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12 सालों से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बन रही जल विद्युत परियोजनाओं को अब नहीं बना सका उरेडा
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पिथौरागढ़। चीन और नेपाल जहां भारतीय सीमा से सटे गांवों का तेजी से विकास कर रहे हैं, वहीं अपने यहां 12 वर्ष बाद भी जल विद्युत परियोजनाओं की रफ्तार धीमी है। तिब्बत में चीन पहले ही बिजली, पानी, सड़क-संचार सुविधाएं पहुंचा चुका है। नेपाल भी भारतीय सीमा से सटे अपने गांवों में तेजी से विकास कर रहा है।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित बूंदी गांव में करीब एक करोड़ 55 लाख 30 हजार की लागत से 50 किलोवाट की जल विद्युत परियोजना का कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
इन कार्यों की रफ्तार भी सुस्त
-रांगकांग गांव में करीब दो करोड़ तीन लाख की लागत से बन रही 50 किलोवाट जल विद्युत परियोजना का कार्य 10 सालों में सिर्फ 75 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। यहां सिविल वर्क पूरा करने के बाद मशीन स्थापित करने का कार्य किया जा रहा है।
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-नागलिंग में 150.23 लाख की लागत से बन रही 25 किलोवाट जल विद्युत परियोजना का कार्य भी अधूरा है।
भारत के अंतिम गांव कुटी में 60 प्रतिशत काम पूरा
पिथौरागढ़। चीन सीमा से लगे भारत के अंतिम गांव कुटी के लिए बन रही 50 किलोवाट जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य 60 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। हालांकि परियोजना से जुड़ा सामान धारचूला पहुंच गया है। संवाद
सोलर पैनल से उजाला करने के लिए मजबूर हैं लोग
पिथौरागढ़। चीन और नेपाल सीमा से लगे गांवों के लोग अपने घरों में सोलर पैनल से उजाला करने के लिए मजबूर हैं। मौसम खराब होने के कारण सोलर पैनल से जुड़ीं बैट्रियां चार्ज नहीं हो पातीं हैं जिससे लोगों को अंधेरे में रात गुजारनी पड़ती है।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बनाई जा रही जल विद्युत परियोजनाओं के शेष कार्यों को पूरा किया जा रहा है। उच्च हिमालयी गांवों में सामान पहुंचाना चुनौती है। -एमएस रावत, परियोजना अधिकारी, उरेडा पिथौरागढ़।
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उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित बूंदी गांव में करीब एक करोड़ 55 लाख 30 हजार की लागत से 50 किलोवाट की जल विद्युत परियोजना का कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
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इन कार्यों की रफ्तार भी सुस्त
-रांगकांग गांव में करीब दो करोड़ तीन लाख की लागत से बन रही 50 किलोवाट जल विद्युत परियोजना का कार्य 10 सालों में सिर्फ 75 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। यहां सिविल वर्क पूरा करने के बाद मशीन स्थापित करने का कार्य किया जा रहा है।
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-नागलिंग में 150.23 लाख की लागत से बन रही 25 किलोवाट जल विद्युत परियोजना का कार्य भी अधूरा है।
भारत के अंतिम गांव कुटी में 60 प्रतिशत काम पूरा
पिथौरागढ़। चीन सीमा से लगे भारत के अंतिम गांव कुटी के लिए बन रही 50 किलोवाट जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य 60 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। हालांकि परियोजना से जुड़ा सामान धारचूला पहुंच गया है। संवाद
सोलर पैनल से उजाला करने के लिए मजबूर हैं लोग
पिथौरागढ़। चीन और नेपाल सीमा से लगे गांवों के लोग अपने घरों में सोलर पैनल से उजाला करने के लिए मजबूर हैं। मौसम खराब होने के कारण सोलर पैनल से जुड़ीं बैट्रियां चार्ज नहीं हो पातीं हैं जिससे लोगों को अंधेरे में रात गुजारनी पड़ती है।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बनाई जा रही जल विद्युत परियोजनाओं के शेष कार्यों को पूरा किया जा रहा है। उच्च हिमालयी गांवों में सामान पहुंचाना चुनौती है। -एमएस रावत, परियोजना अधिकारी, उरेडा पिथौरागढ़।