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धारचूला में महाकाली से हो रहा धड़ल्ले से खनन
ब्यूरो/अमर उजाला,धारचूला /पिथौरागढ़
Updated Tue, 29 Dec 2015 06:38 PM IST
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प्रशासन और पुलिस की नाक के नीचे इन दिनों महाकाली से धड़ल्ले से खनन हो रहा है। मशीनों के जरिए नदी से रेत और रोड़ी निकाली जा रही है। इसे स्थानीय बाजार के अलावा आसपास के इलाकों में बेचा जा रहा है। लंबे समय से चल रहे इस धंधे पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया है। स्थानीय लोग नदी से हो रहे खनन से खासे चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि इसी तरह खनन होता रहा तो धारचूला नगर के लिए खतरा बढ़ सकता है।
पालिका सभासद नृप सिंह गर्ब्याल ने कहा कि यदि खनन का काम बंद नहीं किया गया तो तहसील कार्यालय के सामने धरना दिया जाएगा। स्थानीय लोगों ने पिछले दिनों क्षेत्र के दौरे पर आए डीआईसी पीएस सेलाल और एसपी रोशन लाल शर्मा के सामने भी मुद्दा रखा था। दोनों अधिकारियों ने खनन पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की बात कही लेकिन अब तक कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। सभासद ने कहा है कि अब इस मामले में आंदोलन खड़ा किया जाएगा। इधर, थाना प्रभारी बलवंत कांबोज का कहना है कि खनन का काम वन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है। पुलिस सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
इसलिए बढ़ रहे खननकर्ताओं के हौसले
सीमांत तहसील में एक माह से एसडीएम का पद रिक्त है। तहसीलदार के पास बंगापानी तहसील का भी कार्यभार है। वह कुछ दिन बंगापानी बैठते हैं। इस कारण अवैध खनन के मामलों की प्रशासन के स्तर से कोई जांच नहीं हो पाती। खनन का काम बेखौफ होकर चल रहा है।
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पालिका सभासद नृप सिंह गर्ब्याल ने कहा कि यदि खनन का काम बंद नहीं किया गया तो तहसील कार्यालय के सामने धरना दिया जाएगा। स्थानीय लोगों ने पिछले दिनों क्षेत्र के दौरे पर आए डीआईसी पीएस सेलाल और एसपी रोशन लाल शर्मा के सामने भी मुद्दा रखा था। दोनों अधिकारियों ने खनन पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की बात कही लेकिन अब तक कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। सभासद ने कहा है कि अब इस मामले में आंदोलन खड़ा किया जाएगा। इधर, थाना प्रभारी बलवंत कांबोज का कहना है कि खनन का काम वन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है। पुलिस सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
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इसलिए बढ़ रहे खननकर्ताओं के हौसले
सीमांत तहसील में एक माह से एसडीएम का पद रिक्त है। तहसीलदार के पास बंगापानी तहसील का भी कार्यभार है। वह कुछ दिन बंगापानी बैठते हैं। इस कारण अवैध खनन के मामलों की प्रशासन के स्तर से कोई जांच नहीं हो पाती। खनन का काम बेखौफ होकर चल रहा है।
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