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18 घंटे की मशक्कत के बाद पकड़ में आई तेंदुआ
ब्यूरो/अमर उजाला,पिथौरागढ़
Updated Fri, 19 Feb 2016 10:46 PM IST
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पूरे 18 घंटे तक चली मशक्कत के बाद बृहस्पतिवार रात 12.55 बजे जीआईसी रोड में दिनेश चंद्र जोशी की मकान की गैलरी में छिपे तेंदुए को पिंजरे में कैद करने में कामयाबी मिली। वन विभाग की टीम को तेंदुए पकड़ने के लिए कई प्रयास करने पड़े। ट्रेंकुलाइजर का कोई असर तेंदुए पर नहीं हुआ था।
शायद ट्रेंकुलाइजर की दवा तेंदुए के शरीर में सही से नहीं लग पाई थी। रात में पहले पिंजरे को खींचकर सड़क तक लाया गया। फिर उसे वन विभाग के वाहन से डीएफओ आवास के पास स्थिति हॉल में रखा गया। इस प्रक्रिया को पूरा करने में तड़के तीन बजे तक का समय लग गया। तेंदुए के सकुशल पकड़े जाने से वन विभाग की टीम ने राहत की सांस ली।
डीएफओ डा. आईपी सिंह ने बताया कि पकड़ा गया तेंदुआ मादा है। इसकी उम्र करीब आठ साल की होगी। पिछले दिनों पकड़े गए शावक इसी मादा के रहे होंगे। इसीलिए यह उनकी तलाश में शहर में आ गई थी। शावकों को देवपुरी मोहल्ले से पकड़ा था। वन विभाग की टीम शावकों को थलकेदार के जंगल में छोड़ आई थी। तब से मादा तेंदुआ परेशान थी। जिस दिन शावक पकड़े गए थे उसी रात वह देवपुरी मोहल्ले में नजर आने लगी थी।
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डीएफओ ने बताया कि पकड़े गए शावक इसी मादा के थे। इसी कारण वह बेचैन थी। उन्होंने बताया कि तेंदुए को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा है। पशु चिकित्सक ने तेंदुए की जांच कर ली है। वह स्वस्थ है। उसके तेवरों में कहीं कोई कमी नहीं आई है।
भीड़ से बचने को सुबह ही जंगल पहुंचाया
डीएफओ आवास के पास स्थित जिस हॉल में तेंदुए को रखा गया था उसका पता लोगों को सुबह लग गया था। वन विभाग ने सावधानी के तौर पर तेंदुए को सुबह 10.30 बजे वाहन में लादकर थलकेदार के जंगल पहुंचा दिया है। थलकेदार में ही शावकों को भी छोड़ा गया था। अंधेरा होते ही तेंदुए को आजाद कर दिया गया।
जानवरों में भी खूब होती है ममता
तेंदुए के आबादी में घुस आने से यह साबित हो गया है कि जानवरों में भी अपने बच्चों की ममता खूब होती है। अन्यथा तेंदुआ इतना बड़ा रिस्क लेकर आबादी में नहीं घुसता। उसका मकसद सिर्फ बिछुड़े बच्चों को प्राप्त करना था। वन विभाग के अधिकारियों ने तेंदुए के इस मनोविज्ञान को समझ लिया था। कहा जाता है कि तेंदुए शावकों को अपने साथ आठ माह से लेकर एक वर्ष तक रखती है। पकड़े गए शावकों की उम्र सात माह के करीब थी। उनको अभी मां के संरक्षण की जरूरत है।
फिर से तेंदुआ आने की अफवाह उड़ी
खड़कोट देवपुरी मोहल्ले में बृहस्पतिवार की रात फिर से तेंदुआ आने की अफवाह उड़ गई। लोगों में तेंदुए का खौफ इतना ज्यादा हो गया है कि अब वह अफवाहों पर भी यकीन करने लगे हैं। कुछ लोगों ने रात में यह बात फैला दी कि फिर से तेंदुआ दिख गया है। हालांकि बाद में यह बात गलत साबित हुई।
मार्निंग वॉक पर कम संख्या में निकले लोग
