पिथौरागढ़/मुनस्यारी। शीतकाल में सीमांत जिले में आग की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बृहस्पतिवार को मुनस्यारी के लेंगा में जंगल जले। इससे प्राकृतिक वन संपदा को खासा नुकसान पहुंच रहा है। जंगली जानवरों के शिकार के लिए जंगलों में आग लगाने की भी आशंका है। इसके बाद भी आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
सीमांत विकासखंड मुनस्यारी के खलिया बुग्याल, तोमिक की पहाड़ी, पंचाचुली की तलहटी, साईपोलू की पहाड़ी, हंसलिंग की तलहटी पर आग लग चुकी है जबकि आजकल उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी एवं भीषण ठंड के चलते जंगली जानवर तलहटी की ओर आते हैं, ऐसे में शिकारी भी इन क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ा देते हैं। वह जंगल में आग लगाकर जानवरों को घेरने का प्रयास करते हैं, ताकि शिकार आसानी से किया जा सके। इसके बावजूद वन विभाग हर बार की तरह टीम भेजकर केवल खानापूरी कर रहा है। रेंजर लवराज सिंह ने कहा कि इन क्षेत्रों से लगे वन पंचायत सरपंचों को अलर्ट करने के साथ ही वन विभाग की टीम गश्त कर घटना के कारणों का पता लगा रही है। इधर जिला मुख्यालय के असुरचूला, सल्मोड़ा, नैनीसैनी के जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ी हैं। इससे प्राकृतिक वन संपदा को खासा नुकसान हो रहा है। डीडीहाट और कनालीछीना के अधिकांश जंगल फायर सीजन से पहले ही जल चुके हैं।