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भुट्टे छोड़ ‘जीना’ को पहाड़ से नहीं जाना 

Sun, 26 Jun 2016 12:15 AM IST
अमरनाथ ज्योलीकोट (नैनीताल)।
अमरनाथ ज्योलीकोट (नैनीताल)। Updated Sun, 26 Jun 2016 12:15 AM IST
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Up corn 'live' from the mountain go
भुट्टे - फोटो : अमर उजाला

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पहाड़ से पलायन करने वाले लोगों को पान सिंह जीना आइना दिखा रहे हैं।  नैनीताल रोड पर डोलमार में भुट्टे बेचकर वह खुद के अलावा कई किसान परिवारों की आजीविका में संबल बने हैं। इस धंधे में अच्छे पैसे कमाने के साथ-साथ प्यार से लजीज पहाड़ी भुट्टे खिलाने के चलते पर्यटकों और आसपास के लोगों के बीच अजीज बन चुके हैं।

अमृतपुर और घटगाड़ क्षेत्र में पहाड़ी भुट्टे अब स्वयं खाने के लिए ही नहीं उगाए जाते, बल्कि इसकी व्यावसायिक खेती भी होने लगी है। खास बात यह कि हैड़ाखान के बीज में गोबर की खाद देकर मक्के की फसल उगाई जाती है। यहां पानी प्रचुर मात्रा में मिलता है। अच्छी आबोहवा के चलते भी इस क्षेत्र के मक्के में मिठास अधिक होती है और यह सेहतमंद भी होता है। क्षेत्र के करीब 100 परिवार इस खेती पर आश्रित हैं। इंटर तक पढ़े-लिखे पान सिंह जीना बताते हैं कि अप्रैल से अगस्त तक इसका सीजन होता है और उन्होंने खुद करीब 50 खेत खरीदे हैं।
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पर्यटन सीजन के अलावा शनिवार को गर्म-गर्म भुट्टे की मांग अधिक रहती है। यही कारण है कि इन दिनों रोजाना करीब 1000 रुपये के भुट्टे बिक जाते हैं। पिछले 12 साल से भुट्टे बेच कर जीना अपने दो बेटे दर्शन जीना और अक्षत जीना को बीए तक पहुंचा चुके हैं। तीसरा बेटा काम में साथ देता है। 
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सिलबट्टे पर पिसी हरी मिर्च, लहसन, धनिया, अदरक की चटनी के साथ नमक, नींबू और बटर लगाने के बाद इसका स्वाद बढ़ जाता है। जीना बताते हैं कि पहाड़ी भुट्टे इतने स्वादिष्ट होते हैं कि एक-एक व्यक्ति 15-15 भुट्टे तक खा लेते हैं। कुमाऊंनी लोग इसे काकुनी कहते हैं। इसमें प्रोटीन भरपूर होता है और कब्ज को दूर भी करता है।

यही कारण है कि सिर्फ भुट्टे खाने के लिए लोग हल्द्वानी, बरेली, मुरादाबाद, रामपुर आदि जगहों से यहां परिवार सहित आते हैं। पान सिंह जीना बताते हैं कि वह अमर उजाला बचपन से पढ़ते हैं। उसी में स्वरोजगार पर एक स्टोरी पढ़ी थी, जिसकी प्रेरणा से पहाड़ में ही रहकर अपना काम करने के लिए सोचा और आज वह इस आजीविका से अपना परिवार चलाने के साथ-साथ कई किसान परिवार पल-बढ़ रहे हैं।

 

पहाड़ के मक्के का साइज मैदान की अपेक्षा छोटा होता है। इस कारण पहाड़ी भुट्टे अपेक्षाकृत अधिक मुलायम और स्वाद में मिठास लिए होते हैं। इसमें प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन, खनिज आदि बहुतायत में पाए जाते हैं। इसके सेवन से रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता में बढ़ोतरी होती है और कब्ज से निजात मिलने सहित कई लाभ मिलते हैं।
डा. मोहम्मद शाहिद, आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी
   
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