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जंगली जानवरों के आवास में हस्तक्षेप के कारण आबादी में आ रहे तेंदुए

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Sep 2021 12:54 AM IST
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Conflict by Leopard
पिथौरागढ के बजेटी क्षेत्र में दिन के समय गश्त करती टीम। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। हमने जंगलों को काटकर अपने लिए सैरगाह बनाया तो बाघ और गुलदार के इलाके कम हुए, शिकार की भी कमी हुई तो वे जंगल छोड़कर रिहायशी इलाकों में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि तेंदुओं का आबादी वाले क्षेत्र में आना जंगल में उनके खाने की कमी को भी दर्शाता है। वहीं अनजाने में गांवों तक सड़कों के नाम पर उनके आवास को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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जिले में डेढ़ सालों में तेंदुओं ने आबादी वाले क्षेत्रों का रुख कर 12 से अधिक लोगों को मौत के घाट उतारा था। ये घटना पिथौरागढ़, देवलथल, कनालीछीना, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट में हुई। इसके बाद तीन शिकारियों ने सात तेंदुओं का मौत के घाट उतारा था।
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इससे स्पष्ट है जंगलों में कम होता भोजन तेंदुओं को आसान शिकार की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों का रुख करने के मजबूर करता है। चेन्नई के पारिस्थितिकी विशेषज्ञ रामनारायण का कहना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं इस बात की ओर इशारा कर रहीं हैं कि जंगल में तेंदुओं का भोजन कम हुआ है।
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अगर जंगल में पर्याप्त मात्रा में भोजन या उनके रहने के लिए अनुकूल वातावरण होता तो निश्चित तौर पर तेंदुए आबादी का रुख नहीं करते। तेंदुआ बूढ़ा होने, बीमार होने या घायल होने पर शिकार करने में अक्षम होते हैं। तब वे आसान शिकार कुत्ते, गाय की तलाश में आबादी का रुख करते हैं।
इंसान पर एकदम नहीं करते हमला
पिथौरागढ़। तेंदुए मनुष्य पर सीधे हमला नहीं करते हैं, न इंसान उनका भोजन है। पिछली घटनाओं से लगता है कि तेंदुए कुत्ता, गाय, बकरी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों में आए होंगे। अगर इंसान तेंदुओं का भोजन होते तो हमले अधिक होते।
हरेला संस्था के मनोज मटवाल कहते हैं, हमें तेंदुओं के व्यवहार को समझना होगा। हमलों के कारण का अध्ययन करना जरूरी है। अगर हम उनके व्यवहार को समझ पाए तो इंसान और तेंदुओं के संघर्ष से बचा जा सकेगा। पिछले साल भी सितंबर में तेंदुए ने सुकौली में हमला एक युवक को मारा था। पिछले साल चार लोगों ने हमले में अपनी जान गंवाई थी। इस बार भी सितंबर में ये घटना हुई है।

पीड़ित परिवार को दी आर्थिक मदद
पिथौरागढ़। भाजपा के वरिष्ठ नेता वीरेंद्र साह ठुलघरिया ने बजेटी के पाटा में 19 सितंबर को तेंदुए के हमले में मृत आठ साल की मासूम मानसी के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने घटना पर दुख जताते हुए परिवार को ढांढस बधाया। उन्होंने पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद भी की। भविष्य में भी हरसंभव मदद का भरोसा दिया। इस मौके पर पवन पाटनी, अक्षय, पूरन वर्मा, सुनील वर्मा मौजूद रहे।
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