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कैसे बने स्कूलों की रसोई में भोजन

Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
Pithoragarh
Pithoragarh Updated Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
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पिथौरागढ़। महंगाई का असर आम घर की रसोई पर ही नहीं शिक्षा विभाग की रसोई पर भी पड़ रहा है। मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) की निर्धारित दरों से पूरा कर पाना अब शिक्षा महकमे के लिए मुश्किल हो रहा है। विभागीय अधिकारियों ने भी इस स्थिति से निपटने के लिए उच्चाधिकारियों को खत भेजा है।
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पिथौरागढ़ जिले के 1189 प्राइमरी स्कूलों में से 1159 स्कूलों के 28203 छात्र-छात्राएं एमडीएम योजना का लाभ उठा रहे हैं। इसी तरह जूनियर तक की कक्षाओं में 460 स्कूलों में से 449 के 22596 छात्र-छात्राएं योजना से लाभांवित हो रहे हैं। जिले में प्राइमरी स्तर पर 30 और जूनियर स्तर पर 11 स्कूलों में अलग-अलग कारणों से यह योजना इस वक्त संचालित नहीं है। प्राथमिक स्तर पर प्रति छात्र 3.11 रुपये एवं जूनियर स्तर पर प्रति छात्र 4.65 रुपये का खर्च निर्धारित है।
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रसोई गैस के दाम में बेतहाशा इजाफा होने से अब एमडीएम का गैस सिलेंडर 391 रुपये के स्थान पर 1181 रुपये का पड़ रहा है। प्रति माह प्राथमिक स्तर पर एक छात्र के खर्च में 66 रुपये एवं जूनियर स्तर पर 89 रुपये की कमी आ रही है। प्राथमिक शिक्षक संघ के बिण ब्लाक के अध्यक्ष जय प्रकाश वर्मा ने राज्य परियोजना निदेशक को खत भेज पके हुए भोजन के बाद नकद धनराशि एवं चावल वितरण करने की मांग की है।
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