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घंटों इंतजार के बाद भी नहीं हुआ प्लास्टर
Updated Wed, 02 May 2018 10:44 PM IST
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पिथौरागढ़। जिला अस्पताल में घंटों इंतजार के बाद भी मरीजों को हड्डी का डॉक्टर नहीं मिल पाया। बुधवार सुबह से दोपहर तक डॉक्टर के कक्ष के आगे मरीजों की कतार लगी रही। काफी देर बाद भी जब डॉक्टर नहीं आए तो मरीजों को लौटना पड़ा। मजबूरन कई मरीजों को निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ी।
बुधवार को जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ की ओपीडी, प्लास्टर रूम से लेकर ओटी तक मरीजों की लंबी कतार लगी रही। मरीज और तीमारदार सुबह साढ़े आठ बजे से ही पर्ची बनाकर लाइन मेें लग गए थे। साढ़े पांच घंटे इंतजार के बाद भी डॉक्टर नहीं आए तो मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ा। इससे ओपीडी ठप पड़ी रही। कई मरीजों का प्लास्टर नहीं हो पाया।
कनालीछीना के मातोली गांव के अशोक कुुमार साढ़े तीन साल की बेटी मनीषा के हाथ पर प्लास्टर लगवाने आए थे। साढ़े पांच घंटे के इंतजार के बाद मजबूरी में उन्होंने निजी अस्पताल की शरण ली।
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इसी तरह पिथौरागढ़ के धनौड़ा निवासी 58 वर्षीय त्रिलोक सिंह का हाथ फ्रैक्चर था। डॉक्टर नहीं आने से प्लास्टर नहीं हो पाया। बुजुर्ग मरीज को भी इलाज के लिए निजी अस्पताल का रुख करना पड़ा। हालांकि दोपहर दो बजे के बाद डॉक्टर ओपीडी पहुंचे, तब तक अधिकतर मरीज लौट चुके थे।
बता दें कि अस्पताल में हड्डी के दो डॉक्टर हैं। आर्थोसर्जन डॉ. दीपक पीएमएस प्रशासनिक कार्यों के साथ ही मरीजों को भी देखते हैं। मीटिंग के चलते पीएमएस भी ओपीडी में नहीं बैठ पाए। प्रमुुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एचएस खड़ायत का कहना है कि डॉक्टर के ओटी में होने की वजह से ओपीडी नहीं चल पाई।
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बुधवार को जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ की ओपीडी, प्लास्टर रूम से लेकर ओटी तक मरीजों की लंबी कतार लगी रही। मरीज और तीमारदार सुबह साढ़े आठ बजे से ही पर्ची बनाकर लाइन मेें लग गए थे। साढ़े पांच घंटे इंतजार के बाद भी डॉक्टर नहीं आए तो मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ा। इससे ओपीडी ठप पड़ी रही। कई मरीजों का प्लास्टर नहीं हो पाया।
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कनालीछीना के मातोली गांव के अशोक कुुमार साढ़े तीन साल की बेटी मनीषा के हाथ पर प्लास्टर लगवाने आए थे। साढ़े पांच घंटे के इंतजार के बाद मजबूरी में उन्होंने निजी अस्पताल की शरण ली।
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इसी तरह पिथौरागढ़ के धनौड़ा निवासी 58 वर्षीय त्रिलोक सिंह का हाथ फ्रैक्चर था। डॉक्टर नहीं आने से प्लास्टर नहीं हो पाया। बुजुर्ग मरीज को भी इलाज के लिए निजी अस्पताल का रुख करना पड़ा। हालांकि दोपहर दो बजे के बाद डॉक्टर ओपीडी पहुंचे, तब तक अधिकतर मरीज लौट चुके थे।
बता दें कि अस्पताल में हड्डी के दो डॉक्टर हैं। आर्थोसर्जन डॉ. दीपक पीएमएस प्रशासनिक कार्यों के साथ ही मरीजों को भी देखते हैं। मीटिंग के चलते पीएमएस भी ओपीडी में नहीं बैठ पाए। प्रमुुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एचएस खड़ायत का कहना है कि डॉक्टर के ओटी में होने की वजह से ओपीडी नहीं चल पाई।