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अवैध खनन के मुद्दे पर सभी विभाग चुप

Wed, 26 Oct 2016 10:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झूलाघाट
ब्यूरो/अमर उजाला, झूलाघाट Updated Wed, 26 Oct 2016 10:27 PM IST
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All quiet on the issue of illegal mining department
झूलाघाट में महाकाली के किनारे लगाए गए रेत के ढेर - फोटो : अमर उजाला

महाकाली से लगातार हो रहे खनन के मामले में सभी विभाग चुप्पी साधे हैं। नदी के किनारे से रेत को पहले खच्चरों के जरिए सड़क तक ढोया जा रहा है। वहां से इसे ट्रकों में भरकर पिथौरागढ़ पहुंचाया जा रहा है। खनन के धंधे में लगी एक बड़ी लॉबी पनप रही है, लेकिन बदले में सरकार को राजस्व के नाम फूटी कौड़ी भी नहीं मिलती।

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भारत-नेपाल की सीमा के किनारे पर स्थित कानड़ी गांव के पास विगत 6 माह से अवैध खनन चल रहा है, लेकिन गांव के ही कुछ लोगों की मिलीभगत से चल रहे इस अवैध कारोबार के खिलाफ लोग भी आवाज नहीं उठाते। अमर उजाला में खनन के इस धंधे पर लगातार खबरें छपने से अब लोगों को उम्मीद जगी है कि शायद प्रशासन इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम जरूर उठाएगा।
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नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी 55वीं वाहिनी ई कंपनी के उपनिरीक्षक निहाल चंद ने बताया कि उनकी कंपनी का काम सीमा पर चौकसी, पेट्रोलिंग, तस्करी को रोकना और ह्यूमन ट्रैफिकिंग की घटनाओं पर अंकुश लगाना है। उन्होंने बताया कि अवैध खनन की लिखित सूचना अपने कंपनी मुख्यालय में उच्च अधिकारियों को दे दी है। एसएसबी के पास अवैध खनन रोकने का कोई अधिकार नहीं है। 
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एसडीएम ने जारी किए आदेश
एसडीएम संतोष कुमार पांडे ने बताया कि उन्होंने खान अधिकारी को आदेश दे दिए हैं कि क्षेत्र में जाकर अवैध खनन पर रोक लगाएं। दीपावली की व्यस्तता के कारण वे कानड़ी गांव नहीं जा पा रहे हैं। जैसे ही समय मिलता है वह अवैध खनन का निरीक्षण करने जाएंगे।


अवैध खनन की सूचना एसओ को भी नहीं
कानड़ी गांव में हो रहे अवैध खनन की सूचना से झूलाघाट थाने की पुलिस अनभिज्ञ है। थाना प्रभारी रोहतास सागर से जब अवैध खनन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने गोलमोल जवाब दिया। उन्होंने कुल मिलाकर यही संकेत दिया कि यदि खनन हो भी रहा है तो इसकी जानकारी उनको नहीं है।

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