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धनाभाव में लटका रिवर राफ्टिंग सेंटर का निर्माण
Updated Tue, 17 Jul 2018 10:44 PM IST
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले में रिवर राफ्टिंग के साथ पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2013-14 में पांच करोड़ की लागत से जौलजीबी में रिवर राफ्टिंग सेंटर स्वीकृत किया। पहली किश्त के रूप में 94.91 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। इस धनराशि से कुछ कार्य तो किए गए, लेकिन बजट के अभाव में अब सब ठंडा पड़ गया है।
सीमांत जिले की नदियों में रिवर राफ्टिंग की संभावनाओं को देखते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जौलजीबी में रिवर राफ्टिंग सेंटर को स्वीकृति दी। सेंटर के लिए बलधार ग्राम पंचायत ने अपनी 25 नाली भूमि कुमाऊं मंडल विकास निगम को दी। निगम के अभियंता गिरीश चंद्र भट्ट ने बताया कि करीब पांच करोड़ की लागत से एक बहुउद्देशीय हॉल का निर्माण कर उसमें छोटे-छोटे कमरे बनाए जाने थे।
इसके अलावा सेंटर तक पहुंचने के लिए आंतरिक मार्ग, चहारदीवारी, रिट्रेनिंग वॉल, परिसर के गोल घेरे में पर्यटक बैंचों का निर्माण, सुरक्षा के लिए तारबाड़, ओवरहेड वाटर टैंक, नाली और सीवर का कार्य, उपकरण रखने के लिए गोदाम और आठ फाइबर हटों का निर्माण किया जाना था। साथ ही सेंटर को जगमग करने के लिए सोलर पावर सिस्टम लगाया जाना था। वर्ष 2013-14 में मिली करीब एक करोड़ की धनराशि से बहुउद्देशीय हाल की नींव, चहारदीवारी, रिट्रेनिंग वॉल का निर्माण, वाटर टैंक के लिए स्रोत से आधा दूरी तक पानी लाने, उपकरण रखने के लिए गोदाम की फाउंडेशन, फाइबर हट के लिए कंक्रीट बैड तैयार किया गया।
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वर्ष 2015-16 में एक करोड़ की धनराशि खत्म होने के बाद सेंटर का काम भी रुक गया। यदि शेष धनराशि जारी नहीं की जाती है तो बलधार में सेंटर निर्माण पर खर्च एक करोड़ रुपया भी बेकार हो जाएगा। रिवर राफ्टिंग सेंटर बनने से यहां के युवाओं को रोजगार भी मिलता।
एक करोड़ रुपये व्यय होने के बाद कई बार प्रदेश सरकार से धनराशि की मांग की गई। रिवर राफ्टिंग सेंटर बनने के बाद इसे पर्यटन विभाग को हस्तांतरित किया जाना था। धनराशि नहीं मिलने से सेंटर का कार्य अधर में लटक गया है। -हरीश चंद्र भट्ट, जेई, केएमवीएन।
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सीमांत जिले की नदियों में रिवर राफ्टिंग की संभावनाओं को देखते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जौलजीबी में रिवर राफ्टिंग सेंटर को स्वीकृति दी। सेंटर के लिए बलधार ग्राम पंचायत ने अपनी 25 नाली भूमि कुमाऊं मंडल विकास निगम को दी। निगम के अभियंता गिरीश चंद्र भट्ट ने बताया कि करीब पांच करोड़ की लागत से एक बहुउद्देशीय हॉल का निर्माण कर उसमें छोटे-छोटे कमरे बनाए जाने थे।
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इसके अलावा सेंटर तक पहुंचने के लिए आंतरिक मार्ग, चहारदीवारी, रिट्रेनिंग वॉल, परिसर के गोल घेरे में पर्यटक बैंचों का निर्माण, सुरक्षा के लिए तारबाड़, ओवरहेड वाटर टैंक, नाली और सीवर का कार्य, उपकरण रखने के लिए गोदाम और आठ फाइबर हटों का निर्माण किया जाना था। साथ ही सेंटर को जगमग करने के लिए सोलर पावर सिस्टम लगाया जाना था। वर्ष 2013-14 में मिली करीब एक करोड़ की धनराशि से बहुउद्देशीय हाल की नींव, चहारदीवारी, रिट्रेनिंग वॉल का निर्माण, वाटर टैंक के लिए स्रोत से आधा दूरी तक पानी लाने, उपकरण रखने के लिए गोदाम की फाउंडेशन, फाइबर हट के लिए कंक्रीट बैड तैयार किया गया।
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वर्ष 2015-16 में एक करोड़ की धनराशि खत्म होने के बाद सेंटर का काम भी रुक गया। यदि शेष धनराशि जारी नहीं की जाती है तो बलधार में सेंटर निर्माण पर खर्च एक करोड़ रुपया भी बेकार हो जाएगा। रिवर राफ्टिंग सेंटर बनने से यहां के युवाओं को रोजगार भी मिलता।
एक करोड़ रुपये व्यय होने के बाद कई बार प्रदेश सरकार से धनराशि की मांग की गई। रिवर राफ्टिंग सेंटर बनने के बाद इसे पर्यटन विभाग को हस्तांतरित किया जाना था। धनराशि नहीं मिलने से सेंटर का कार्य अधर में लटक गया है। -हरीश चंद्र भट्ट, जेई, केएमवीएन।