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गलत तरीके से बिछाई जा रही केबल को उखाड़ने का काम शुरू
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श्रीकोट में गलत ढंग से बिछाई जा रही विद्युत लाईन को सही करने का काम हुआ शुरू
- फोटो : SHRINAGAR
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राजकीय मेडिकल कॉलेज के अधीन बेस अस्पताल में भूमिगत विद्युत केबल उखाड़ी जाने लगी है। अब विद्युत केबल निर्धारित मानकों के अनुसार बिछाई जाएगी। कॉलेेज प्रशासन की ओर से काम की गुणवत्ता परखने और निगरानी के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। कॉलेज प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जब तक मानकों के अनुसार काम नहीं होगा, ठेकेदार को भी भुगतान नहीं होगा। यह सब हुआ है अमर उजाला की ओर से भूमिगत विद्युत लाइन बिछाने में बरती अनियमितताओं को उजागर करने के बाद।
मेडिकल कॉलेज के अधीन बेस अस्पताल श्रीनगर में 430 केवीए ट्रांसफर से विद्युत आपूर्ति की जाती है। वर्तमान में लोड बढ़ने की वजह से मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से 800 केवीए विद्युत ट्रांसफर स्थापित किया गया है। कार्यदायी संस्था उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम देहरादून की ओर से ट्रांसफार्मर से सप्लाई सब स्टेशन तक भूमिगत विद्युत लाइन बिछाई जा रही है।
लाइन को भूमिगत करते समय मानकों का ध्यान नही रखा गया। विद्युत केबल को जमीन से मात्र 4 से 6 इंच गहरे में दबा दिया गया। साथ ही इसको गुजारने के लिए पाइपों का प्रयोग भी नहीं किय गया। जबकि भारतीय विद्युत संहिता के मानकों के अनुसार एलटी (स्थानीय वितरण) लाइन को 75 सेंटीमीटर गहरा बिछाया जाना चाहिए था।
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अमर उजाला ने 25 दिसंबर के अंक में इस घपले को विद्युत लाइन को भूमिगत करने में मानक दरकिनार शीर्षक से प्रकाशित किया। खबर प्रकाशित होने के बाद प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने इसका संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि कॉलेज के वरिष्ठ डॉक्टर अच्युत नारायण पांडेय, पीआरओ अरुण बडोनी और गार्ड सुपरवाइजर शिव सिंह नेगी की तीन सदस्यीय कमेटी काम पर नजर रखने के लिए बनाई गई है। कमेटी को मानकों के अनुसार काम करवाने का जिम्मा दिया गया है। उन्होंने बताया कि यदि काम मानक के अनुसार नहीं हुआ, तो भुगतान रोक दिया जाएगा। वहीं, ठेकेदार ने भी जमीन में दबी केबल को उखाड़ना शुरू कर दिया है। ताकि मानक के अनुसार बिछाई जा सके।
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मेडिकल कॉलेज के अधीन बेस अस्पताल श्रीनगर में 430 केवीए ट्रांसफर से विद्युत आपूर्ति की जाती है। वर्तमान में लोड बढ़ने की वजह से मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से 800 केवीए विद्युत ट्रांसफर स्थापित किया गया है। कार्यदायी संस्था उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम देहरादून की ओर से ट्रांसफार्मर से सप्लाई सब स्टेशन तक भूमिगत विद्युत लाइन बिछाई जा रही है।
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लाइन को भूमिगत करते समय मानकों का ध्यान नही रखा गया। विद्युत केबल को जमीन से मात्र 4 से 6 इंच गहरे में दबा दिया गया। साथ ही इसको गुजारने के लिए पाइपों का प्रयोग भी नहीं किय गया। जबकि भारतीय विद्युत संहिता के मानकों के अनुसार एलटी (स्थानीय वितरण) लाइन को 75 सेंटीमीटर गहरा बिछाया जाना चाहिए था।
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अमर उजाला ने 25 दिसंबर के अंक में इस घपले को विद्युत लाइन को भूमिगत करने में मानक दरकिनार शीर्षक से प्रकाशित किया। खबर प्रकाशित होने के बाद प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने इसका संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि कॉलेज के वरिष्ठ डॉक्टर अच्युत नारायण पांडेय, पीआरओ अरुण बडोनी और गार्ड सुपरवाइजर शिव सिंह नेगी की तीन सदस्यीय कमेटी काम पर नजर रखने के लिए बनाई गई है। कमेटी को मानकों के अनुसार काम करवाने का जिम्मा दिया गया है। उन्होंने बताया कि यदि काम मानक के अनुसार नहीं हुआ, तो भुगतान रोक दिया जाएगा। वहीं, ठेकेदार ने भी जमीन में दबी केबल को उखाड़ना शुरू कर दिया है। ताकि मानक के अनुसार बिछाई जा सके।