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त्याग और बलिदान की याद दिला गया माधो सिंह भंडारी स्मृति एवं विकास मेला
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श्रीनगर। विकासखंड कीर्तिनगर के मलेथा गांव में वीर शिरोमणी माधो सिंह भंडारी को याद किया गया। स्थानीय कलाकारों ने माधो सिंह भंडारी के त्याग और बलिदान पर आधारित घटनाओं का मंचन कर दर्शकों को भाव विभोर किया।
वीर शिरोमणी माधो सिंह भंडारी विकास एवं स्मृति मेले का बुधवार को समापन हो गया। मेले के अंतिम दिन एडीएम अनुराधा पाल (आईएएस) ने दीप प्रज्जवलित कर नृत्य नाटिका का शुभारंभ किया। इस मौके पर एडीएम ने कहा कि माधो सिंह भंडारी का स्मारक व उनके द्वारा बनाई गई गूल एवं सुरंग ऐतिहासिक धरोहर है। जोकि आज भी लोगों को माधो सिंह के त्याग और बलिदान की याद दिलाता है। उन्होंने मेले को भव्य रूप दिए जाने के लिए यूथ क्लब को पंजीकरण करवाने को कहा है। इसके बाद शुरू हुई नृत्य नाटिका के प्रथम दृश्य में तिब्बत की लड़ाई में राजा महिपत शाह की ओर से वीरभड़ माधो सिंह भंडारी को लड़ाई में जाने का हुक्म दिया गया। माधो सिंह सेना के साथ तिब्बत की ओर कूच करते है। लड़ाई में विजय हासिल करने के बाद माधो सिंह भंडारी और उदीना का विवाह हो जाता है। बारात के गांव पहुंचने पर माधो सिंह व उदीना का स्थानीय लोगों की ओर से भव्य स्वागत किया गया। अंतिम दृश्य में मलेथा की उसर भूमि की सिंचाई के लिए बनाई गई गूल व सुरंग पर पानी न चलने पर माधो सिंह चिंतित हो जाते है। उसी रात को उसे स्वप्न में देवी पुत्र का बलिदान करने को कहती है। माधो सिंह अपने पुत्र वीर सिंह को अपने साथ ले जाते है और सुरंग के बाहर वीर सिंह का बलिदान कर देते है। इसके बाद पानी गूल व सुरंग से होकर खेतों की प्यास बुझाता है। समापन अवसर पर यूथ क्लब की ओर से नृत्य नाटिका के सभी कलाकारों व सहयोगियों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर प्रधान शूरवीर सिंह बिष्ट, मेला समिति के अध्यक्ष विजय सिंह, सत्यानारायण सेमवाल, माधोसिंह भंडारी की भूमिका में विकास बैजवाड़ी, उदीना-रूबी मुंडोला, गुरूमाणिक नाथ-प्ररेणा बिष्ट, राजराजेश्वरी-संध्या बंगारी, महिपत शाह-प्रवीन गुसांई, वीर सिंह-रेणुका बिष्ट व ढोल दमाऊ वादक कमलदास, सुरेश व दीपक आदि मौजूद थे।
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वीर शिरोमणी माधो सिंह भंडारी विकास एवं स्मृति मेले का बुधवार को समापन हो गया। मेले के अंतिम दिन एडीएम अनुराधा पाल (आईएएस) ने दीप प्रज्जवलित कर नृत्य नाटिका का शुभारंभ किया। इस मौके पर एडीएम ने कहा कि माधो सिंह भंडारी का स्मारक व उनके द्वारा बनाई गई गूल एवं सुरंग ऐतिहासिक धरोहर है। जोकि आज भी लोगों को माधो सिंह के त्याग और बलिदान की याद दिलाता है। उन्होंने मेले को भव्य रूप दिए जाने के लिए यूथ क्लब को पंजीकरण करवाने को कहा है। इसके बाद शुरू हुई नृत्य नाटिका के प्रथम दृश्य में तिब्बत की लड़ाई में राजा महिपत शाह की ओर से वीरभड़ माधो सिंह भंडारी को लड़ाई में जाने का हुक्म दिया गया। माधो सिंह सेना के साथ तिब्बत की ओर कूच करते है। लड़ाई में विजय हासिल करने के बाद माधो सिंह भंडारी और उदीना का विवाह हो जाता है। बारात के गांव पहुंचने पर माधो सिंह व उदीना का स्थानीय लोगों की ओर से भव्य स्वागत किया गया। अंतिम दृश्य में मलेथा की उसर भूमि की सिंचाई के लिए बनाई गई गूल व सुरंग पर पानी न चलने पर माधो सिंह चिंतित हो जाते है। उसी रात को उसे स्वप्न में देवी पुत्र का बलिदान करने को कहती है। माधो सिंह अपने पुत्र वीर सिंह को अपने साथ ले जाते है और सुरंग के बाहर वीर सिंह का बलिदान कर देते है। इसके बाद पानी गूल व सुरंग से होकर खेतों की प्यास बुझाता है। समापन अवसर पर यूथ क्लब की ओर से नृत्य नाटिका के सभी कलाकारों व सहयोगियों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर प्रधान शूरवीर सिंह बिष्ट, मेला समिति के अध्यक्ष विजय सिंह, सत्यानारायण सेमवाल, माधोसिंह भंडारी की भूमिका में विकास बैजवाड़ी, उदीना-रूबी मुंडोला, गुरूमाणिक नाथ-प्ररेणा बिष्ट, राजराजेश्वरी-संध्या बंगारी, महिपत शाह-प्रवीन गुसांई, वीर सिंह-रेणुका बिष्ट व ढोल दमाऊ वादक कमलदास, सुरेश व दीपक आदि मौजूद थे।
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