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Nainital News: सिस्टम की अलमारियों में कैद फाइलों में ही है जाम का समाधान
Sun, 04 Oct 2026 01:43 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sun, 04 Oct 2026 01:43 AM IST
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हल्द्वानी।
जाम की दिक्कत ऐसी बड़ी समस्या नहीं है जिसका समाधान न हो। असल दिक्कत सिस्टम में इच्छा शक्ति की कमी है। जिम्मेदार अफसरों ने इसे कभी गंभीरता से लिया ही नहीं। पुलिस की सोच रूट डायवर्जन से आगे नहीं बढ़ी। ऐसे में जो सफर मात्र एक से डेढ़ घंटे में पूरा हो सकता था वीकेंड पर उसमें पांच से आठ घंटे लग रहे हैं। इस समस्या से बाबा के भक्त, सैलानी, स्थानीय लोग और कारोबारी सभी त्रस्त हैं। सिस्टम की अलमारियों में कैद फाइलों में ही इसका समाधान है, लेकिन फाइलें अलमारी और मेज के बीच ही घूमती रहती हैं जिसके चलते अब यह जाम समस्या से कहीं आगे बढ़कर नासूर बन चुका है।
यहां है समस्या का समाधान
रिंग रोड:- रिंग रोड की घोषणा तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 22 फरवरी 2017 को की थी। 54 किमी लंबी रिंग रोड की प्रारंभिक लागत 400 करोड़ थी जो अब 2100 करोड़ तक पहुंच गई है। इसके लिए पहले लामाचौड़ से गन्ना सेंटर तक रूट तय था। इसमें 19 हेक्टेयर निजी जमीन और 105 घर आ रहे थे। स्थानीय लोगों और काश्तकारों के विरोध के चलते शासन ने रूट बदल दिया है। अब नया रूट भाखड़ा पुल से फायर लाइन होते हुए जंगल के अंदर से रामपुर रोड पर बेलबाबा तक करीब 18.79 किमी तय है। रिंग रोड के सर्वे के लिए फरवरी 2026 में शासन ने 26.35 लाख रुपये जारी किए। 25 मार्च 2026 को लोनिवि ने टेंडर खोला। कंपनी ने सर्वे शुरू किया ही था कि 5 मई 2026 को वन विभाग ने आरक्षित वन क्षेत्र में बिना अनुमति सर्वे करने पर कंपनी की टीम को जंगल से खदेड़ दिया। तब से यह काम रुका हुआ है। हालांकि बीते दिनों सीएम धामी ने सहकारिता मेले में रिंग रोड का काम जल्द शुरू कराने का दावा किया था। रिंग रोड के लिए अभी न तो जमीन का अधिग्रहण हुआ है और न ही डीपीआर फाइनल हुई है। कागजों में प्रोजेक्ट जिंदा है मगर धरातल पर काम जीरो है।
-काठगोदाम-अमृतपुर बाईपास:-
काठगोदाम में गौला पुल के समीप से 3.5 किमी बाईपास के लिए वर्ष 2019 में प्रस्ताव बनाया गया। यह बाईपास गौलापुल से दानीजाला होते हुए भीमताल रोड में पानी के स्रोत के पास तक बनना था। केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक स्वीकृति देते हुए 18.22 करोड़ का बजट भी स्वीकृत कर दिया। पहले क्षतिपूरक वनीकरण की 6.54 हेक्टेयर जमीन पर वन विभाग ने आपत्ति लगा दी। इसी खींचतान में पांच साल निकल गए। अप्रैल 2026 में वन मंत्रालय से अनुमति मिली, जून 2026 में शिलान्यास हुआ। जैसे ही पहाड़ी का कटान शुरू हुआ तो एक ठेकेदार ने टेंडर प्रक्रिया में धांधली का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से स्टे ले लिया। स्टे के बाद से पहाड़ी का कटान बंद है अलबत्ता दूसरी ओर से लोनिवि पुल निर्माण की कार्रवाई कर रहा है। अभी गौलापार से नैनीताल-भीमताल जाने के लिए नरीमन तिराहा, गुलाबघाटी, रानीबाग होकर जाना पड़ता है, जहां वीकेंड पर तीन-तीन घंटे जाम लगता है। इसके बनने से गौलापार से भीमताल रूट के वाहन सीधे अमृतपुर पहुंच जाते और गुलाबघाटी में जाम नहीं लगता।
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क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि:-
कैंची क्षेत्र में जाम की बड़ी समस्या है। पर्यटक यहां की क्षमता से अधिक पहुंच रहे हैं। जाम से निपटने के लिए भारत सरकार के एनएचआई डीसीएल विभाग की ओर से भवाली-रामगढ़ से मौना तक के लिए टनल बनाने का प्लान है जिसको लेकर सर्वे का कार्य किया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद डीपीआर तैयार की जाएगी।
-अजय टम्टा, केंद्रीय राज्यमंत्री, सड़क
परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
नैनीताल और कैंची धाम रूट पर यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कुछ बाईपास बन चुके हैं और कुछ पर काम चल रहा है। रोपवे परियोजना भी विचाराधीन है। यहां आने वाले सैलानी और श्रद्धालु यात्रा से पहले होटल, होमस्टे या अन्य ठहरने की व्यवस्था सुनिश्चित कर लें। बिना ठहरने की व्यवस्था के यात्रा करने से अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। -अजय भट्ट, सांसद
गुलाबघाटी में जाम न लगे इसके लिए काठगोदाम-अमृतपुर बाइपास बनाया जा रहा है। यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट में मजबूती से सरकार इस मामले की पैरवी कर रही है ताकि समस्या का शीघ्र समाधान हो सके। पुलिस और प्रशासन को भी जाम की समस्या हल कराने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
- राम सिंह कैड़ा, विधायक भीमताल व कैबिनेट मंत्री
जाम से निपटने के लिए सरकार और प्रशासन के पास कोई रणनीति नहीं है। न ही जिम्मेदार अधिकारी इस मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार हैं। दिल्ली के सैलानी कह रहे हैं अब दोबारा नहीं आएंगे। जितना समय दिल्ली से हल्द्वानी पहुंचने में लगता है उतना ही समय हल्द्वानी से भीमताल पहुंचने में लग रहा है। सरकारी दावों के बाइपास कब, कहां और कितने बने। इसका जवाब सरकार के पास नहीं है। सरकार के पास कोई ट्रैफिक प्लान नहीं है। यह सरकार और प्रशासन की असफलता है। यही हाल रहा तो पहाड़ का पर्यटन व्यवसाय खत्म हो जाएगा।
- सुमित हृदयेश, विधायक हल्द्वानी
जाम के लिए पुलिस की गलत कार्यप्रणाली भी जिम्मेदार हैं। परसों का उदाहरण दूं, कालाढूंगी-नैनीताल रोड पर दो किलोमीटर लंबा जाम था। मैंने एक दरोगा से पूछा तो उसने बताया कि एसएसपी साहब ने नैनीताल की ओर नो इंट्री के आदेश दिए हैं। मैंने मौके से ही एसएसपी को फोन किया तो एसएसपी बोले मैने मना नहीं किया है। इस पर मैंने एसएसपी की बात सीधे उसी दरोगा से करा दी। तब एसएसपी के पास कोई जवाब नहीं था। इसके अलावा हाल के वर्षों में वाहनों की संख्या में खासी वृद्धि हुई है। सड़कें अभी संकरी और सीमित हैं। जाम से निपटने के लिए कुछ बाईपास बनाए जा चुके हैं जबकि कुछ पर काम चल रहा है।
- बंशीधर भगत विधायक कालाढूंगी
कैंची धाम में दर्शन के लिए आने वालों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जाम के लिए सिस्टम को दोष देना भी ठीक नहीं हैं। यातायात व्यवस्थित करने के लिए भवाली और आसपास के क्षेत्रों से कैंची धाम के लिए अलग-अलग बाईपास बनाए जा रहे हैं। मुझे स्वयं दो दिन पहले बेतालघाट पहुंचने में चार घंटे लग गए। बाइपास बनने के बाद व्यवस्था में सुधार होगा।
- सरिता आर्या, विधायक नैनीताल
मैदान से पहाड़ आने वाले वाहनों की संख्या में एकाएक वृद्धि होने के कारण वीकेंड पर जाम लग रहा है। प्रदेश सरकार के निर्देश पर जाम से निपटने के लिए रोपवे, बाईपास और सड़कों के चौड़ीकरण पर काम चल रहा है। इन पर काम होने के बाद जाम की समस्या का कुछ हद तक समाधान हो जाएगा।
