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अग्निपथ योजना के विरोध में पिथौरागढ़ में सड़कों पर उतरे हजारों बेरोजगार

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jun 2022 11:48 PM IST
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Apose of Agnipath in Pithauragarh
पिथौरागढ़। सेना भर्ती को लेकर केंद्र सरकार की ओर से पेश की गई अग्निपथ योजना के खिलाफ बृहस्पतिवार को पिथौरागढ़ में युवा सड़कों पर उतर आए। उन्होंने केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ जमकर नारे लगाकर प्रदर्शन कर सरकार का पुतला दहन किया। सिल्थाम तिराहे में जाम के बाद बैंक रोड, धारचूला रोड, टनकपुर रोड पर 500 से ज्यादा वाहन एक घंटे से अधिक समय तक फंस गए। पुलिस ने लाठियां फटकारी तो भगदड़ मच गई। एनएच जाम करने पर पुलिस ने 12 नामजद समेत 70 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
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सिल्थाम तिराहे में जमा हुए युवाओं ने कहा कि करीब 18 साल में भर्ती होने वाला युवा चार साल में सेवानिवृत्त होकर फिर बेरोजगार हो जाएगा। इसके बाद रोजगार के लिए धक्के खाने पड़ेंगे। इसके बाद युवाओं ने घंटाकरण तिराहे पर जाम लगाया। फिर अपटेक और फिर रोडवेज स्टेशन पहुंच गए। रोडवेज स्टेशन पर जाम लगा रहे युवाओं को लाठियां भांजकर खदेड़ा गया। कई युवा पुलिस से बचने के लिए देव सिंह मैदान, सिमलगैर, धर्मशाला लाइन, पुरानी बाजार की ओर भाग गए। आंदोलन तेज होता देख नगर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। हर तिराहे और चौराहे पर पुलिस लाइन में रिजर्व में रखा पुलिस बल तैनात कर दिया। बेरोजगारों के समर्थन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष त्रिलोक महर की अगुवाई में प्रधानमंत्री और सरकार का पुतला जलाया।
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युवाओं को समझा रहे एसडीएम हुए चोटिल
पिथौरागढ़। टनकपुर तिराहे के पास एसडीएम सुंदर सिंह आंदोलनरत युवाओं को समझा रहे थे, उनके हाथ में हेलमेट था। अचानक हाथ में चोट लग गई। चोट कैसे लगी अभी इसका पता नहीं चल सका है। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। एसडीएम सुंदर सिंह ने बताया कि फ्रैक्चर नहीं है।
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नगर के विभिन्न हिस्सों में आंदोलन कर सरकारी कार्य में बाधा डालने वाले 12 नामजद और 70 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। एलआईयू को आंदोलन को भड़काने वाले लोगों के नाम चिह्नित कर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। लोगों से अपील है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करें। कानून व्यवस्था को तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- लोकेश्वर सिंह, एसपी, पिथौरागढ़।
बोले बेरोजगार
दो साल पूर्व जो सेना भर्ती कराई थी उसमें उत्तराखंड के युवाओं ने भी हिस्सा लिया था। दो साल होने के बाद भी लिखित परीक्षा नहीं कराई गई है। मोदी सरकार का फरमान गलत है।
- मोहित, बेरोजगार, पिथौरागढ़।
मोदी सरकार सेना भर्ती को अपनी प्रयोगशाला बना कर भारतीय सेनाओं की गरिमा और साहस की परंपरा के साथ खिलवाड़ कर रही है जिसके विरोध में युवा बेरोजगार सड़कों पर उतर आए हैं। - सूरज, बेरोजगार, पिथौरागढ़।
बोले कांग्रेस जिलाध्यक्ष
सेना में नियमित भर्ती की जगह चार साल के लिए संविदा भर्ती से देश की सुरक्षा के लिए उचित संदेश नहीं है। संविदा भर्ती वाले युवाओं को सेना में कोई रैंक नहीं मिलेगी और न ही कोई पेंशन। अग्निवीरों के भविष्य के लिए कोई योजना और रूपरेखा भी मोदी सरकार के पास नहीं है।
- त्रिलोक महर, जिलाध्यक्ष कांग्रेस पिथौरागढ़।
चंपावत में आग के हवाले किए भाजपा के झंडे, होर्डिंग, बैनर
चंपावत/टनकपुर। सेना की भर्ती की तैयारी कर रहे नौजवानों ने लाठी-डंडों के साथ बृहस्पतिवार को तीन घंटे तक जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान रास्ते में लगे भाजपा के होर्डिंग, पोस्टर, झंडों को उतार आग के हवाले किया। पूर्व विधायक हेमेश खर्कवाल के नेतृत्व में कांग्रेस ने आंदोलन का समर्थन किया है। इंसाफ के मंदिर गोल्ज्यू दरबार में केंद्र सरकार की सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना की। युवाओं ने पिछले साल शुरू भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा न कराने और अग्निपथ योजना को निरस्त न करने पर 20 जून को आंदोलन की चेतावनी दी है।
