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हरिद्वार से हुआ दो छात्रों को भुगतान
ब्यूरो/ हल्द्वानी
Updated Thu, 07 Apr 2016 12:23 AM IST
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दशमोत्तर छात्रवृत्ति को लेकर मेवाड़ यूनिवर्सिटी में हुए घोटाले में हरिद्वार से दो छात्रों को भुगतान किया गया, जबकि दो को भुगतान नहीं हुआ। एक छात्र को छात्रवृत्ति योजना का पात्र नहीं पाया गया। उत्तरकाशी से बिना वेरिफिकेशन कराए छात्रवृत्ति का भुगतान हुआ। राज्य के अन्य 11 जिलों में कहीं से भी भुगतान नहीं हुआ है। जांच अधिकारी ने सभी 13 जिलों के जिला समाज कल्याण अधिकारियों से पूछा है कि भुगतान न करने के पीछे क्या कारण था।
समाज कल्याण निदेशक विष्णु सिंह धानिक ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी छात्रवृत्ति घोटाले में 28 लोगों के खिलाफ आरसी जारी की थी। उन्होंने बताया कि विभागीय जांच में पाया गया कि उत्तरकाशी के समाज कल्याण अधिकारी मदन लाल ने बिना सत्यापन के तीन लाख 40 हजार की स्कॉलरशिप जारी कर दी। जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। उन्होंने बताया कि उक्त राशि बैंक में है और विभाग को वापस मिल सकती है।
नैनीताल में 186 बच्चों को दी गई दशमोत्तर छात्रवृत्ति की धनराशि नहीं दी गई। मामले की जांच कर रहे विशेष कार्याधिकारी डा. संतोष कुमार शील ने बताया कि चितौड़ के अधिकारी ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के छात्रों का वेरिफिकेशन कर पांच छात्रों की सूची भेजी थी। इसमें से हरिद्वार से दो को भुगतान किया गया, जबकि दो को भुगतान नहीं हुआ। एक अन्य छात्र को पात्र नहीं पाया गया।
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उन्होंने बताया कि हरिद्वार के जिला समाज कल्याण अधिकारी से पूछा गया है कि दो छात्रों को भुगतान क्यों नहीं किया गया। डा. शील ने बताया कि उत्तरकाशी से बिना सत्यापन कराए भुगतान कर दिया गया। जबकि अन्य 11 जिलों से एक रुपये का भुगतान नहीं हुआ है। कहा कि हर पहलू की जांच हो रही है। सभी समाज कल्याण अधिकारियों से पूछा गया है कि उन्होंने भुगतान क्यों नहीं किया। उन्होंने बताया कि सोमवार तक मामले की जांच पूरी हो जाएगी और स्थिति साफ हो जाएगी। कहा कि सत्यापन के बाद हरिद्वार के जिला समाज कल्याण अधिकारी ने भुगतान किया इसलिए उसे गलत नहीं माना जा सकता।
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समाज कल्याण निदेशक विष्णु सिंह धानिक ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी छात्रवृत्ति घोटाले में 28 लोगों के खिलाफ आरसी जारी की थी। उन्होंने बताया कि विभागीय जांच में पाया गया कि उत्तरकाशी के समाज कल्याण अधिकारी मदन लाल ने बिना सत्यापन के तीन लाख 40 हजार की स्कॉलरशिप जारी कर दी। जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। उन्होंने बताया कि उक्त राशि बैंक में है और विभाग को वापस मिल सकती है।
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नैनीताल में 186 बच्चों को दी गई दशमोत्तर छात्रवृत्ति की धनराशि नहीं दी गई। मामले की जांच कर रहे विशेष कार्याधिकारी डा. संतोष कुमार शील ने बताया कि चितौड़ के अधिकारी ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के छात्रों का वेरिफिकेशन कर पांच छात्रों की सूची भेजी थी। इसमें से हरिद्वार से दो को भुगतान किया गया, जबकि दो को भुगतान नहीं हुआ। एक अन्य छात्र को पात्र नहीं पाया गया।
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उन्होंने बताया कि हरिद्वार के जिला समाज कल्याण अधिकारी से पूछा गया है कि दो छात्रों को भुगतान क्यों नहीं किया गया। डा. शील ने बताया कि उत्तरकाशी से बिना सत्यापन कराए भुगतान कर दिया गया। जबकि अन्य 11 जिलों से एक रुपये का भुगतान नहीं हुआ है। कहा कि हर पहलू की जांच हो रही है। सभी समाज कल्याण अधिकारियों से पूछा गया है कि उन्होंने भुगतान क्यों नहीं किया। उन्होंने बताया कि सोमवार तक मामले की जांच पूरी हो जाएगी और स्थिति साफ हो जाएगी। कहा कि सत्यापन के बाद हरिद्वार के जिला समाज कल्याण अधिकारी ने भुगतान किया इसलिए उसे गलत नहीं माना जा सकता।