{"_id":"13-70342","slug":"Pauri-70342-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"गाइनोकोलॉजिस्ट छुट्टी पर, कैसे हो इलाज ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गाइनोकोलॉजिस्ट छुट्टी पर, कैसे हो इलाज
Pauri
Updated Wed, 02 Oct 2013 05:39 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोटद्वार। राजकीय संयुक्त चिकित्सालय में इन दिनों गाइनोकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) के अचानक लंबी छुट्टी पर चले जाने से प्रसव कराने में दिक्कतें हो रही हैं। प्रसव में आपरेशन की नौबत आने से मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है। मजबूरी में लोग या तो अन्य शहरों में जा रहे हैं या फिर प्राइवेट चिकित्सालयों का सहारा ले रहे हैं।
राजकीय संयुक्त चिकित्सालय में तैनात गाइनोकोलॉजिस्ट डा. आभा गुप्ता बीते 13 सितंबर को छुट्टी पर चली गई थी। उसके बाद वापस नहीं आई। ऐसी स्थिति में मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को प्राइवेट चिकित्सालयों की शरण में जाना पड़ रहा है। जहां मरीजों को प्रसव आपरेशन के लिए 18 से 20 हजार रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। भाबर निवासी मदन सिंह मेहरा का कहना है कि कोटद्वार गढ़वाल का प्रवेश द्वार तो है ही महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु भी है। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी खलती है। गढ़वाल के दो तिहाई क्षेत्र की जनता चिकित्सा के मामले में कोटद्वार अस्पताल पर निर्भर है।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार चिकित्सालय में हर महीने करीब 200 से अधिक प्रसव कराए जाते हैं। इनमें करीब पंद्रह फीसदी मामलों में आपरेशन की नौबत आ जाती है। बीते अगस्त में ही अस्पताल में 264 प्रसव हुए थे। जबकि इस माह सितंबर में करीब 220 प्रसव हो चुके हैं। करीब 10 फीसदी मामले में आपरेशन करना पड़ रहा था। ऐसे में उन्हें हायर सेंटर रेफर करना पड़ा। बाहर जाने की स्थिति में न होने के कारण अधिकतर लोगों को प्राइवेट अस्पतालों की शरण लेनी पड़ी।
विज्ञापन
स्त्री रोग विशेषज्ञ के छुट्टी से वापस नहीं आने पर उनको पत्र लिखा गया था। उन्होंने एक महीने का मेडिकल भेजा है। फिलहाल आपरेशन से होने वाले प्रसव के मामलों को रेफर किया जा रहा है।
-डा. आईएस सामंत, सीएमएस
विज्ञापन
राजकीय संयुक्त चिकित्सालय में तैनात गाइनोकोलॉजिस्ट डा. आभा गुप्ता बीते 13 सितंबर को छुट्टी पर चली गई थी। उसके बाद वापस नहीं आई। ऐसी स्थिति में मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को प्राइवेट चिकित्सालयों की शरण में जाना पड़ रहा है। जहां मरीजों को प्रसव आपरेशन के लिए 18 से 20 हजार रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। भाबर निवासी मदन सिंह मेहरा का कहना है कि कोटद्वार गढ़वाल का प्रवेश द्वार तो है ही महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु भी है। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी खलती है। गढ़वाल के दो तिहाई क्षेत्र की जनता चिकित्सा के मामले में कोटद्वार अस्पताल पर निर्भर है।
विज्ञापन
अस्पताल सूत्रों के अनुसार चिकित्सालय में हर महीने करीब 200 से अधिक प्रसव कराए जाते हैं। इनमें करीब पंद्रह फीसदी मामलों में आपरेशन की नौबत आ जाती है। बीते अगस्त में ही अस्पताल में 264 प्रसव हुए थे। जबकि इस माह सितंबर में करीब 220 प्रसव हो चुके हैं। करीब 10 फीसदी मामले में आपरेशन करना पड़ रहा था। ऐसे में उन्हें हायर सेंटर रेफर करना पड़ा। बाहर जाने की स्थिति में न होने के कारण अधिकतर लोगों को प्राइवेट अस्पतालों की शरण लेनी पड़ी।
विज्ञापन
स्त्री रोग विशेषज्ञ के छुट्टी से वापस नहीं आने पर उनको पत्र लिखा गया था। उन्होंने एक महीने का मेडिकल भेजा है। फिलहाल आपरेशन से होने वाले प्रसव के मामलों को रेफर किया जा रहा है।
-डा. आईएस सामंत, सीएमएस