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इस साल भी जयपुर में चलेगा एनआईटी का सेटेलाइट परिसर
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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) उत्तराखंड का सेटेलाइट कैंपस एनआईटी जयपुर आगामी शिक्षण सत्र 2020-21 में भी संचालित होगा। इसकी वजह श्रीनगर में हॉस्टल का निर्माण न होना बताया जा रहा है। तर्क दिया गया है कि हॉस्टल के अभाव में होटल किराये पर लेने पड़ेेंगे, जिसमें लगभग दो करोड़ रुपये खर्च आएगा। एनआईटी की बीओजी (बोर्ड ऑफ गवर्नेस) ने इस निर्णय पर मुहर लगा दी है।
वर्ष 2010 से एनआईटी श्रीनगर राजकीय पॉलीटेक्निक और आईटीआई की परिसंपत्तियों पर संचालित हो रहा है। यहां छात्रों के लिए पर्याप्त लैब व हॉस्टल आदि संसाधनों की कमी है। इसे देखते हुए छात्रों ने वर्ष 2018 में आंदोलन किया, जिसके बाद कुछ कक्षाओं को सेटेलाइट कैंपस जयपुर शिफ्ट कर दिया गया। तब से एनआईटी दो परिसरों में संचालित हो रहा है। जबकि स्थायी परिसर का सुमाड़ी में शिलान्यास हो चुका है। फिलहाल श्रीनगर में ही अस्थायी हॉस्टल व कक्षाएं बनाई जानी थी। जो अभी तक बनी नहीं है। डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने मानव संसाधन विकास मंत्री बनने के बाद एनआईटी को श्रीनगर वापस लाने की बात की थी, लेकिन संसाधनों की कमी के चलते एनआईटी ने हाथ पीछे खींच लिए। गत 18 जून को एनआईटी की बीओजी की बैठक में इस पर चर्चा की गई। जिसमें यह सामने आया कि हॉस्टल न होने से छात्रों को दिक्कत होगी। एनआईटी के निदेशक प्रो. एसएल सोनी ने बताया कि एनआईटी के सेटेलाइट परिसर में बीटेक तृतीय एवं चतुर्थ वर्ष के 403 छात्र-छात्राएं हैं। दिसंबर तक हॉस्टल बनने की संभावना है। तब तृतीय वर्ष के छात्र-छात्राओं को श्रीनगर शिफ्ट कर दिया जाएगा। जबकि अगले सत्र तक चतुर्थ वर्ष के छात्र पास आउट हो जाएंगे, जिसके चलते अगले सत्र से कक्षाएं पूर्ण रुप से श्रीनगर से संचालित होने लगेंगी।
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वर्ष 2010 से एनआईटी श्रीनगर राजकीय पॉलीटेक्निक और आईटीआई की परिसंपत्तियों पर संचालित हो रहा है। यहां छात्रों के लिए पर्याप्त लैब व हॉस्टल आदि संसाधनों की कमी है। इसे देखते हुए छात्रों ने वर्ष 2018 में आंदोलन किया, जिसके बाद कुछ कक्षाओं को सेटेलाइट कैंपस जयपुर शिफ्ट कर दिया गया। तब से एनआईटी दो परिसरों में संचालित हो रहा है। जबकि स्थायी परिसर का सुमाड़ी में शिलान्यास हो चुका है। फिलहाल श्रीनगर में ही अस्थायी हॉस्टल व कक्षाएं बनाई जानी थी। जो अभी तक बनी नहीं है। डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने मानव संसाधन विकास मंत्री बनने के बाद एनआईटी को श्रीनगर वापस लाने की बात की थी, लेकिन संसाधनों की कमी के चलते एनआईटी ने हाथ पीछे खींच लिए। गत 18 जून को एनआईटी की बीओजी की बैठक में इस पर चर्चा की गई। जिसमें यह सामने आया कि हॉस्टल न होने से छात्रों को दिक्कत होगी। एनआईटी के निदेशक प्रो. एसएल सोनी ने बताया कि एनआईटी के सेटेलाइट परिसर में बीटेक तृतीय एवं चतुर्थ वर्ष के 403 छात्र-छात्राएं हैं। दिसंबर तक हॉस्टल बनने की संभावना है। तब तृतीय वर्ष के छात्र-छात्राओं को श्रीनगर शिफ्ट कर दिया जाएगा। जबकि अगले सत्र तक चतुर्थ वर्ष के छात्र पास आउट हो जाएंगे, जिसके चलते अगले सत्र से कक्षाएं पूर्ण रुप से श्रीनगर से संचालित होने लगेंगी।
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