसे में लोग बीमार या घायल को जिला अस्पताल ले जाने के लिए मजबूर हैं।
क्षेत्र के अधिकतर लोग बीमार होने पर सीधे जिला अस्पताल आते हैं। दशकों पहले स्थापित अस्पताल का उच्चीकरण नहीं होने से लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्रवासियों ने अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती करने की मांग की है। एसीएमओ डॉ. हेमंत मर्तोलिया ने कहा कि चिकित्सालय में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के प्रयास किए जाएंगे।
राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय की स्थापना लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए की गई थी लेकिन अस्पताल में कोई विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है जबकि पहले एलोपैथिक के साथ ही आयुर्वेदिक डॉक्टर था। -जगदीश कुमार, जिला संयोजक, एससी विभाग, कांग्रेस।
क्षेत्र की 15 हजार से अधिक की आबादी है लेकिन चिकित्सालय में जांच के नाम पर कुछ नहीं है। डॉक्टर बस दवा लिख देते हैं। लोग हल्का बुखार, सिरदर्द आदि में ही अस्पताल जाते हैं जबकि अधिकतर आबादी को जिला अस्पताल जाना पड़ता है। -शंकर सिंह सामंत, पूर्व प्रधान लोहाकोट।

क्षेत्र में 108 एंबुलेंस तक नहीं
देवलथल (पिथौरागढ़)। क्षेत्र के लोगों के लिए 108 एंबुलेंस तक की व्यवस्था नहीं है। कांग्रेस एससी विभाग के जिला संयोजक जगदीश कुमार ने कहा कि विभाग से क्षेत्र में 108 उपलब्ध कराने की मांग की गई है। रसैपाटा, अलगड़ा, सुवालेख, बिसुनाखान आदि क्षेत्र की आबादी को निजी या टैक्सी वाहनों के सहारे ही बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। उन्होंने विभाग से एक एंबुलेंस देवलथल तहसील मुख्यालय में तैनात करने की मांग की है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed