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राष्ट्रीय राजमार्ग-72 पर तकलीफों का सफर 'लाइव'

Wed, 27 Apr 2016 10:20 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 27 Apr 2016 10:20 AM IST
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notice on making national highway-72 in uttarakhand
राष्ट्रीय राजमार्ग -72 - फोटो : sanjay negi

मोहकमपुर (देहरादून) से हरिद्वार तक आधे-अधूरे बने राष्ट्रीय राजमार्ग-72 पर यात्रियों को परेशानी भरा सफर अभी झेलना होगा।

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बीओटी बेसिस पर बनने वाले इस एनएच का निर्माण करने वाले डेवलपर्स ईरा इंफ्रा इंजीनियरिंग को खराब प्रदर्शन के चलते न केवल नोटिस दिया जा चुका है, बल्कि एनएचआई के अध्यक्ष राघव चंद्रा ने  उसके इस प्रोजेक्ट को रद्द करने की घोषणा भी कर दी है। यानि अब यह काम अब कोई और कंपनी या एनएचआई खुद करेगी। मतलब साफ है कि मामला अभी और लटकेगा।
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नए हालात के मद्देनजर अमर उजाला के मुख्य संवाददाता रजा शास्त्री और फोटो जर्नलिस्ट संजीव नेगी  ने मंगलवार को मोहकमपुर देहरादून से हरिद्वार तक का सफर किया। जिस फोरलेन हाइवे को  तीन साल पहले ही तैयार हो जाना था, वहां फरवरी से काम बंद पड़ा है। पूरा रूट खुदा हुआ है, न कहीं रेलिंग लगाई है और न ही सड़क किनारे पेवमेंट बने हैं। सड़कों के गड्ढे जानलेवा हो गए हैं। पुलों के नीचे दोनों तरफ की सर्विस लेन गायब है।
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जो पुराने पुल थे वह और खस्ताहाल हो गए हैं।  वन्य जीवों के लिए बनाए गए गलियारे टूट गए हैं, इन पर ग्रीन फ्लाई ओवर आधे-अधूरे हैं। तय नहीं है कि यह प्रोजेक्ट कब पूरा होगा ? मंगलवार टीम जो कुछ देखा और महसूस किया, वह हुबहू पेश किया जा रहा है, ताकि आप भी जान सकें कि इस हाइवे पर अभी फजीहत से बचने की कोई सूरत नहीं है। पेश है, एनएच-72 पर यात्रा की लाइव रिपोर्ट...

मंगलवार सुबह 11 बजकर 7 मिनट
हम रेलवे फाटक मोहकमपुर से एनएच-72 पर चल पड़े। शुरुआत में ही एनएच के मानक लापता हैं। हरित पट्टिका और रेलिंग गायब है। सड़क का किनारा नहीं बना। किनारे गड्ढे हैं जो जरा सा बैलेंस बिगड़ने पर हाथ-पैर तोड़ दे। गिट्टी बिखरी है इंडियन इंस्टीट्यूट आफ पेट्रोलियम के सामने अभी-अभी दौड़ता आ रहा एक बच्चा गिट्टी पर फिसल कर गिरा है। सड़क के बीच में गड्ढे हैं जिन्हें वाहन चालक बचाकर निकल रहे हैं।

संतोषनगर, कुआंवाला के दो पुल अधूरे पड़े हैं। सरिए निकले हुए हैं। फोरलेन हाईवे यहां टू लेन ही है। डोईवाला के पुल पर रेलिंग टूटी हुई है। अगर जरा सा वाहन फिसला तो सीधे नीचे जाकर गिरेगा। परियोजना के मुताबिक इसी पुल के नीचे डोईवाला बाईपास आकर मिलेगा। बाईपास पर अभी तक कुछ काम नहीं हुआ है।

