महामहिम की नजर में मलाईदार पोस्टिंग पर जमे हाकिम
- पहाड़ से परहेज कर मैदान में नौकरी पूरी कर रहे अफसरों की सूची तैयार
- जल्द सरकार का गठन नहीं हुआ तो नौकरशाही में होगा बड़ा फेरबदल
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बहुत पद रिक्त पड़े हैं। शत्रुघ्न सिंह के मुख्य सचिव बनने के बाद अवस्थापना विकास आयुक्त और एस राजू के रिटायर होने के बाद समाज कल्याण आयुक्त के साथ ही पेयजल एवं स्वच्छता, विद्यालयी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के पद रिक्त हैं।
एफआरडीसी कैडर पोस्ट है और रिटायरमेंट के बाद उस पर एस राजू की पुनर्नियुक्ति पर सवाल उठ रहे हैं। आबकारी विभाग में पांच साल पहले एक पाली खेल चुके अपर मुख्य सचिव डा. रणबीर सिंह डेढ़ साल से फिर इसी महकमे को संभाल रहे है। कृषि, डेयरी, मत्स्य विभाग में भी उनका कार्यकाल जरूरत से ज्यादा हो गया है।
आठ साल से निर्वाचन विभाग संभाल रही राधा रतूड़ी
प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी पिछले आठ साल से निर्वाचन विभाग संभाल रही है। दो साल से भी ज्यादा समय से उमाकांत पंवार ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव है। आनंद बर्द्धन जबसे राजभवन गए, तब से सिंचाई व लघु सिंचाई विभाग का कोई खैरखाह नहीं है।
मुख्यमंत्री के सचिव व पीडब्लूडी, शहरी विकास, राजस्व व वित्त जैसे भारी भरकम महकमों के सचिव डीएस गर्ब्यालय के साथ ही आपदा प्रबंधन, वित्त, नागरिक उड्डयन जैसे महकमों के सचिव अमित सिंह नेगी भी हैवीवेट है।
इनकी पोस्टिंग में है तकनीकी खामी
सीएस नपलच्याल दो साल से ज्यादा समय से गढ़वाल कमिश्नर जैसे महत्वपूर्ण पद के साथ ही परिवहन आयुक्त, शासन में परिवहन व राज्य संपत्ति के सचिव है। इनकी पोस्टिंग में तकनीकी खामी है।
मंडलायुक्त क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण के अध्यक्ष होते है, उनकी अपीलीय अथॉरिटी राज्य परिवहन प्राधिकरण के चेयरमैन व परिवहन आयुक्त होते है, दोनों ही पद इन्हीं के पास है। यह अपने फैसलों की अपील खुद ही सुनते है।
लंबे समय से एक ही जगह टिके हुए अधिकारी
आर मीनाक्षी सुंदरम पिछले चार साल से वीसी एमडीडीए है। स्मार्ट सिटी के नोडल अफसर होने के साथ ही राज्य शहरी विकास प्राधिकरण के एमडी भी है, शासन में आवास विभाग का सचिव होने के चलते वीसी एमडीडीए की अपनी ही अपील सुनते है।
कमिश्नर कुमाऊं अवनेंद्र सिंह नयाल ने अभी तक की नौकरी कुमाऊं में ही काट ली। उनकी कई बार शासन में तैनाती हुई, लेकिन वह नहीं आए।
पुलिस विभाग में आईजी गढ़वाल संजय गुंज्याल को दो साल हो चुके है, वह इससे पहले भी गढ़वाल के डीआईजी रह चुके है, उनके पास एंटी माइनिंग फोर्स, एसआईटी, एसडीआरएफ के चार्ज भी है।
पिछली बार तत्कालीन डीजीपी सत्यव्रत बंसल की गोपनीय रिपोर्ट के बाद हटाए गए आईपीएस अनंत शंकर ताकवाले फिर ऊधमसिंह नगर ही पहुंच गए। बागेश्वर के डीएम भूपाल सिंह मनराल, रुद्रप्रयाग के डीएम राघव लंगेर, चंपावत के डीएम दीपेंद्र चौधरी, पौड़ी के डीएम सीएस भट्ट को तीन-तीन साल हो गए।
छोटे अफसर भी बड़ों से कम नहीं
हरीश रावत सरकार में प्रभावशाली अफसरों में रहे केएमवीएन के एमडी धीराज सिंह गर्ब्याल के पास निदेशक मंडी और अपर आयुक्त कुमाऊं मंडल की जिम्मेदारी भी है। इन्हें कोई टस से मस नहीं कर सका।
पीसीएस बंशीधर तिवारी राज्य शहरी विकास प्राधिकरण के संयुक्त एमडी है, थोड़े दिन के लिए एडीएम पौड़ी गए लेकिन मन नहीं लगा, फिर वापस आ गए। पौड़ी जाने से पहले तीन साल एमडीडीए में सचिव रहे।
इन्हें आर मीनाक्षी सुंदरम का खास माना जाता है। एडीएम देहरादून झरना कमठान ने अभी तक की नौकरी में तीन चौथाई हिस्सा देहरादून में ही काट लिया। ऐसे कई पीसीएस है जो पहाड़ में नाम मात्र के लिए गए और दो चार महीने बाद फिर नीचे आ गए।