तेंदुए का खौफ इस कदर रहा कि शुक्रवार की सुबह घंटाकरण से चंडाक जाने वाली रोड पर सुबह घूमने वालों की संख्या बहुत कम रही। जो लोग तड़के अंधेरे में घूमने जाते थे उन्होंने टाइम बदल दिया। वह उजाला होने के बाद ही घूमने निकले। घंटाकरण शिव मंदिर के पुजारी आनंद बल्लभ जोशी और दिनों चार बजे मंदिर आते थे। शुक्रवार को वह छह बजे मंदिर पहुंचे।
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शायद ट्रेंकुलाइजर की दवा तेंदुए के शरीर में सही से नहीं लग पाई थी। रात में पहले पिंजरे को खींचकर सड़क तक लाया गया। फिर उसे वन विभाग के वाहन से डीएफओ आवास के पास स्थिति हॉल में रखा गया। इस प्रक्रिया को पूरा करने में तड़के तीन बजे तक का समय लग गया। तेंदुए के सकुशल पकड़े जाने से वन विभाग की टीम ने राहत की सांस ली।
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डीएफओ डा. आईपी सिंह ने बताया कि पकड़ा गया तेंदुआ मादा है। इसकी उम्र करीब आठ साल की होगी। पिछले दिनों पकड़े गए शावक इसी मादा के रहे होंगे। इसीलिए यह उनकी तलाश में शहर में आ गई थी। शावकों को देवपुरी मोहल्ले से पकड़ा था। वन विभाग की टीम शावकों को थलकेदार के जंगल में छोड़ आई थी। तब से मादा तेंदुआ परेशान थी। जिस दिन शावक पकड़े गए थे उसी रात वह देवपुरी मोहल्ले में नजर आने लगी थी।
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डीएफओ ने बताया कि पकड़े गए शावक इसी मादा के थे। इसी कारण वह बेचैन थी। उन्होंने बताया कि तेंदुए को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा है। पशु चिकित्सक ने तेंदुए की जांच कर ली है। वह स्वस्थ है। उसके तेवरों में कहीं कोई कमी नहीं आई है।
भीड़ से बचने को सुबह ही जंगल पहुंचाया
डीएफओ आवास के पास स्थित जिस हॉल में तेंदुए को रखा गया था उसका पता लोगों को सुबह लग गया था। वन विभाग ने सावधानी के तौर पर तेंदुए को सुबह 10.30 बजे वाहन में लादकर थलकेदार के जंगल पहुंचा दिया है। थलकेदार में ही शावकों को भी छोड़ा गया था। अंधेरा होते ही तेंदुए को आजाद कर दिया गया।
जानवरों में भी खूब होती है ममता
तेंदुए के आबादी में घुस आने से यह साबित हो गया है कि जानवरों में भी अपने बच्चों की ममता खूब होती है। अन्यथा तेंदुआ इतना बड़ा रिस्क लेकर आबादी में नहीं घुसता। उसका मकसद सिर्फ बिछुड़े बच्चों को प्राप्त करना था। वन विभाग के अधिकारियों ने तेंदुए के इस मनोविज्ञान को समझ लिया था। कहा जाता है कि तेंदुए शावकों को अपने साथ आठ माह से लेकर एक वर्ष तक रखती है। पकड़े गए शावकों की उम्र सात माह के करीब थी। उनको अभी मां के संरक्षण की जरूरत है।
फिर से तेंदुआ आने की अफवाह उड़ी
खड़कोट देवपुरी मोहल्ले में बृहस्पतिवार की रात फिर से तेंदुआ आने की अफवाह उड़ गई। लोगों में तेंदुए का खौफ इतना ज्यादा हो गया है कि अब वह अफवाहों पर भी यकीन करने लगे हैं। कुछ लोगों ने रात में यह बात फैला दी कि फिर से तेंदुआ दिख गया है। हालांकि बाद में यह बात गलत साबित हुई।
मार्निंग वॉक पर कम संख्या में निकले लोग
तेंदुए का खौफ इस कदर रहा कि शुक्रवार की सुबह घंटाकरण से चंडाक जाने वाली रोड पर सुबह घूमने वालों की संख्या बहुत कम रही। जो लोग तड़के अंधेरे में घूमने जाते थे उन्होंने टाइम बदल दिया। वह उजाला होने के बाद ही घूमने निकले। घंटाकरण शिव मंदिर के पुजारी आनंद बल्लभ जोशी और दिनों चार बजे मंदिर आते थे। शुक्रवार को वह छह बजे मंदिर पहुंचे।