{"_id":"583b1ff74f1c1b5e29088513","slug":"save-tiger-and-get-five-crore","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाघ बचाने को मिलेंगे पांच करोड़ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाघ बचाने को मिलेंगे पांच करोड़
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Sun, 27 Nov 2016 11:33 PM IST
विज्ञापन
बाघ
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
हल्द्वानी वन प्रभाग और नंधौर अभ्यारण्य में बाघों की जिंदगी खतरे में पड़ी है। यहां के रास्ते बंद पड़े हैं। अब वन विभाग हरकत में आया है। केवल हल्द्वानी वन प्रभाग ही नहीं बल्कि बाघ से वाले दूसरे इलाकों (प्रभागों) को भी करोड़ों की राशि जारी करने का फैसला किया गया है। दावा किया जा रहा है इसी सप्ताह यह राशि प्रभागों को मिल जाएगी। वहीं, वन संरक्षक ने सुरक्षा समेत अन्य मुद्दों को लेकर सोमवार को समीक्षा मीटिंग भी बुलाई है।
पश्चिम वृत्त में बाघों की फौज है, लेकिन इसकी सुरक्षा ढीली है। इसके पीछे कथित तौर पर अफसरों की ढिलाई भी रही है। गश्त के लिए मार्ग दो साल से नहीं खुले हैं और विभाग और अफसर मस्त हैं। यह मामला अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया। इसके बाद विभाग में हरकत तेज हुई है। अब गौला कॉर्पस से प्रभागों को वन मार्ग बनाने, सुरक्षा प्रबंध के लिए राशि जारी करने का निर्देश दिया गया है। वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त डॉ. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि हल्द्वानी वन प्रभाग और नंधौर अभ्यारण्य के बंद रास्ते को खोलने आदि के लिए 85 लाख का बजट दिया जा रहा है।
इसी तरह पश्चिमी वन प्रभाग को करीब डेढ़ करोड़ का बजट कॉर्पस से दिया जाएगा। रामनगर वन प्रभाग, तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय और नैनीताल वन प्रभाग में बाघ समेत दूसरे वन्यजीव हैं, यहां भी सुरक्षा प्रबंध मजबूत करने के लिए करीब पौने तीन करोड़ की राशि दी जाएगी। एक सप्ताह के अंदर प्रभागों को मिल जाएगी। पश्चिमी वृत्त के प्रभागों में सुरक्षा समेत दूसरे क्या काम हुए हैं, उसकी समीक्षा की जाएगी। राशि जारी होने के बाद अफसर क्या काम कर रहे हैं, उसका नियमित अंतराल पर फॉलोअप किया जाएगा।
विज्ञापन
डीएफओ के तबादले हो चुके हैं, लेकिन उप प्रभागीय वनाधिकारी (एसडीओ) के स्थानांतरण नहीं हुए हैं। इन तबादलों को लेकर अफसरों की निगाह लगी हैं। चर्चा है कि आचार संहिता लागू होने से पहले एसडीओ के तबादले हो सकते हैं, ऐसे में एसडीओ की निगाहें संभावित तबादला सूची और देहरादून की तरफ लगी हैं। कई मनपसंद कुर्सी को लेकर जुगाड़ लगाने की बात कही जा रही है। सबसे ज्यादा चर्चा तराई केंद्रीय वन प्रभाग में एसडीओ बी निषाद के बाद खाली हुई कुर्सी को लेकर है, इसके कई दावेदार होने की बात कही जा रही है। तराई पश्चिमी वन प्रभाग में एसडीओ को बदले जाने को लेकर भी चर्चा उड़ी है।
पश्चिम वृत्त में बाघों की फौज है, लेकिन इसकी सुरक्षा ढीली है। इसके पीछे कथित तौर पर अफसरों की ढिलाई भी रही है। गश्त के लिए मार्ग दो साल से नहीं खुले हैं और विभाग और अफसर मस्त हैं। यह मामला अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया। इसके बाद विभाग में हरकत तेज हुई है। अब गौला कॉर्पस से प्रभागों को वन मार्ग बनाने, सुरक्षा प्रबंध के लिए राशि जारी करने का निर्देश दिया गया है। वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त डॉ. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि हल्द्वानी वन प्रभाग और नंधौर अभ्यारण्य के बंद रास्ते को खोलने आदि के लिए 85 लाख का बजट दिया जा रहा है।
विज्ञापन
इसी तरह पश्चिमी वन प्रभाग को करीब डेढ़ करोड़ का बजट कॉर्पस से दिया जाएगा। रामनगर वन प्रभाग, तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय और नैनीताल वन प्रभाग में बाघ समेत दूसरे वन्यजीव हैं, यहां भी सुरक्षा प्रबंध मजबूत करने के लिए करीब पौने तीन करोड़ की राशि दी जाएगी। एक सप्ताह के अंदर प्रभागों को मिल जाएगी। पश्चिमी वृत्त के प्रभागों में सुरक्षा समेत दूसरे क्या काम हुए हैं, उसकी समीक्षा की जाएगी। राशि जारी होने के बाद अफसर क्या काम कर रहे हैं, उसका नियमित अंतराल पर फॉलोअप किया जाएगा।
विज्ञापन
डीएफओ के तबादले हो चुके हैं, लेकिन उप प्रभागीय वनाधिकारी (एसडीओ) के स्थानांतरण नहीं हुए हैं। इन तबादलों को लेकर अफसरों की निगाह लगी हैं। चर्चा है कि आचार संहिता लागू होने से पहले एसडीओ के तबादले हो सकते हैं, ऐसे में एसडीओ की निगाहें संभावित तबादला सूची और देहरादून की तरफ लगी हैं। कई मनपसंद कुर्सी को लेकर जुगाड़ लगाने की बात कही जा रही है। सबसे ज्यादा चर्चा तराई केंद्रीय वन प्रभाग में एसडीओ बी निषाद के बाद खाली हुई कुर्सी को लेकर है, इसके कई दावेदार होने की बात कही जा रही है। तराई पश्चिमी वन प्रभाग में एसडीओ को बदले जाने को लेकर भी चर्चा उड़ी है।