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जीएसटी लागू होने के बाद उत्तराखंड को करोड़ों के राजस्व का नुकसान: यशपाल
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नैनीताल। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा है कि देश में जीएसटी लागू होने के बाद सभी राज्यों को राजस्व संग्रह में नुकसान हुआ है। कहा कि यदि जल्द जीएसटी से मिलने वाले राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी नहीं बढ़ाई गई या फिर केंद्र सरकार राज्यों को मिलने वाली जीएसटी प्रतिपूर्ति नहीं करती तो आने वाले समय में उत्तराखंड जैसे छोटे राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर होने से कोई रोक नहीं सकता।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य की भाजपा सरकार केंद्र के समक्ष जीएसटी से होने वाले नुकसान का जिक्र तो करती है लेकिन न तो इसका खुलकर विरोध करती है और न ही इसके पुनर्गठन की मांग। कहा कि राज्य निर्माण के समय राज्य का कर आधारित राजस्व 322 करोड़ रुपये था, जो जीएसटी लागू होने से पहले राज्य के लोगों, कर्मचारियों और अधिकारियों की मेहनत से वर्ष 2016-17 में 31 गुणा बढ़कर 7143 करोड़ रुपये हुआ। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के आंकड़े ही बता रहे हैं कि स्टेट जीएसटी के सेटलमेंट के बाद वर्ष 2017-18 में संरक्षित राजस्व 44 प्रतिशत घटा था, जो आने वाले सालों में 51 प्रतिशत तक कम रहेगा। वर्ष 2021-22 में यह 45 प्रतिशत कम रहा है। आर्य ने कहा कि यह हजारों करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को वैट समाप्त करने के कारण पहले की तुलना में 34.5 प्रतिशत राजस्व का नुकसान हो रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर यह नुकसान केवल आठ प्रतिशत का है लेकिन नुकसान करोड़ों में है। आर्य ने साफ किया कि यदि केंद्र सरकार ने सीमित संसाधनों वाले उत्तराखंड राज्य के प्रति उदार रुख नहीं दिखाया तो अगले पांच साल में उत्तराखंड को 25 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
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नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य की भाजपा सरकार केंद्र के समक्ष जीएसटी से होने वाले नुकसान का जिक्र तो करती है लेकिन न तो इसका खुलकर विरोध करती है और न ही इसके पुनर्गठन की मांग। कहा कि राज्य निर्माण के समय राज्य का कर आधारित राजस्व 322 करोड़ रुपये था, जो जीएसटी लागू होने से पहले राज्य के लोगों, कर्मचारियों और अधिकारियों की मेहनत से वर्ष 2016-17 में 31 गुणा बढ़कर 7143 करोड़ रुपये हुआ। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के आंकड़े ही बता रहे हैं कि स्टेट जीएसटी के सेटलमेंट के बाद वर्ष 2017-18 में संरक्षित राजस्व 44 प्रतिशत घटा था, जो आने वाले सालों में 51 प्रतिशत तक कम रहेगा। वर्ष 2021-22 में यह 45 प्रतिशत कम रहा है। आर्य ने कहा कि यह हजारों करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान है।
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उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को वैट समाप्त करने के कारण पहले की तुलना में 34.5 प्रतिशत राजस्व का नुकसान हो रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर यह नुकसान केवल आठ प्रतिशत का है लेकिन नुकसान करोड़ों में है। आर्य ने साफ किया कि यदि केंद्र सरकार ने सीमित संसाधनों वाले उत्तराखंड राज्य के प्रति उदार रुख नहीं दिखाया तो अगले पांच साल में उत्तराखंड को 25 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
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