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एफएसआई की रिपोर्ट से पूर्व डीएफओ की भूमिका होगी साफ
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हल्द्वानी। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई) की टीम की रिपोर्ट से कालागढ़ वन प्रभाग में अवैध पातन को लेकर स्थिति और साफ हो सकती है। सूत्रों के अनुसार कुछ समय पूर्व एफएसआई की टीम ने स्थलीय निरीक्षण भी कर लिया है।
कालागढ़ वन प्रभाग में हुईं गड़बड़ियों के बाद तत्कालीन अपर प्रमुख वन संरक्षक व नोडल अधिकारी वन भूमि हस्तांतरण की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय टीम ने जांच की थी। इसके बाद जांच टीम ने एक रिपोर्ट मुख्यालय भेजी थी। जांच समिति ने कालागढ़ वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ अखिलेश तिवारी (3 मई 2020 से 29 अप्रैल 2021) के कार्यकाल के दौरान व्याख्यान केंद्र के निर्माण के दौरान कई वृक्षों के कटान की बात का उल्लेख किया था।
वन मुख्यालय ने एक पत्र अपर मुख्य सचिव को भेजा था, उसमें कहा गया था संबंधित प्रकरण में पूर्व एफएसआई की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही फैसला लिया जा सकता है। ऐसे में संबंधित डीएफओ की सामान्य ख्याति को देखते हुए बेनीफिट ऑफ डाउट दिया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक संबंधित मामले में एफएसआई ने स्थलीय निरीक्षण आदि कार्य कर लिया है। अभी रिपोर्ट जारी नहीं हुई है। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे कोई फैसला होने की संभावना है।
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इस संबंध में वन मंत्री सुबोध उनियाल और प्रमुख वन संरक्षक विनोद सिंघल से पक्ष लेने का प्रयास किया गया, पर वह प्राप्त नहीं हो सका। जैसे पक्ष मिलेगा, उसे हू-ब-हू प्रकाशित कर दिया जाएगा।
विधिवत स्वीकृति के बिना कार्य प्रारंभ किया गया
हल्द्वानी। कालागढ़ वन प्रभाग में व्याख्यान केंद्र और टाइगर बाड़ा-1 एक निर्माण की विधिवत स्वीकृति के पूर्व प्रारंभ कराना स्टेज- एक की शर्तों का उल्लंघन था। यह बात खुद मुख्यालय से भेजे गए पत्र में मानी गई थी।
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कालागढ़ वन प्रभाग में हुईं गड़बड़ियों के बाद तत्कालीन अपर प्रमुख वन संरक्षक व नोडल अधिकारी वन भूमि हस्तांतरण की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय टीम ने जांच की थी। इसके बाद जांच टीम ने एक रिपोर्ट मुख्यालय भेजी थी। जांच समिति ने कालागढ़ वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ अखिलेश तिवारी (3 मई 2020 से 29 अप्रैल 2021) के कार्यकाल के दौरान व्याख्यान केंद्र के निर्माण के दौरान कई वृक्षों के कटान की बात का उल्लेख किया था।
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वन मुख्यालय ने एक पत्र अपर मुख्य सचिव को भेजा था, उसमें कहा गया था संबंधित प्रकरण में पूर्व एफएसआई की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही फैसला लिया जा सकता है। ऐसे में संबंधित डीएफओ की सामान्य ख्याति को देखते हुए बेनीफिट ऑफ डाउट दिया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक संबंधित मामले में एफएसआई ने स्थलीय निरीक्षण आदि कार्य कर लिया है। अभी रिपोर्ट जारी नहीं हुई है। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे कोई फैसला होने की संभावना है।
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इस संबंध में वन मंत्री सुबोध उनियाल और प्रमुख वन संरक्षक विनोद सिंघल से पक्ष लेने का प्रयास किया गया, पर वह प्राप्त नहीं हो सका। जैसे पक्ष मिलेगा, उसे हू-ब-हू प्रकाशित कर दिया जाएगा।
विधिवत स्वीकृति के बिना कार्य प्रारंभ किया गया
हल्द्वानी। कालागढ़ वन प्रभाग में व्याख्यान केंद्र और टाइगर बाड़ा-1 एक निर्माण की विधिवत स्वीकृति के पूर्व प्रारंभ कराना स्टेज- एक की शर्तों का उल्लंघन था। यह बात खुद मुख्यालय से भेजे गए पत्र में मानी गई थी।