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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Seven thousand new cases of asthma each year come

अस्थमा के साढ़े सात हजार नए रोगी आते हैं प्रति वर्ष 

Tue, 03 May 2016 12:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी। Updated Tue, 03 May 2016 12:48 AM IST
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पर्यावरण में बदलाव के कारण अस्थमा के रोगी तेजी से बढ़ रहे हैं। अस्थमा के कुमाऊं में ही साढ़े सात हजार नए रोगी डाक्टरों के पास पहुंचते हैं। अनुवांशिक और एलर्जी के कारण अस्थमा तेजी से बढ़ रहा है। 
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पर्यावरण में बदलाव के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। धूल और धुंध के कारण एलर्जी की चपेट में लोग आ रहे हैं। अस्थमा रोगियों के लिए घर में बिछने वाली कारपेट, कुत्ते और बिल्ली सबसे अधिक घातक हैं।
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कारपेट में जमने वाली धूल अस्थमा को बढ़ा देती है। कुत्ते और बिल्ली के बाल भी रोग को बढ़ाते हैं। घर में होने वाली धूल से भी ऐसे मरीजों को दिक्कत होती है। अस्थमा होने के दो प्रमुख कारण हैं। पहला अनुवांशिक और दूसरा एलर्जी या एम्युनिटी सिस्टम कमजोर होने के कारण। मौसम का अधिक बदलाव या अधिक भीड़भाड़ वाली जगह भी ऐसे मरीजों की समस्या को बढ़ा देती है। एसटीएच के टीबी एवं श्वास रोग विभाग में प्रतिदिन पांच, तीन निजी क्लीनिकों में भी पांच से दस नए मरीज प्रतिदिन आते हैं। कुमाऊं से लगभग साढ़े सात हजार नए अस्थमा के मरीज हो रहे हैं। 
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कोट :: फोटो ::
घर में अस्थमा मरीज होने पर बिस्तर को हर हफ्ते धोना चाहिए। दवा का नियमित प्रयोग कर अस्थमा से बचा जा सकता है। 
डा. गौरव सिंघल, चेस्ट रोग विशेषज्ञ
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