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ब्रांडिंग के लिए रामदेव के नेटवर्क का इस्तेमाल करेंगे मोदी
हरिद्वार/ब्यूरो
Updated Sat, 27 Apr 2013 12:19 AM IST
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गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी बाबा रामदेव का साथ पाकर गदगद हैं। उन्हें अपनी ब्रांडिंग करने के लिए रामदेव का देशभर में फैला नेटवर्क मिल गया है। इस नेटवर्क का मोदी भलीभांति उपयोग कर सकेंगे।
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देश और दुनिया के फलक पर छा जाने को तैयार मोदी अपनी ब्रांडिंग का हर तरीका ढूंढते दिखते हैं। शुक्रवार को हरिद्वार में बाबा रामदेव के कार्यक्रम में पहुंचे मोदी वहां मौजूद भीड़ को देखते ही रह गए।
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मोदी भीड़ का मूड भांपने की कोशिश करते भी दिखे। बोलने खड़े हुए और जनता का उत्साह देखा तो मोदी ने खुद को उनके साथ जोड़ने का प्रयास किया। दिल्ली के रामलीला मैदान में बाबा रामदेव के कार्यक्रम में हुए लाठीचार्ज का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों एक ही पीड़ा झेल रहे हैं। दोनों पर दिल्ली सरकार आए दिन नए-नए जुर्म लगाती रहती है।
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बाबा रामदेव के साथ अपनी समानता का जिक्र और रामलीला मैदान में पुलिस बर्बरता का शिकार हुई उनकी समर्थक राजबाला का जिक्र कर जनभावना से तादात्म्य स्थापित करने का प्रयास किया।
मोदी की कोशिश अब बाबा रामदेव के नेटवर्क का उपयोग करने की है। रामदेव भी इसके लिए तैयार दिखते हैं। मंच पर जिस तरह से रामदेव ने मोदी की तारीफ के पुल बांधे और उन्हें ईश्वर का दूत साबित करने का प्रयास किया, इससे भी उनकी मंशा साफ दिखती है।
दिल्ली में दरिंदगी पर आहत दिखे
दिल्ली में पैरामेडिकल छात्रा से गैंगरेप और फिर मुनिया से दरिंदगी पर संतों के साथ-साथ नरेंद्र मोदी आहत नजर आए। इन दुखद घटनाओं पर संतों ने भी केंद्र सरकार को बार-बार कोसा।
अपने भाषण में मोदी ने वैसे तो एक भी बार केंद्र सरकार का नाम नहीं लिया। लेकिन दिल्ली में दरिंदगी की इन दो घटनाओं पर उनकी पीड़ा झलकी। इन कांडों के लिए उन्होंने केंद्र को दोषी भी ठहराया।
अध्यात्म और इतिहास से मिली प्रेरणा
मोदी ने कहा देश के कुंभ मेलों से उन्हें विशेष प्रेम है। ऐसा कोई कुंभ नहीं जिस पर वे स्नान करने न गए हों। यह संयोग रहा कि चाहकर भी इस बार वह प्रयाग कुंभ नहाने के लिए नहीं जा पाए। तब से उनके मन में एक मलाल चल रहा था। संतों के सानिध्य में आज गंगातट पर आकर उनका वह मलाल धुल गया। एक बेचैनी अवश्य पैदा हुई कि हमेशा संतों के चरणों में बैठने वाले को संतों के बीच मंच पर बैठना पड़ा।
मोदी ने कहा कि हरिद्वार आकर उन्हें नई प्रेरणा मिली। यहां से प्रसाद के रूप में कुछ ऐसे पुष्प लेकर जा रहे हैं जो जीवनभर उनके काम आएंगे।
कुछ लोगों ने कार्यक्रम में आने से रोका था: पंड्या
कार्यक्रम में पहुंचे शांतिकुंज एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रमुख प्रणव पंड्या ने बड़ी साफगोई से बताया कि उन्हें कुछ लोगों ने कार्यक्रम में आने से रोका था। रोकने वालों ने तर्क दिया कि इन दिनों बाबा रामदेव सरकार के निशाने पर हैं। कार्यक्रम में जाने पर वे भी निशाने पर आ जाएंगे। लेकिन वे नहीं माने और कार्यक्रम में शामिल हुए। पंड्या ने बताया कि वे और नरेंद्र मोदी दोनों एक ही शहर में पैदा हुए।
कुर्सी की भी पूछ लें रुचि: रमेश भाई ओझा
देश के प्रसिद्ध कथा व्यास रमेश भाई ओझा ने नरेंद्र मोदी को देश की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि वस्तुत: देश की सत्ता और देश की सर्वोच्च कुर्सी से भी उनकी रुचि पूछी जानी चाहिए। आवश्यकता इस बात की है कि पहले कुर्सी से पूछा जाए कि उस पर जो लोग बैठे हैं क्या वह उन्हें अपने पर बैठाना चाहती है। जाहिर है नहीं। कुर्सी और देश की सत्ता को मोदी जैसे काम करने वाले व्यक्ति की आवश्यकता है।
और क्रांति का बीज बांट आए रामदेव: मोरारी बापू
संत मोरारी बापू ने कहा कि रामदेव उग्र नहीं अपितु व्यग्र संत हैं। युवा संतों में व्यग्रता बुरी बात नहीं है। व्यग्रता ही देश को आगे बढ़ाती है और क्रांति कराती है। रामदेव योग का बीज लेकर आश्रम से निकले थे और क्रांति का बीज बांट आए। वास्तव में देश की जो दुर्दशा हुई है उसके चलते एक नई क्रांति अब होनी ही है। उन्होंने रामदेव और नरेंद्र मोदी की ओर इशारा करते हुए कहा कि दोनों के माध्यम से यह देश बहुत आगे बढ़ जाएगा।
क्यों अकेले आए मोदी
यह प्रश्न पूछा जा रहा था जब पूरे समारोह में देशभर के संतों को बुलाया गया तब एक मात्र राजनीतिज्ञ मोदी को क्यों बुला लिया गया। इसका उत्तर मुनि चिदानंद ने मंच से दिया।
उन्होंने कहा कि मोदी कोई मेडल नहीं अपितु मॉडल हैं। मोदी के इस मॉडल को देश की जनता भी पसंद कर रही है और भगवाधारी संतों की जमात भी। यही वजह है कि सभी प्रमुख संतों ने मोदी को सुनने की इच्छा जताई। फलस्वरूप अन्य राजनीतिज्ञों को आयोजन में नहीं बुलाया गया।
अन्य धर्मों के संतों से कर लिया किनारा
बाबा रामदेव के सभी आयोजनों में बौद्ध, जैन, ईसाई और मुस्लिम धर्म गुरुओं को भी बुलाया जाता रहा है। लेकिन शुक्रवार को नरेंद्र मोदी आए थे अत: हिंदू धर्म के अलावा और किसी भी मजहब के गुरु को आमंत्रित नहीं किया गया।
दिलचस्प बात यह है कि भाजपा के मुख्यमंत्री के सामने बाबा जहां खुद को हिंदू जताना चाहते थे वहीं मोदी ने स्वयं को सेक्यूलर बताकर साबित किया कि वे किसी एक मजहब के नेता नहीं हैं।