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सीमाओं में मौजूद गांवों को विरासत घोषित करे सरकार : गांववासी
Updated Thu, 17 Aug 2017 10:24 PM IST
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पौड़ी। भाजपा के वरिष्ठ नेता डा. मोहन सिंह रावत गांववासी ने कहा कि भारत की सीमाओं पर मौजूद गांवों को आबाद कर उन्हें विरासती गांव घोषित किया जाना राष्ट्रहित में आवश्यक है। गांव वीरान होते हैं तो पड़ोसियों की घुसपैठ बढ़ जाती है और यह राष्ट्र की सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है।
डा. मोहन सिंह रावत गांववासी ने बृहस्पतिवार को पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि वर्ष 1962 के भारत चीन युद्ध के दौरान उत्तरकाशी की सीमा से लगे नेलांग व जादुंग गांव का पुनर्वास कर दिया गया। दोनों गांवों को बगोली व हर्षिल में शिफ्ट कर दिया गया। युद्ध के बाद इन गांवों को पुन: आबाद किया जाना चाहिए था ताकि सीमावर्ती ये गांव सैनिकों का उत्साह बढ़ाने के साथ ही सीमाओं की देखरेख भी करते। एक सितंबर से गांववासी हिमालय सीमा दर्शन देवताल लोक यात्रा शुरू कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 1 सितंबर को बदरीनाथ की ध्वजा लेकर यात्रा निकलेगी और चीन सीमा से मात्र डेढ़ किमी पहले बदरीनाथ की ध्वजा फहराई जाएगी। देवताल में स्नान व पूजा अर्चना के बाद यात्री दल वापस लौट जाएगा। उन्होंने कहा कि यात्रा का मकसद सीमाओं पर तैनात जवानों की हौसला अफजाई व इस क्षेत्र के धार्मिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाना है।
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डा. मोहन सिंह रावत गांववासी ने बृहस्पतिवार को पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि वर्ष 1962 के भारत चीन युद्ध के दौरान उत्तरकाशी की सीमा से लगे नेलांग व जादुंग गांव का पुनर्वास कर दिया गया। दोनों गांवों को बगोली व हर्षिल में शिफ्ट कर दिया गया। युद्ध के बाद इन गांवों को पुन: आबाद किया जाना चाहिए था ताकि सीमावर्ती ये गांव सैनिकों का उत्साह बढ़ाने के साथ ही सीमाओं की देखरेख भी करते। एक सितंबर से गांववासी हिमालय सीमा दर्शन देवताल लोक यात्रा शुरू कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 1 सितंबर को बदरीनाथ की ध्वजा लेकर यात्रा निकलेगी और चीन सीमा से मात्र डेढ़ किमी पहले बदरीनाथ की ध्वजा फहराई जाएगी। देवताल में स्नान व पूजा अर्चना के बाद यात्री दल वापस लौट जाएगा। उन्होंने कहा कि यात्रा का मकसद सीमाओं पर तैनात जवानों की हौसला अफजाई व इस क्षेत्र के धार्मिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाना है।
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