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Nainital News: जमीन की धोखाधड़ी के आरोपियों को दो-दो वर्ष का कारावास
Mon, 08 Sep 2025 02:24 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Mon, 08 Sep 2025 02:24 AM IST
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नैनीताल। न्यायिक मजिस्ट्रेट तथा सिविल जज जूनियर डिविजन स्नेहा नारंग की अदालत से जमीन क्रय विक्रय में धोखाधड़ी की आरोपी भवाली निवासी महिला व तल्लीताल, नैनीताल निवासी पुरुष को दोषी ठहराया गया। आरोपियों को दो-दो साल के कारावास व दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय को बताया गया कि अक्तूबर 2012 को वादी अश्विनी प्रसाद की आरोपी फरसौली, भवाली निवासी गीता देवी और बेटर कंसल तल्लीताल, नैनीताल निवासी जोसेफ जॉन से मुलाकात हुई। गीता ने खुद को एक जमीन का पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर बताते हुए 3.25 लाख रुपये प्रति नाली के हिसाब से जमीन खरीदने का सौदा तय किया। 12 जनवरी 2012 से 16 मार्च 2015 के बीच कुल 6.33 लाख रुपये की धनराशि गीता देवी और जोसेफ जॉन की पत्नी कांता जोसेफ के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी। वादी ने यह धनराशि कई किश्तों में दी। अभियोजन के मुताबिक आरोपी ने जमीन के स्वामी अशोक कुमार के उपचार का हवाला देते हुए धनराशि डलवाई जबकि 2014 में उनकी मृत्यु हो चुकी थी।
अक्तूबर 2016 में वादी अश्विनी प्रसाद को अशोक के मृत होने की जानकारी मिली। धोखाधड़ी की आशंका के चलते धनराशि वापस मांगने पर आरोपी टालमटोल करने लगे।
बाद में भीमताल थाने में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ जिसके तहत अभियुक्तों ने पैसे वापस करने की सहमति दी और 6.33 लाख रुपये के चार चेक दिए लेकिन ये सभी चेक बाउंस हो गए। इसके बाद वादी ने न्यायालय में 156(3) दंड प्रक्रिया संहिता के तहत एक याचिका दायर की। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायालय ने पाया कि आरोपियों ने वादी से छल किया और उसे धोखे से पैसे देने के लिए प्रेरित किया। यह भी साबित हुआ कि षणयंत्र के तहत मालिक की मृत्यु की जानकारी छिपाकर धनराशि ऐंठी गई।
आरोपियों के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि मामला दिल्ली की एक न्यायालय में धारा 138 एनआईएक्ट के तहत विचाराधीन है। न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया। न्यायालय के फैसले के बाद दोनों दोषियों को न्यायिक हिरासत में लेकर नैनीताल जिला कारागार भेज दिया गया।
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अक्तूबर 2016 में वादी अश्विनी प्रसाद को अशोक के मृत होने की जानकारी मिली। धोखाधड़ी की आशंका के चलते धनराशि वापस मांगने पर आरोपी टालमटोल करने लगे।
बाद में भीमताल थाने में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ जिसके तहत अभियुक्तों ने पैसे वापस करने की सहमति दी और 6.33 लाख रुपये के चार चेक दिए लेकिन ये सभी चेक बाउंस हो गए। इसके बाद वादी ने न्यायालय में 156(3) दंड प्रक्रिया संहिता के तहत एक याचिका दायर की। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायालय ने पाया कि आरोपियों ने वादी से छल किया और उसे धोखे से पैसे देने के लिए प्रेरित किया। यह भी साबित हुआ कि षणयंत्र के तहत मालिक की मृत्यु की जानकारी छिपाकर धनराशि ऐंठी गई।
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आरोपियों के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि मामला दिल्ली की एक न्यायालय में धारा 138 एनआईएक्ट के तहत विचाराधीन है। न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया। न्यायालय के फैसले के बाद दोनों दोषियों को न्यायिक हिरासत में लेकर नैनीताल जिला कारागार भेज दिया गया।
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