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छात्रवृत्ति घोटाला : सरकार ने जांच के लिए मांगा छह माह का समय
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नैनीताल। प्रदेश में 500 करोड़ रुपये से अधिक के छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान स्पेशल काउंसिल पुष्पा जोशी और ललित सामंत ने मुख्य सचिव की ओर से शपथपत्र पेश करते हुए कोर्ट को बताया कि एसआईटी ने 77 प्रतिशत जांच पूरी कर ली है और 23 प्रतिशत जांच सीबीआई को न देकर एसआईटी से ही कराई जाए।
शपथपत्र में सरकार को छह माह का समय देने की भी मांग की गई। इस पर हाईकोर्ट ने कोई अंतरिम आदेश दिए बिना मामले की सुनवाई के लिए 19 अक्तूबर की तिथि नियत की है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि कुमार मलिमठ एवं न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
मामले के अनुसार देहरादून निवासी रवींद्र जुगरान, एसके सिंह और सुभाष नौटियाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि प्रदेश में अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों की छात्रवृत्ति में 2005 से घोटाला किया जा रहा है। यह घोटाला करीब पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक का है। याचिका में कहा गया कि छात्रवृत्ति का पैसा छात्रों को न देकर स्कूलों को दिया गया या फिर उन लोगों को दिया गया, जो उस स्कूल के छात्र थे ही नहीं। याचिकाकर्ताओं ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी।
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शपथपत्र में सरकार को छह माह का समय देने की भी मांग की गई। इस पर हाईकोर्ट ने कोई अंतरिम आदेश दिए बिना मामले की सुनवाई के लिए 19 अक्तूबर की तिथि नियत की है।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि कुमार मलिमठ एवं न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
मामले के अनुसार देहरादून निवासी रवींद्र जुगरान, एसके सिंह और सुभाष नौटियाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि प्रदेश में अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों की छात्रवृत्ति में 2005 से घोटाला किया जा रहा है। यह घोटाला करीब पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक का है। याचिका में कहा गया कि छात्रवृत्ति का पैसा छात्रों को न देकर स्कूलों को दिया गया या फिर उन लोगों को दिया गया, जो उस स्कूल के छात्र थे ही नहीं। याचिकाकर्ताओं ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी।
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