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267 ‘राजा-रानी’ के पुख्ता सुबूत
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Wed, 21 Jan 2015 12:26 PM IST
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उत्तराखंड के जंगल में कितने ‘राजा-रानी’ है, उनमें से अधिकांश की तस्वीर भी मौजूद है। यह तस्वीरें गणना के दौरान बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए गए कैमरा ट्रैप के जरिए कैद की गई हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बाघों की संख्या बढ़ने का एक कारण कैमरा ट्रैप के जरिए सटीक तरीके से गणना करना और जंगल का ज्यादा इलाका कवर किया जाना भी है। बता दें कि बाघों की गणना हर चार साल बाद कराई जाती है।
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2006 में उत्तराखंड में 178 बाघ रिपोर्ट हुए थे। 2010 में यह संख्या बढ़कर 227 पहुंची थी। इस बार जो सूचना है, उसमें बाघों की संख्या बढ़कर 340 पहुंच गई है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ से जुड़े वन्यजीव विशेषज्ञ और बाघों की गणना में शामिल रहे मिराज अनवर कहते हैं कि रिपोर्ट उत्साहवर्द्धक है। 340 बाघों में 267 बाघों की तो तस्वीरें तक मौजूद हैं।
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बाकी बाघों की संख्या का अंदाजा मौके पर मिले दूसरे साक्ष्य और साफ्टवेयर की गणना के आधार पर किया गया है। जंगल में प्रति सौ स्क्वायर किमी में तीन से चार बाघ बढ़े हैं। बाघों की बढ़ी संख्या बेहतर प्रोटेक्शन के अलावा कार्बेट पार्क के पूरे क्षेत्र में कैमरा ट्रैप से गणना करना, जंगलों में भी ज्यादा इलाका कवर करना भी शामिल हो सकता है। 2014 में बाघों की गणना के लिए प्रदेश में इस बार आठ सौ से ज्यादा कैमरा ट्रैप का इस्तेमाल किया गया था।
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