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पहाड़ों में फैल रहा वेपिंग का जहर: ई-सिगरेट के जाल में फंस रहे 20 से 30 साल के युवा

Mon, 01 Jun 2026 07:48 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी Updated Mon, 01 Jun 2026 07:48 PM IST
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aping Poison Spreads in the Mountains: Young People in Their 20s and 30s Falling Into the Trap of E-Cigarettes
सत्य प्रसाद मैठाणी
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श्रीनगर। शहर और आसपास के क्षेत्रों में ई-सिगरेट (वेपिंग) का नशा एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। आधुनिक और सुरक्षित दिखने वाले इस नए नशे ने 20 से 30 वर्ष के युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। हालात यह हैं कि श्रीकोट स्थित बेस चिकित्सालय की मनोरोग ओपीडी में हर हफ्ते चार से पांच ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां माता-पिता अपने बच्चों को इलाज के लिए लेकर पहुंच रहे हैं।
साधारण पेन या यूएसबी डिवाइस जैसी दिखने वाली ई-सिगरेट को युवा फैशन और सिगरेट का सुरक्षित विकल्प मानते हैं जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। स्थानीय निवासियों पंकज, गजेंद्र और राहुल का कहना है कि श्रीनगर के अल्केश्वर घाट, नैथाणा पुल, एनआईटी घाट और आवास विकास मैदान जैसे इलाकों में सुबह-शाम युवा अक्सर नशा करते देखे जा सकते हैं।
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बेस चिकित्सालय के मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. मोहित सैनी ने बताया कि ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि ई-सिगरेट कोई सुरक्षित विकल्प नहीं है, बल्कि यह तंबाकू और निकोटीन उद्योग का युवाओं को फंसाने का नया जाल है। इस तरल पदार्थ को गर्म करके जो भाप बनती है, उसमें निकोटीन के साथ कई हानिकारक रसायन होते हैं। यह मस्तिष्क, फेफड़ों और हृदय को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। इससे युवाओं में चिंता, अवसाद, चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी और याददाश्त कमजोर होने जैसी मानसिक समस्याएं भी बढ़ रही हैं। सरकार ने वर्ष 2019 में ही ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री और वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद अनौपचारिक बाजारों और ऑनलाइन माध्यमों से यह युवाओं तक पहुंच रहा है।
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अगर आपके बच्चे में ये बदलाव दिखें तो तुरंत ध्यान दें----
-----मुंह या कपड़ों से फलों या मिठाई जैसी कृत्रिम सुगंध आना।
-----लगातार खांसी आना, सांस फूलना या गला सूखना।
----चिड़चिड़ापन, मूड में अचानक बदलाव और रहस्यमय व्यवहार करना।
----पढ़ाई में ध्यान न लगना और कमरे में खुद को अकेले बंद रखना।
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बचाव और उपलब्ध इलाज
ई-सिगरेट को सुरक्षित न समझें। बच्चों से इस विषय पर दोस्ताना बातचीत करें और उन्हें इसके खतरों से अवगत कराएं।----बेस अस्पताल, श्रीकोट के मनोरोग विभाग में तंबाकू और निकोटीन छुड़ाने के लिए प्रमाणित इलाज उपलब्ध है।



---अस्पताल में निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (जैसे पैच और गम) और दवाओं के माध्यम से निकोटीन की तलब को कम किया जाता है।----कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग से इस लत से पूरी तरह छुटकारा पाया जा सकता है।


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इनका कहना है---
वेपिंग और ई-सिगरेट सिगरेट का कोई सुरक्षित विकल्प नहीं है। लत एक बीमारी है जिसका इलाज संभव है। अगर घर का कोई युवा इसकी चपेट में है तो शर्म या डर छोड़कर मदद लें। बेस अस्पताल में बिना किसी भेदभाव के निःशुल्क परामर्श उपलब्ध है।
डॉ. मोहित सैनी, विभागाध्यक्ष, मनोरोग विभाग, बेस चिकित्सालय श्रीकोट
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