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शिक्षा के साथ सेवा में भी जुटे देहलचौरी के प्रिंसिपल
Updated Tue, 06 Feb 2018 10:41 PM IST
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पौड़ी। सभी स्कूलों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए सरकारी मदद की जरूरत पड़ती है, लेकिन स्व. घुत्ता सिंह जीआईसी देहलचौरी के प्रधानाचार्य राजेंद्र सिंह नयाल अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत बने हैं। उन्होंने सरकार का दरवाजा खटखटाने के बजाय स्कूल के लिए अपनी तनख्वाह से शौचालय और पानी की टंकी का निर्माण करवाया।
मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर ब्लाक कोट के घुत्ता सिंह जीआईसी देहलचौरी के प्रधानाचार्य राजेंद्र सिंह नयाल को स्कूल से बेहद लगाव है। इस स्कूल में कभी शौचालय बड़ी समस्या होती थी, लेकिन प्रिंसिपल ने अपनी तनख्वाह से यहां शौचालय का निर्माण करवाया। यही नहीं, पानी की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने स्वयं ही एक हजार लीटर टैंक का निर्माण करवाया। प्रधानाचार्य क्षेत्र के लोगों के भी प्रेरणा स्रोत में बने हुए हैं और उनसे सलाह लेकर गांव वाले भी शौचालय व पानी के टैंक बनवा रहे हैं। पेयजल टैंक समेत अन्य कार्यों को वे अपने स्व. माता-पिता को समर्पित करते हैं। स्कूल में बेहतर शैक्षिक माहौल और अनुशासन उनका पहला ध्येय है। यही वजह है कि वर्ष 2016 में हाईस्कूल परीक्षा परिणाम 74 प्रतिशत रहा। यही नहीं, यदि कोई छात्र स्कूल फीस नहीं भर पाता तो प्रिसिंपल उसकी फीस भी स्वयं ही दे देते हैं। मूल रूप से खिर्सू ब्लॉक के भैंसकोट गांव निवासी आरएस नयाल बताते हैं कि उन्होंने अपना बचपन बहुत कठिनाइयों में गुजारा है। नौ साल की उम्र में पिता और 12 वर्ष की उम्र में मां की मृत्यु के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। गरीब के दर्द को समझते हुए नयाल पूरी शिद्दत से स्कूल की सेवा में जुटे हैं। प्रधानाचार्य नयाल के अनुसार छह माह बाद अगस्त में उनका रिटायरमेंट है, लेकिन इस बीच उन्हें सेवा विस्तार मिल गया तो वह स्कूल में चाहरदीवारी लगाकर खाली जगह पर फलदार पौधे लगाना चाहते हैं।
मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर ब्लाक कोट के घुत्ता सिंह जीआईसी देहलचौरी के प्रधानाचार्य राजेंद्र सिंह नयाल को स्कूल से बेहद लगाव है। इस स्कूल में कभी शौचालय बड़ी समस्या होती थी, लेकिन प्रिंसिपल ने अपनी तनख्वाह से यहां शौचालय का निर्माण करवाया। यही नहीं, पानी की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने स्वयं ही एक हजार लीटर टैंक का निर्माण करवाया। प्रधानाचार्य क्षेत्र के लोगों के भी प्रेरणा स्रोत में बने हुए हैं और उनसे सलाह लेकर गांव वाले भी शौचालय व पानी के टैंक बनवा रहे हैं। पेयजल टैंक समेत अन्य कार्यों को वे अपने स्व. माता-पिता को समर्पित करते हैं। स्कूल में बेहतर शैक्षिक माहौल और अनुशासन उनका पहला ध्येय है। यही वजह है कि वर्ष 2016 में हाईस्कूल परीक्षा परिणाम 74 प्रतिशत रहा। यही नहीं, यदि कोई छात्र स्कूल फीस नहीं भर पाता तो प्रिसिंपल उसकी फीस भी स्वयं ही दे देते हैं। मूल रूप से खिर्सू ब्लॉक के भैंसकोट गांव निवासी आरएस नयाल बताते हैं कि उन्होंने अपना बचपन बहुत कठिनाइयों में गुजारा है। नौ साल की उम्र में पिता और 12 वर्ष की उम्र में मां की मृत्यु के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। गरीब के दर्द को समझते हुए नयाल पूरी शिद्दत से स्कूल की सेवा में जुटे हैं। प्रधानाचार्य नयाल के अनुसार छह माह बाद अगस्त में उनका रिटायरमेंट है, लेकिन इस बीच उन्हें सेवा विस्तार मिल गया तो वह स्कूल में चाहरदीवारी लगाकर खाली जगह पर फलदार पौधे लगाना चाहते हैं।
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