फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pauri News ›   Covered Shivlinga with 40 kg ghee and offered 56 offerings.

Pauri News: 40 किलो घी से शिवलिंग को ढका, 56 भोग लगाए

Fri, 16 Feb 2024 07:31 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी Updated Fri, 16 Feb 2024 07:31 PM IST
विज्ञापन
Covered Shivlinga with 40 kg ghee and offered 56 offerings.
श्रीनगर कमलेश्वर महादेव मंदिर में घृत कमल के अवसर पर ​शिवलिंग को घी से ढकते मंहत आशुतोष पुरी --
कमलेश्वर महादेव मंदिर में हुआ घृत कमल अनुष्ठान
विज्ञापन

मंदिर के महंत ने की दिगंबर लोट परिक्रमा
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। कमलेश्वर महादेव मंदिर में घृत कमल अनुष्ठान का आयोजन हुआ। मंदिर के महंत ने दिगंबर लोट परिक्रमा भी की। इस दौरान भगवान शिव को 56 भोग भी लगाया गया। पूजा-अर्चना के बाद शिवलिंग पर लेपित घी को प्रसाद के रूप में भक्तों में वितरित किया गया। अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
बृहस्पतिवार रात करीब आठ बजे से भगवान शिव की विशेष पूजा शुरू हुई। लगभग ढाई घंटे चली पूजा के बाद शिवलिंग पर मंदिर के महंत आशुतोष पुरी ने 40 किलो घी का लेपन किया और कंबल से ढक दिया। बाद में महंत की पत्नी दीपिका पुरी की ओर से बनाए गए 56 भोग भगवान शिव को लगाए गए और आरती उतारी गई। रात लगभग 11 बजे महंत ने दिगंबर अवस्था में शरीर पर भस्म लगाकर मंदिर के चारों ओर लोट परिक्रमा कर जगत कल्याण की कामना की। परिक्रमा के बाद भंडारे का आयोजन हुआ। तड़के करीब चार बजे शिविलिंग से कंबल हटाकर घी का प्रसाद भक्तों में बांटा गया। अनुष्ठान में पंडित दुर्गा प्रसाद बमराड़ा, प्रकाश चंद, जगदीश मैठाणी, शैलेश रावत, मुकेश चमोली, गोवर्धन गिरी, दिनेश रुडेला, वासुदेव कंडारी, जितेंद्र आदि ने सहयोग किया।
विज्ञापन



--------

यह है मान्यता

कमलेश्वर महादेव के महंत आशुतोष पुरी ने बताया कि मान्यता के अनुसार देवताओं ने घृत कमल पूजा भगवान शिव के दूसरे विवाह के लिए किया था। तारकासुर राक्षस ने भगवान ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया था कि उसकी मृत्यु शिव पुत्र के हाथों हो। तारकासुर जानता था कि भगवान शिव माता सती की मृत्यु के बाद दूसरा विवाह नहीं करेंगेे। ऐसे में उनके पुत्र के जन्म की कोई संभावना नहीं थी। तारकासुर के अत्याचार से पीड़ित सभी देवता भगवती का आह्वान करते हैं और मां भगवती हिमालय पुत्री उमा (पार्वती) के रूप में जन्म लेती हैं। भगवान ब्रह्मा के कहने पर कमलेश्वर महादेव मंदिर में घृत कमल अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है और भगवान शिव शादी के लिए मान जाते हैं। भगवान शिव की शादी पार्वती से होती है और उनके पुत्र कार्तिकेय महाराज के हाथों तारकासुर राक्षस का वध होता है। देवताओं की इस पूजा को कालांतर में मंदिर के महंत माघ शुक्ल पक्ष की अचला सप्तमी के दिन जगत कल्याण के लिए करते हैं। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed