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हल्द्वानी में तैयार हुआ देश का पहला वानस्पतिक जुरासिक पार्क
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हल्द्वानी वन अनुसंधान केंद्र में तैयार जुरासिक पार्क में लगाया गया डायनासोर का स्टैच्यू। अमर
हल्द्वानी। डायनासोर के बारे में जानने के लिए विश्व में सैकड़ों पार्क बने हैं लेकिन जुरासिक काल में डायनासोर किन वनस्पतियों को खाकर जीवित रहे इसे जानने के लिए हल्द्वानी वन अनुसंधान केंद्र ने देश का पहला वानस्पतिक जुरासिक पार्क तैयार किया है। इसमें जुरासिक काल की वह वनस्पतियां देखने को मिलेंगी जो डायनासोर के भोजन में शामिल थी।
वन अनुसंधान केंद्र की ओर से किए गए शोध के अनुसार जुरासिक काल में पौधों का जीवन ब्रायोफाइट्स से विकसित हुआ। यह वनस्पति जगत का ऐसा वर्ग है जिसमें संवहनी ऊतक की कमी थी और वह नम क्षेत्रों तक ही सीमित थे। इस दौरान पौधों के प्रजनन की एक नई विधि विकसित हुई। शंकुधारी पौधे भी जुरासिक काल में ही विकसित हुए और जुरासिक काल के अंत तक मौजूद रहे।
इन्हीं वनस्पतियों को खाकर डायनासोर लंबे समय तक पृथ्वी पर जीवित रहे। जुरासिक काल की ऐसी ही सात तरह की वनस्पतियों को वन अनुसंधान केंद्र ने रिसर्च के बाद जुरासिक पार्र्क में संरक्षित किया है। इसमें लिवरवॉटस, मॉस, गिंको, फर्न, साइकस, पाइन और आर्किड की प्रजाति शामिल है। फर्न और गिंको शुरुआती जुरासिक काल के प्रमुख पौधे थे। शाकाहारी और मांसाहारी डायनासोर के जीवंत दिखने वाले तीन पुतले भी पार्क में लगाए हैं। अप्रैल से इसे पब्लिक के लिए खोले जाने की संभावना है।
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संरक्षण, अनुसंधान और शिक्षा के उद्देश्य से जुरासिक पार्क विकसित किया गया है। देश का यह पहला ऐसा पार्क है जिसमें जुरासिक काल की उन वनस्पतियों को संरक्षित किया गया है जिन्हें डायनासोर भोजन के लिए खाते थे।
-संजीव चतुर्वेदी, वन संरक्षक अनुसंधान
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वन अनुसंधान केंद्र की ओर से किए गए शोध के अनुसार जुरासिक काल में पौधों का जीवन ब्रायोफाइट्स से विकसित हुआ। यह वनस्पति जगत का ऐसा वर्ग है जिसमें संवहनी ऊतक की कमी थी और वह नम क्षेत्रों तक ही सीमित थे। इस दौरान पौधों के प्रजनन की एक नई विधि विकसित हुई। शंकुधारी पौधे भी जुरासिक काल में ही विकसित हुए और जुरासिक काल के अंत तक मौजूद रहे।
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इन्हीं वनस्पतियों को खाकर डायनासोर लंबे समय तक पृथ्वी पर जीवित रहे। जुरासिक काल की ऐसी ही सात तरह की वनस्पतियों को वन अनुसंधान केंद्र ने रिसर्च के बाद जुरासिक पार्र्क में संरक्षित किया है। इसमें लिवरवॉटस, मॉस, गिंको, फर्न, साइकस, पाइन और आर्किड की प्रजाति शामिल है। फर्न और गिंको शुरुआती जुरासिक काल के प्रमुख पौधे थे। शाकाहारी और मांसाहारी डायनासोर के जीवंत दिखने वाले तीन पुतले भी पार्क में लगाए हैं। अप्रैल से इसे पब्लिक के लिए खोले जाने की संभावना है।
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संरक्षण, अनुसंधान और शिक्षा के उद्देश्य से जुरासिक पार्क विकसित किया गया है। देश का यह पहला ऐसा पार्क है जिसमें जुरासिक काल की उन वनस्पतियों को संरक्षित किया गया है जिन्हें डायनासोर भोजन के लिए खाते थे।
-संजीव चतुर्वेदी, वन संरक्षक अनुसंधान