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उत्तराखंड में लागू होगा एक ही अभिवहन पत्र

Fri, 11 Aug 2017 01:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी। 
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी।  Updated Fri, 11 Aug 2017 01:59 AM IST
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Same transmission letter
transporters - फोटो : अमर उजाला

हल्द्वानी। अब समूचे उत्तराखंड में समस्त वन प्रभागों का एक ही अभिवहन पत्र (ट्रांजिट पास) होगा। इस अभिवहन पत्र के रंग, रूप, आकार में एकरूपता लाने के लिए कवायद शुरू कर दी गई है। प्रमुख वन संरक्षक ने अभिवहन पत्र बनाने के लिए मुख्य वन संरक्षक सतर्कता विधि एवं प्रकोष्ठ की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति एक माह में पास का निर्धारण कर रिपोर्ट देगी। वर्तमान में प्रदेश में हर वन सर्किल व प्रभागों का अलग-अलग रंग, रूप और आकार का  है।  

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किसी भी किस्म की वन उपज जैसे इमारती लकड़ी, रेता, बजरी, पत्थर, लीसा, कीड़ाजड़ी आदि को एक जगह से अन्यत्र ले जाने के लिए अनुमन्य दस्तावेज को ही अभिवहन पत्र कहा जाता है। इसे फार्म सी 6 सी भी कहा जाता है। इस फार्म वन उपज स्वामी, निर्धारित मार्ग, ले जाने का अंतिम स्थान आदि जानकारियां होती हैं। यह तीन कापी में होता है इसमें एक कापी फार्म जारी करने वाले व दो वन उपज स्वामी को दी जाती है। इस पास के बिना किसी भी वन उपज की निकासी नहीं की जा सकती है।
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समिति में ये अधिकारी शामिल
मुख्य वन संरक्षक सतर्कता विधि एवं प्रकोष्ठ बीपी गुप्ता को अध्यक्ष, डीएफओ गोपेश्वर एनएन पांडे सचिव, वन संरक्षक उत्तरी सर्किल आईपी सिंह व डीएफओ तराई पूर्वी नीतिश मणि त्रिपाठी को सदस्य बनाया गया है। समिति की पहली बैठक 22 अगस्त को होगी। 
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ऐसे होता है तस्करी का खेल 
एक अभिवहन पत्र नहीं होने से पर्वतीय जिलों से होेने वाली लीसा, कीड़ा जड़ी, लकड़ी की तस्करी को बढ़ावा मिलता है। दरअसल, दूसरे वन प्रभागों में किस रंग, रूप का अभिवहन पत्र है इसकी जानकारी अन्य वन प्रभागों को नहीं होती है। इसी का फायदा उठाते हुए तस्कर फर्जी अभिवहन पत्र धड़ल्ले से वन उपज की तस्करी करती है। जब कभी इसका खुलासा होता है तो तस्करी का भंडाफोड़ होता है।

 ये होंगे फायदे
- वन उपज की तस्करी पर लगाम लगेगी
- वन उपज पर वसूले जाने वाले कर में वृद्धि होगी, वन महकमे का राजस्व बढ़ेगा 
- वन महकमे की विश्वसनीयता बढ़ेगी

कोट
सूबे में एक ट्रांजिट पास बनाने के लिए समिति सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर काम कर रही है जल्द ही पास का रंग, रूप आकार का निर्धारण कर लिया जाएगा।
-नीतिश मणि त्रिपाठी, डीएफओ तराई पूर्वी एवं सदस्य ट्रांजिट पास निर्माण समिति 

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