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एडीबी के सहायक अभियंता को 25 हजार का जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला,पिथौरागढ़
Updated Sat, 30 Jan 2016 10:42 PM IST
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राज्य सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत ने एडीबी निर्माण खंड के सहायक अभियंता विनोद कुमार सिन्हा को समय पर सूचना न देने का आरोपी पाते हुए 25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह धनराशि राजकोष में जमा की जाएगी।
राज्य सूचना आयोग के सचिव नरेंद्र सिंह क्वीरियाल की ओर से 4 जनवरी को जारी आदेश में कहा गया है कि डीडीहाट के चोपड़ाखेत निवासी आरटीआई कार्यकर्ता त्रिभुवन सिंह चुफाल ने 4 अगस्त 2015 को एडीबी निर्माण खंड कार्यालय से विभागीय कार्यों के बारे में जानकारी मांगी थी। विभाग के अधिकारियों ने यह सूचना देने के बजाय पत्र वापस त्रिभुवन सिंह चुफाल को लौटा दिया। त्रिभुवन सिंह ने 10 सितंबर को यह मामला राज्य सूचना आयुक्त के पास प्रस्तुत किया। त्रिभुवन सिंह ने विभाग से जानकारी मांगी थी कि वर्ष 2014-15 में कितने मार्गों का अनुबंध किया गया। इन मार्गों के लिए क्या किसी समाचार पत्र में निविदा छापी गई थी, यदि कोई निविदा प्रकाशित की गई तो उसका पूरा विवरण दिया जाए। अनुबंध गठित करने के लिए जो माप पुस्तिका और लॉग बुक तैयार की गई, उसकी छायाप्रति उपलब्ध कराई जाए। यदि आपके विभाग ने कोई कार्य किसी भी मद से एक अप्रैल 2014 के बाद किए हैं तो उनका संपूर्ण ब्यौरा उपलब्ध कराया जाए, यदि किसी मार्ग में अनियमितता बरती गई है अर्थात किसी मार्ग में बिना कार्य के भुगतान किया गया है तो इस मामले में दोषी अभियंता के खिलाफ विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की गई है। उत्तराखंड सूचना आयोग की ओर से जारी फैसले की प्रति त्रिभुवन को भी मिल गई है। उन्होंने कहा कि आरटीआई का पालन न करने वाले अधिकारियों को इसी तरह का दंड मिलेगा।
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राज्य सूचना आयोग के सचिव नरेंद्र सिंह क्वीरियाल की ओर से 4 जनवरी को जारी आदेश में कहा गया है कि डीडीहाट के चोपड़ाखेत निवासी आरटीआई कार्यकर्ता त्रिभुवन सिंह चुफाल ने 4 अगस्त 2015 को एडीबी निर्माण खंड कार्यालय से विभागीय कार्यों के बारे में जानकारी मांगी थी। विभाग के अधिकारियों ने यह सूचना देने के बजाय पत्र वापस त्रिभुवन सिंह चुफाल को लौटा दिया। त्रिभुवन सिंह ने 10 सितंबर को यह मामला राज्य सूचना आयुक्त के पास प्रस्तुत किया। त्रिभुवन सिंह ने विभाग से जानकारी मांगी थी कि वर्ष 2014-15 में कितने मार्गों का अनुबंध किया गया। इन मार्गों के लिए क्या किसी समाचार पत्र में निविदा छापी गई थी, यदि कोई निविदा प्रकाशित की गई तो उसका पूरा विवरण दिया जाए। अनुबंध गठित करने के लिए जो माप पुस्तिका और लॉग बुक तैयार की गई, उसकी छायाप्रति उपलब्ध कराई जाए। यदि आपके विभाग ने कोई कार्य किसी भी मद से एक अप्रैल 2014 के बाद किए हैं तो उनका संपूर्ण ब्यौरा उपलब्ध कराया जाए, यदि किसी मार्ग में अनियमितता बरती गई है अर्थात किसी मार्ग में बिना कार्य के भुगतान किया गया है तो इस मामले में दोषी अभियंता के खिलाफ विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की गई है। उत्तराखंड सूचना आयोग की ओर से जारी फैसले की प्रति त्रिभुवन को भी मिल गई है। उन्होंने कहा कि आरटीआई का पालन न करने वाले अधिकारियों को इसी तरह का दंड मिलेगा।
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