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एसटीएच में बच्ची की मौत पर हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
Updated Fri, 26 Aug 2016 12:03 AM IST
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हंगामा
- फोटो : अमर उजाला
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सुशीला तिवारी अस्पताल में मासूम की मौत पर जमकर हंगामा हुआ। परिजनों ने डाक्टरों और ब्लड बैंक पर लापरवाही का आरोप लगाया। घटना की सूचना मिलते ही सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम और पुलिस मौके पर पहुंच गई।
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परिजनों को समझाबुझाकर शांत कराया गया। डाक्टर का मानना है कि बच्ची की मौत डेंगू से हुई होगी।
बिलासपुर निवासी रवि रस्तोगी अपनी बेटी नंदी (ढाई साल) को लेकर बृहस्पतिवार की दोपहर 12 बजे एसटीएच पहुंचे। नंदी को बाल रोग वार्ड में रखा गया था। रस्तोगी ने बताया कि दो दिन से बेटी की तबियत खराब थी।
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उल्टी के दौरान खून भी आ रहा था। रुद्रपुर में एक डाक्टर से इलाज चल रहा था। हालत में सुधार न होने पर डाक्टर ने एसटीएच रिफर कर दिया था। उसने बताया कि नंदी की प्लेटलेट्स कम थी।
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उसे प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत थी। प्लेटलेट्स लेने के लिए जब ब्लड बैंक पहुंचे तो ब्लड बैंक वालों ने चार डोनर लाने को कहा। साथ ही चार सौ रुपये की रसीद कटाने को कहा। ब्लड बैंक के कर्मियों से अनुरोध किया गया मगर उन्होंने नहीं सुनी।
ब्लड बैंक में मैंने और हल्द्वानी के एक दोस्त राजू ने रक्त दिया। दो यूनिट ब्लड देने के बाद बहुत मुश्किल से ब्लड बैंक ने एक यूनिट प्लेटलेट्स दी। प्लेट्लेटस लाने के कुछ ही देर बात बच्ची की मौत हो गई।
डाक्टरों ने प्लेटलेट्स आने के बाद भी बच्ची को प्लेटलेट्स नहीं चढ़ाई। बच्ची की मौत के बाद परिजनों की डाक्टरों और स्टाफ से जमकर नोकझोंक हुई। परिजनों ने डाक्टरों और ब्लड बैंक कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
बच्ची की मां किरण और भाई हिमांशु रस्तोगी समेत अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। सूचना मिलते ही सिटी मजिस्ट्रेट हरबीर सिंह, एसडीएम पंकज उपाध्याय मय पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गए। परिजनों को समझाबुझाकर शांत कराया और एंबुलेंस से बिलासपुर भेजा।
इधर, ब्लड बैंक तकनीशियन दिलीप फर्त्याल ने बताया कि एक यूनिट ब्लड और चार सौ रुपये की रसीद कटाने के लिए परिजनों से कहा था। पिता रवि रस्तोगी ने कहा कि बच्ची की हालत गंभीर है रसीद बाद में कटवा लेेंगे।
इस पर तत्काल एक यूनिट प्लेटलेट्स दे दी थी। बाल रोग विभाग में ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर वसु ने बताया कि बाल रोग विभाग की डॉ. नूतन और डॉ. अशोक बच्ची को देख रहे थे।
बच्ची बहुत गंभीर हालत में आई थी। उसके उल्टी और दस्त से खून आ रहा था। उसकी प्लेटलेट्स 28 हजार थी। डॉ. वसु ने बताया बच्ची की मौत का कारण डेंगू भी हो सकता है।
अस्पताल की गुल हो गई बिजली
सुशीला तिवारी अस्पताल कम और अव्यवस्थाओं का अड्डा ज्यादा बनता जा रहा है। अस्पताल में शाम को बार बार बिजली गुल होती रही मगर जेनरेटर चलाने वाला कोई नहीं था। बृहस्पतिवार की शाम लगभग साढ़े सात बजे पूरे अस्पताल की बिजली गुल हो गई।
इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक अंधेरे में डूब गए। 15 मिनट से अधिक बिजली गुल रहने के बाद भी किसी ने जेनरेटर चलाने की जहमत नहीं उठाई। बिजली की आवाजाही लगी हुई थी। आपूर्ति आधे घंटे तक सामान्य न होने पर जेनरेटर चलाया गया।
सवाल ये उठता है कि ओटी में अगर किसी मरीज का आपरेशन चल रहा हो और बिजली व्यवस्था चरमरा जाए तो क्या जेनरेटर नहीं चलाया जाएगा। ऐसी लापरवाही से किसी की जान भी जा सकती है।
मलेरिया पीड़ित बेस में भर्ती
मलेरिया, टायफायड और डेंगू का प्रकोप बढ़ने लगा है। बेस अस्पताल में बृहस्पतिवार को मलेरिया पीड़ित मो. शफी लाइन नंबर छह को भर्ती कराया गया। बेस अस्पताल में मलेरिया पीड़ित दो से तीन मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं।
डाक्टरों ने एक यूनिट ब्लड के लिखा था। ब्लड बैंक में बताया गया कि चार यूनिट ब्लड की आवश्यकता है और चार डोनर लाने पर ही ब्लड देंगे। बच्ची के पिता ने कहा कि दो डोनर हैं। इस पर ब्लड देने से मना कर दिया। ब्लड देने में देर होने के कारण ही बच्ची की मौत हुई और हंगामा हुआ।
- हरबीर सिंह
सिटी मजिस्ट्रेट, हल्द्वानी