- डा. मोहन सिंह बिष्ट, विधायक लालकुआं
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जाम की दिक्कत ऐसी बड़ी समस्या नहीं है जिसका समाधान न हो। असल दिक्कत सिस्टम में इच्छा शक्ति की कमी है। जिम्मेदार अफसरों ने इसे कभी गंभीरता से लिया ही नहीं। पुलिस की सोच रूट डायवर्जन से आगे नहीं बढ़ी। ऐसे में जो सफर मात्र एक से डेढ़ घंटे में पूरा हो सकता था वीकेंड पर उसमें पांच से आठ घंटे लग रहे हैं। इस समस्या से बाबा के भक्त, सैलानी, स्थानीय लोग और कारोबारी सभी त्रस्त हैं। सिस्टम की अलमारियों में कैद फाइलों में ही इसका समाधान है, लेकिन फाइलें अलमारी और मेज के बीच ही घूमती रहती हैं जिसके चलते अब यह जाम समस्या से कहीं आगे बढ़कर नासूर बन चुका है।
यहां है समस्या का समाधान
रिंग रोड:- रिंग रोड की घोषणा तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 22 फरवरी 2017 को की थी। 54 किमी लंबी रिंग रोड की प्रारंभिक लागत 400 करोड़ थी जो अब 2100 करोड़ तक पहुंच गई है। इसके लिए पहले लामाचौड़ से गन्ना सेंटर तक रूट तय था। इसमें 19 हेक्टेयर निजी जमीन और 105 घर आ रहे थे। स्थानीय लोगों और काश्तकारों के विरोध के चलते शासन ने रूट बदल दिया है। अब नया रूट भाखड़ा पुल से फायर लाइन होते हुए जंगल के अंदर से रामपुर रोड पर बेलबाबा तक करीब 18.79 किमी तय है। रिंग रोड के सर्वे के लिए फरवरी 2026 में शासन ने 26.35 लाख रुपये जारी किए। 25 मार्च 2026 को लोनिवि ने टेंडर खोला। कंपनी ने सर्वे शुरू किया ही था कि 5 मई 2026 को वन विभाग ने आरक्षित वन क्षेत्र में बिना अनुमति सर्वे करने पर कंपनी की टीम को जंगल से खदेड़ दिया। तब से यह काम रुका हुआ है। हालांकि बीते दिनों सीएम धामी ने सहकारिता मेले में रिंग रोड का काम जल्द शुरू कराने का दावा किया था। रिंग रोड के लिए अभी न तो जमीन का अधिग्रहण हुआ है और न ही डीपीआर फाइनल हुई है। कागजों में प्रोजेक्ट जिंदा है मगर धरातल पर काम जीरो है।
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-काठगोदाम-अमृतपुर बाईपास:-
काठगोदाम में गौला पुल के समीप से 3.5 किमी बाईपास के लिए वर्ष 2019 में प्रस्ताव बनाया गया। यह बाईपास गौलापुल से दानीजाला होते हुए भीमताल रोड में पानी के स्रोत के पास तक बनना था। केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक स्वीकृति देते हुए 18.22 करोड़ का बजट भी स्वीकृत कर दिया। पहले क्षतिपूरक वनीकरण की 6.54 हेक्टेयर जमीन पर वन विभाग ने आपत्ति लगा दी। इसी खींचतान में पांच साल निकल गए। अप्रैल 2026 में वन मंत्रालय से अनुमति मिली, जून 2026 में शिलान्यास हुआ। जैसे ही पहाड़ी का कटान शुरू हुआ तो एक ठेकेदार ने टेंडर प्रक्रिया में धांधली का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से स्टे ले लिया। स्टे के बाद से पहाड़ी का कटान बंद है अलबत्ता दूसरी ओर से लोनिवि पुल निर्माण की कार्रवाई कर रहा है। अभी गौलापार से नैनीताल-भीमताल जाने के लिए नरीमन तिराहा, गुलाबघाटी, रानीबाग होकर जाना पड़ता है, जहां वीकेंड पर तीन-तीन घंटे जाम लगता है। इसके बनने से गौलापार से भीमताल रूट के वाहन सीधे अमृतपुर पहुंच जाते और गुलाबघाटी में जाम नहीं लगता।
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क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि:-
