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तेंदुओं की चार खालों समेत एक गिरफ्तार, एक फरार

Sat, 07 Jan 2017 10:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sat, 07 Jan 2017 10:20 PM IST
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Four skins of leopards, including one arrested, one at large
पिथौरागढ़ में तेंदुए की खालों के साथ पकड़ा गया आरोपी - फोटो : अमर उजाला

पंतनगर से आई स्पेशल टास्क फोर्स (कुमाऊं) की टीम ने तेंदुए की 4 खालों समेत एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी मौके से फरार हो गया। हाल के दिनों में वन्य जीव तस्करी का यह सबसे बड़ा मामला है। पकड़े गए व्यक्ति ने एसटीएफ की टीम को बताया कि वह जंगल में तेंदुओं को पहले जहर देकर मारते थे। फिर खालों, हड्डी का व्यापार करते थे। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि वन्य जीव तस्करी के इतने बड़े मामले की भनक तक जिला पुलिस को नहीं थी। पुलिस महानिदेशक एमए गणपति ने एसटीएफ की टीम को 20 हजार रुपए नकद इनाम की घोषणा की है।

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बताया गया कि मुखबिर ने एसटीएफ की एसएसपी रेणुका देवी को फोन पर सूचना दी थी कि डीडीहाट के 2 लोग लंबे समय से तेंदुओं को मारकर उनके अंगों की तस्करी करते हैं। इसी के आधार पर शुक्रवार रात एसआई एनके पांडे के नेतृत्व यहां पहुंची स्पेशल टास्क फोर्स की टीम ने नैनीपातल तिराहे के पास जगदीश सिंह गैड़ा (43) निवासी जाख (धौलेत) तहसील डीडीहाट और हेमंत सिंह खड़ायत (25) ग्राम आंकोट तहसील डीडीहाट की तलाशी ली। ये दोनों नैनीपातल तिराहे के पास ग्राहक का इंतजार कर रहे थे। यह ग्राहक पिथौरागढ़ नगर से जाने वाला था और बाद में खालों को किसी बड़े शहर तक पहुंचाने की योजना थी। तलाशी के दौरान एक सूटकेश और एक बैग में रखी तेंदुओं की 4 खालें बरामद हुई। सभी खालें 7 से 8 फीट की हैं। तलाशी के दौरान हेमंत खड़ायत अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया।
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गिरफ्तार जगदीश सिंह गैड़ा ने एसटीएफ को बताया कि दो खालें उसकी हैं और 2 खालें उसके फरार साथी की हैं। उसने बताया कि जंगल में जाकर मांस में जहर डाल देते थे। उसे खाकर तेंदुए की मौत हो जाती है। बाद में वह खालों और हड्डियों को बिचौलियों के माध्यम से बाजार में बेचते हैं। गिरफ्तार आरोपी और खालों को जाजरदेवल थाने के सुपुर्द कर दिया गया है और विवेचना का काम उपनिरीक्षक हेम तिवारी कर रहे हैं। टीम में एसटीएफ के कांस्टेबल किशोर कुमार, महेंद्र गिरी, सुरेंद्र कनवाल, दुर्गा सिंह पापड़ा, विरेंद्र सिंह चौहान और सलमान शामिल थे। एसटीएफ की टीम यहां से जा चुकी है। 
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वन विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
लंबे समय से हो रही खालों की तस्करी के बाद अब वन विभाग और जिला पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों का कहना है कि जिस मुखबिर ने एसटीएफ को सूचना दी थी उसने पहले कई बार वन विभाग और जिला पुलिस को भी इत्तला किया था, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तभी एसटीएफ को जानकारी दी गई। जिस इलाके से खालों की तस्करी हो रही थी, वहां पर डीडीहाट, अस्कोट, कनालीछीना, जाजरदेवल और पिथौरागढ़ थाने आते हैं। साथ ही पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप भी काम करती है, लेकिन पुलिस ने इस गंभीर मामले को अब तक दबाए रखा।

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