टनकपुर में भी प्रदर्शन हुआ। तहसीलदार पिंकी आर्या के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। विरोध प्रदर्शन में राजेंद्र प्रसाद, शंकर महर, बादल सिंह महर, हिमालय सिंह, प्रकाश महर, योगेश महर, मनोज राम, गौरव भट्ट, अमन मौर्य, रामेन सिंह, करन, राहुल, चंदन सिंह, दीपक कुंवर आदि थे।
लिखित परीक्षा के इंतजार में बीत गए सवा साल
चंपावत। चंपावत और पिथौरागढ़ जिले के 1440 युवाओं का भविष्य मंझधार में है। फरवरी 2021 में इन नौजवानों ने मेडिकल फिटनेस और शारीरिक परीक्षा पास की थी।
मनीष महर का कहना है कि इसके बाद से सवा साल बीत गया लेकिन लिखित परीक्षा न होने से इतने युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।
युवाओं की पीड़ा
परीक्षा निरस्त हुई तो कभी फौजी नहीं बन सकेंगे
लोहाघाट के धीरज सिंह के लिए फरवरी 2021 में आखिरी मौका था। उन्होंने इस अवसर का उपयोग करते हुए शुरुआती दोनों बाधाएं पार की। करीब सवा साल से लिखित परीक्षा की राह देख रहे हैं। धीरज कहते हैं कि पिछली परीक्षा उनके लिए अंतिम मौका था। अब उनकी उम्र 21 पार हो गई है।
किराये में रह तैयारी कर रहे धामीसौन के मनोज
चंपावत। धामीसौन गांव का युवा मनोज जोशी 17 किमी दूर चंपावत में किराये के मकान में रह फौज की तैयारी कर रहा है। फौज की तैयारी के लिए हर माह छह हजार रुपये खर्च कर रहे हैं। पिछले साल उन्होंने भी दो बाधाएं पार कीं लेकिन लिखित परीक्षा को लेकर असमंजस बना हुआ है।
ख्वाब के चकनाचूर होने का अंदेशा
चंपावत। पिछले साल की परीक्षा निरस्त हुई, तो चंपावत के आलीचौड़ गांव के अमित कुमार का ख्वाब चकनाचूर हो जाएगा। कहते हैं कि इस परीक्षा के लिए रोज चार घंटे का कड़ा अभ्यास कर रहे हैं, लेकिन अगर भर्ती पहले की तरह नहीं हुई, तो भविष्य मंझधार में लग रहा है।
अग्निपथ योजना की कोई उपयोगिता नहीं
चंपावत। नवीन कापड़ी को भी फौज की लिखित परीक्षा का इंतजार है, लेकिन अब वे उहापोह में हैं। परीक्षा होगी या खारिज होगी? अग्निपथ योजना के बाद इसे लेकर परेशान है। कहा कि ऐसे में चार साल की इस योजना की युवाओं के लिए कोई उपयोगिता नहीं होगी। इसे निरस्त किया जाना चाहिए।
चार साल बाद सुरक्षा गार्ड ही विकल्प
चंपावत। लिखित परीक्षा का इंतजार कर रहे बृजेश महराना कहते हैं कि चार साल में फौज में क्या सीखेंगे और फिर फौज की चार साल की सेवा के बाद सुरक्षा गार्ड में भर्ती होना भविष्य संवारना है।
अग्रिपथ योजना से मंझधार में युवा
चंपावत। कमल चंद कहते हैं कि अग्निपथ भर्ती योजना से युवाओं के भविष्य पर ग्रहण लग जाएगा। उन्हें पेंशन न मिले, कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन सिर्फ चार साल की भर्ती का कोई मतलब नहीं है। ऐसे में युवा मंझधार में फंस जाएंगे।
पूर्व सैनिकों की बातअग्रिपथ योजना वापस ले सरकार: रैंसवाल
चंपावत। असम राइफल्स से सेवानिवृत्त नायब सूबेदार और शहीद राहुल रैंसवाल के पिता वीरेंद्र सिंह रैंसवाल का कहना है कि अग्निपथ भर्ती योजना के लागू होने से युवाओं के भविष्य पर विपरीत असर पड़ेगा। देश हित में केंद्र सरकार को इस भर्ती योजना को वापस लेना चाहिए।
चंपावत जिले में 13 साल में दोगुने हो गए खाली हाथ
चंपावत। देश की सीमा की हिफाजत करने वाली फौज की तरह ही चंपावत जिले में बेरोजगारों की भी फौज बनती जा रही है जो एक अदद काम की तलाश में कई जगह भटक रही है। बेरोजगारी का ग्राफ भी लगातार बढ़ा है।

चंपावत जिले में 13 साल में बेरोजगारी तकरीबन दोगुनी हो गई है। 2009 में 12771 बेरोजगार थे, जो इस साल मार्च तक बढ़कर 24427 हो गए हैं जबकि इस अवधि में महज 2715 युवाओं को काम मिला है। जिला सेवायोजन अधिकारी राजेश दुर्गापाल ने बताया कि इस साल मार्च तक जिले में 24427 (8963 महिला और 15464 पुरुष) पंजीकृत बेरोजगार हैं। युवाओं के लिए सरकारी नौकरी तो दूर, निजी क्षेत्र में भी काम के अवसर कम हो रहे हैं। जिले में 2021 में रोजगार मेले के जरिये 109 लोगों को रोजगार मिला। इसमें से 90 प्रतिशत युवाओं को निजी क्षेत्र में प्रशिक्षण के साथ काम दिया गया।
दस साल में चंपावत जिले की बेरोजगारी का हाल
वर्ष पुरुष महिलाएं कुल बेरोजगार
2009 9494 3277 12771
2019 14346 8833 23179
2022 15464 8963 24427
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