कैंची क्षेत्र में जाम की बड़ी समस्या है। पर्यटक यहां की क्षमता से अधिक पहुंच रहे हैं। जाम से निपटने के लिए भारत सरकार के एनएचआई डीसीएल विभाग की ओर से भवाली-रामगढ़ से मौना तक के लिए टनल बनाने का प्लान है जिसको लेकर सर्वे का कार्य किया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद डीपीआर तैयार की जाएगी।
-अजय टम्टा, केंद्रीय राज्यमंत्री, सड़क
परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
नैनीताल और कैंची धाम रूट पर यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कुछ बाईपास बन चुके हैं और कुछ पर काम चल रहा है। रोपवे परियोजना भी विचाराधीन है। यहां आने वाले सैलानी और श्रद्धालु यात्रा से पहले होटल, होमस्टे या अन्य ठहरने की व्यवस्था सुनिश्चित कर लें। बिना ठहरने की व्यवस्था के यात्रा करने से अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। -अजय भट्ट, सांसद
गुलाबघाटी में जाम न लगे इसके लिए काठगोदाम-अमृतपुर बाइपास बनाया जा रहा है। यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट में मजबूती से सरकार इस मामले की पैरवी कर रही है ताकि समस्या का शीघ्र समाधान हो सके। पुलिस और प्रशासन को भी जाम की समस्या हल कराने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
- राम सिंह कैड़ा, विधायक भीमताल व कैबिनेट मंत्री
जाम से निपटने के लिए सरकार और प्रशासन के पास कोई रणनीति नहीं है। न ही जिम्मेदार अधिकारी इस मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार हैं। दिल्ली के सैलानी कह रहे हैं अब दोबारा नहीं आएंगे। जितना समय दिल्ली से हल्द्वानी पहुंचने में लगता है उतना ही समय हल्द्वानी से भीमताल पहुंचने में लग रहा है। सरकारी दावों के बाइपास कब, कहां और कितने बने। इसका जवाब सरकार के पास नहीं है। सरकार के पास कोई ट्रैफिक प्लान नहीं है। यह सरकार और प्रशासन की असफलता है। यही हाल रहा तो पहाड़ का पर्यटन व्यवसाय खत्म हो जाएगा।
- सुमित हृदयेश, विधायक हल्द्वानी
जाम के लिए पुलिस की गलत कार्यप्रणाली भी जिम्मेदार हैं। परसों का उदाहरण दूं, कालाढूंगी-नैनीताल रोड पर दो किलोमीटर लंबा जाम था। मैंने एक दरोगा से पूछा तो उसने बताया कि एसएसपी साहब ने नैनीताल की ओर नो इंट्री के आदेश दिए हैं। मैंने मौके से ही एसएसपी को फोन किया तो एसएसपी बोले मैने मना नहीं किया है। इस पर मैंने एसएसपी की बात सीधे उसी दरोगा से करा दी। तब एसएसपी के पास कोई जवाब नहीं था। इसके अलावा हाल के वर्षों में वाहनों की संख्या में खासी वृद्धि हुई है। सड़कें अभी संकरी और सीमित हैं। जाम से निपटने के लिए कुछ बाईपास बनाए जा चुके हैं जबकि कुछ पर काम चल रहा है।
- बंशीधर भगत विधायक कालाढूंगी
कैंची धाम में दर्शन के लिए आने वालों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जाम के लिए सिस्टम को दोष देना भी ठीक नहीं हैं। यातायात व्यवस्थित करने के लिए भवाली और आसपास के क्षेत्रों से कैंची धाम के लिए अलग-अलग बाईपास बनाए जा रहे हैं। मुझे स्वयं दो दिन पहले बेतालघाट पहुंचने में चार घंटे लग गए। बाइपास बनने के बाद व्यवस्था में सुधार होगा।
- सरिता आर्या, विधायक नैनीताल
मैदान से पहाड़ आने वाले वाहनों की संख्या में एकाएक वृद्धि होने के कारण वीकेंड पर जाम लग रहा है। प्रदेश सरकार के निर्देश पर जाम से निपटने के लिए रोपवे, बाईपास और सड़कों के चौड़ीकरण पर काम चल रहा है। इन पर काम होने के बाद जाम की समस्या का कुछ हद तक समाधान हो जाएगा।
- डा. मोहन सिंह बिष्ट, विधायक लालकुआं