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मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग जूनियर और प्रशिक्षु डॉक्टरों के भरोसे
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श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में इन दिनों एक भी विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं है। क्योंकि विभाग के एकमात्र विशेषज्ञ चिकित्सक/ एसआर (सीनियर रेजीडेंट) डॉक्टर अवकाश पर चल रहे हैं। ऐसे में जूनियर रेजीडेंट (जेआर)/एमबीबीएस डॉक्टर और प्रशिक्षु डॉक्टर नेत्र रोगियों का परीक्षण कर रहे हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में दूरदराज से प्रतिदिन 100 से ऊपर नेत्र रोगी जांच के लिए पहुंचते हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि मेडिकल कॉलेज में उनका बेहतर स्वास्थ्य परीक्षण होगा, लेकिन यहां ऐसा नहीं है। यदि यहां के नेत्र रोग विभाग की बात करें, तो यहां एक भी संकाय सदस्य (शिक्षक) नहीं है। प्रभारी विभागाध्यक्ष/सहायक प्रोफेसर डा. अच्युत नारायण पांडेय विगत 27 अप्रैल को यहां से अन्यत्र चले गए, जिसके चलते विशेषज्ञ चिकित्सक के नाम पर यहां सिर्फ एसआर ही शेष रह गए। वह भी 20 जून तक अवकाश पर हैं। ऐसी स्थितियों में जेआर व इंटर्न डॉक्टर मरीजों का परीक्षण कर रहे हैं, जबकि एमसीआई की गाइड लाइन के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सक के सुपरविजन में जूनियर डॉक्टर काम करते हैं। प्राचार्य प्रो. सीएस रावत का कहना है कि एसआर के अवकाश से लौटने के बाद स्थिति में सुधार होगा। गत 8 जून को संकाय सदस्य के लिए इंटरव्यू हुए हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में दूरदराज से प्रतिदिन 100 से ऊपर नेत्र रोगी जांच के लिए पहुंचते हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि मेडिकल कॉलेज में उनका बेहतर स्वास्थ्य परीक्षण होगा, लेकिन यहां ऐसा नहीं है। यदि यहां के नेत्र रोग विभाग की बात करें, तो यहां एक भी संकाय सदस्य (शिक्षक) नहीं है। प्रभारी विभागाध्यक्ष/सहायक प्रोफेसर डा. अच्युत नारायण पांडेय विगत 27 अप्रैल को यहां से अन्यत्र चले गए, जिसके चलते विशेषज्ञ चिकित्सक के नाम पर यहां सिर्फ एसआर ही शेष रह गए। वह भी 20 जून तक अवकाश पर हैं। ऐसी स्थितियों में जेआर व इंटर्न डॉक्टर मरीजों का परीक्षण कर रहे हैं, जबकि एमसीआई की गाइड लाइन के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सक के सुपरविजन में जूनियर डॉक्टर काम करते हैं। प्राचार्य प्रो. सीएस रावत का कहना है कि एसआर के अवकाश से लौटने के बाद स्थिति में सुधार होगा। गत 8 जून को संकाय सदस्य के लिए इंटरव्यू हुए हैं।
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