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कोलकाता यात्रा के अनुभवों से रूबरू हो रहे हैं बच्चे
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पिथौरागढ़ में परिचर्चा करते शिक्षक। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : PITHORAGARH
भारत की विविधता को समझने के लिए शीतकालीन अवकाश में 13 शिक्षकों के समूह ने स्वैच्छिक रूप कोलकाता की यात्रा की। शिक्षक अब विद्यालयों के बच्चों को यात्रा वृत्रांत और विविधता में एकता की जानकारी दे रहे हैं।
यात्रा में प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल थीं। उन्होंने अपने यात्रा अनुभवों को लेख, पत्र और फोटोग्राफ के जरिये संकलित किया है। शिक्षकों ने यात्रा को शिक्षण में किस प्रकार एक महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जाए, इस पर अजीम प्रेमजी फाउंडेशन में फोटो प्रदर्शनी के साथ ही परिचर्चा की।
मुख्य अतिथि जिला शिक्षाधिकारी (माध्यमिक) डॉ. अशोक गुसाईं ने कहा कि इस प्रकार के उद्देश्यपूर्ण शैक्षिक भ्रमण के अनुभव जब कक्षा शिक्षण में प्रयोग किए जाएंगे तो अवश्य ही बेहतर परिणाम सामने आएंगे। शिक्षक महेश पुनेठा ने छात्रों को भी यात्रा के अवसर देने की बात कही। चिंतामणि जोशी जी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों की पढ़ने-लिखने में अहम भूमिका होती है। शिक्षक संतोष पंत, मीना गोस्वामी, कृष्ण कुमार पांडेय ने अपने यात्रा संस्मरण सुनाए। शिक्षकों ने कहा कि हिमालय से हुगली की इस यात्रा में उन्होंने स्वयं जो सीखा है उसे वह अपने विद्यालय तक ले जाएंगे। संचालन कैलाश चंद्र जोशी जी ने किया।
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यात्रा में प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल थीं। उन्होंने अपने यात्रा अनुभवों को लेख, पत्र और फोटोग्राफ के जरिये संकलित किया है। शिक्षकों ने यात्रा को शिक्षण में किस प्रकार एक महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जाए, इस पर अजीम प्रेमजी फाउंडेशन में फोटो प्रदर्शनी के साथ ही परिचर्चा की।
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मुख्य अतिथि जिला शिक्षाधिकारी (माध्यमिक) डॉ. अशोक गुसाईं ने कहा कि इस प्रकार के उद्देश्यपूर्ण शैक्षिक भ्रमण के अनुभव जब कक्षा शिक्षण में प्रयोग किए जाएंगे तो अवश्य ही बेहतर परिणाम सामने आएंगे। शिक्षक महेश पुनेठा ने छात्रों को भी यात्रा के अवसर देने की बात कही। चिंतामणि जोशी जी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों की पढ़ने-लिखने में अहम भूमिका होती है। शिक्षक संतोष पंत, मीना गोस्वामी, कृष्ण कुमार पांडेय ने अपने यात्रा संस्मरण सुनाए। शिक्षकों ने कहा कि हिमालय से हुगली की इस यात्रा में उन्होंने स्वयं जो सीखा है उसे वह अपने विद्यालय तक ले जाएंगे। संचालन कैलाश चंद्र जोशी जी ने किया।
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