हम डोईवाला होकर जब इस बाईपास की दूसरी तरफ पहुंचे तो देखते हैं कि ओवरब्रिज अधूरा ही बना है। सड़क की बुनियाद नहीं पड़ी। दो-चार किमी जहां फोरलेन मिली है वहां रेलिंग ही नहीं थी। बीच में हरित पट्टिका गायब। डोईवाला के आगे सड़क के बीचों-बीच गड्ढे ही गड्ढे हैं, गिट्टयां बाइक सवारों के लिए मुसीबत बनी हैं। मार्ग अभी टू लेन ही है। कुछ जगहों पर लगता है कि मिट्टी खरबोट कर दूसरी टू लेन की निशानदेही कर दी गई।

यह हाल तब है जब प्रोजेक्ट को बने छह साल हो गए हैं। हर एक किमी पर ‘डायवर्जन’ और ‘काम प्रगति पर है’ का बोर्ड नजर आता है, लेकिन काम कहीं दिख नहीं रहा। हम रेशम माजरी पहुंच गए। खुदी हुई सड़क से बेतहाशा धूल उड़ रही है। यहां दो छोटी पुलियों का काम आधा ही हुआ है। माजरी ग्रांट के पास बड़ा पुल है, इसका भी काम अधूरा पड़ा है।

दून स्कालर्स स्कूल के ठीक सामने अधूरी पुलिया बनी है। लालतप्पड़ क्षेत्र में सड़क के दोनों किनारे औद्योगिक और व्यावसायिक संस्थानों का सिलसिला शुरू होता है। आगे ग्रीन फ्लाई ओवर हाथी पुल है। यहां डायवर्जन का बोर्ड गिरा हुआ है। यहां कुछ लोग खड़े हैं, बताते हैं कि कल रात यहां हादसा हुआ था। कार चालक कुछ समझ नहीं सका और सर्विस रोड के बजाए नीचे उतर गया। ‘घायल पता नहीं बचे कि मरे’ कहकर वे चुप हो जाते हैं।


छिद्दरवाला में पांच किमी तक फोरलेन रोड तो है, लेकिन कट हैं और न ही रेलिंग। सड़क के किनारों को भी नहीं बनाया। यहां आए दिन हादसे होते हैं। यहां की सारी पुलिया आधी बनी हुईं और आगे तीन पानी का पुल है। यहां भी एक लंबे ग्रीन फ्लाई ओवर के खंभे ठूंठ की तरह मुंह चिढ़ा रहे हैं। इसे बनाने के चक्कर में पुराना पुल क्षतिग्रस्त हो गया। इसी पर से वाहन गुजर रहे हैं। हर वाहन के गुजरने पर धूल का गुबार उठता है। नेपाली फार्म आ गया है। यहां रोड पर एक तरफ की ही लेन काम कर रही है। पुराना पुल टूट गया है और नया अभी बना नहीं है। यहां सिंगल रोड पर यातायात चल रहा है।

यहां से ‘अमर उजाला टीम’ हरिद्वार की तरफ मुड़ गई। रायवाला में फिर सिंगल रोड हो गई। रेलवे फाटक पर सड़क पर धूल पटी है। आगे पुराना पुल टूट गया है। यहां लंबा जाम लगा है। मोतीचूर पर सुसवा नदी का पुल अधूरा पड़ा हुआ है। खंभे अपनी हालत पर रो रहे हैं। टीम को 39 किमी लंबे एनएच-72 हाईवे में मुश्किल से 9 किमी ही फोरलेन नजर आई। उसमें भी फोरलेन मानकों का कहीं अता-पता नहीं है। 

राष्ट्रीय राजमार्ग-72
बजट- 528.45 करोड़
रिवाइज बजट- 796.50 करोड़
लंबाई- 39.025 किमी
प्रस्तावित- 36.52 किमी
बड़े पुल- मोतीचूर, सुसवा नदी, सौंग नदी पर दो, जाखन नदी
छोटे पुल- तीन पानी, लक्ष्मण नाला, दुल्हनी नाला
पुलिया-153
डायवर्जन - 25 स्थानों पर
बस शेल्टर- भानियावाला, जीवनावाला, माजरी ग्रांट, लालतप्पड़, छिद्दरवाला, नेपाली फार्म
ट्रक ले बाई- एक लच्छीवाला में

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