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Pithoragarh News: सड़क बंद होने से गांव नहीं पहुंचा सके बच्चे का शव, काली नदी किनारे दफनाया
Sat, 12 Sep 2026 10:52 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 12 Sep 2026 10:52 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। कुलागाड़ में बेली ब्रिज ध्वस्त होने से लोगों की तकलीफें बढ़ गई हैं और आवाजाही ठप होने का दर्द अलग-अलग रूप में सामने आ रहा है। पहले ही दिन एक हृदय विदारक मामला सामने आया। सड़क बंद होने से एक पिता अपने सात साल के मासूम बच्चे का शव गांव नहीं पहुंचा सका। मजबूरन बच्चे का शव कुलागाड़ में काली नदी किनारे दफनाना पड़ा।
ग्राम जुम्मा के तोक रुदिला निवासी महेंद्र धामी ने बताया कि दो दिन पूर्व उनका सात साल का इकलौता बेटा काव्यांश अपनी मां पार्वती देवी के साथ गांव से करीब 500 मीटर दूर पानी भरने स्रोत पर गया था। इसी दौरान पैर फिसलने से वह खाई में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन बच्चे को उप जिला चिकित्सालय धारचूला लाए। प्राथमिक इलाज के बाद उसे रेफर किया गया। पिता उसे इलाज के लिए हल्द्वानी ले गए लेकिन वहां उसकी मौत हो गई। पिता और अन्य परिजन मासूम के शव को लेकर गांव आ रहे थे। शनिवार सुबह सात बजे वे कुलागाड़ पहुंचे तो वहां बेली ब्रिज आपदा की भेंट चढ़ने से सड़क बंद मिली। ऐसे में वे अपने गांव नहीं निकल सके। आखिरकार विवश होकर पिता और अन्य परिजनों ने मासूम के शव को काली नदी किनारे दफनाना पड़ा। जानकारी के मुताबिक, काव्यांश अपनी नाबालिग बहनों में सबसे छोटा था। उसके माता-पिता किसान हैं। उसकी मौत से परिजनों में कोहराम है।
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ग्राम जुम्मा के तोक रुदिला निवासी महेंद्र धामी ने बताया कि दो दिन पूर्व उनका सात साल का इकलौता बेटा काव्यांश अपनी मां पार्वती देवी के साथ गांव से करीब 500 मीटर दूर पानी भरने स्रोत पर गया था। इसी दौरान पैर फिसलने से वह खाई में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन बच्चे को उप जिला चिकित्सालय धारचूला लाए। प्राथमिक इलाज के बाद उसे रेफर किया गया। पिता उसे इलाज के लिए हल्द्वानी ले गए लेकिन वहां उसकी मौत हो गई। पिता और अन्य परिजन मासूम के शव को लेकर गांव आ रहे थे। शनिवार सुबह सात बजे वे कुलागाड़ पहुंचे तो वहां बेली ब्रिज आपदा की भेंट चढ़ने से सड़क बंद मिली। ऐसे में वे अपने गांव नहीं निकल सके। आखिरकार विवश होकर पिता और अन्य परिजनों ने मासूम के शव को काली नदी किनारे दफनाना पड़ा। जानकारी के मुताबिक, काव्यांश अपनी नाबालिग बहनों में सबसे छोटा था। उसके माता-पिता किसान हैं। उसकी मौत से परिजनों में कोहराम है।
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